संदेश

मजदूर दिवस : मौसम का चक्र बदलने से हर साल मजदूरों की संख्या कम होती जा रही है

1 मई है मजदूरों के हक की बात चारों ओर हो रही हैं। लोग हर साल मजदूर दिवस मना रहे हैं। हक की बात कर रहे हैं। इन दिनों एक बात देखने को मिल रही है मजदूरों की संख्या बढ़ने के बजाय कम होने की। संख्या कम होने का कारण सीधा है शहरों के मजदूर महानगरों के तरफ रुख कर रहे हैं, तो ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर शहरों के ओर। धन अर्जन के लिए ग्रामीण मजदूर शहर के ओर आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल में इनकी कमी बहुत तेजी से हो रही है। मजदूर किसानों को भी गांव छोड़ना पड़ रहा है। किसान घर छोड़ रहे हैं क्योंकि मौसम का चक्र बदल रहा है। चक्र बदलने से पानी गिरने का समय खराब हो गया है, नदियां सूख चुकी हैं और जिन नदियों में पानी है उसे राज्य शासन उद्योग पतियों को बेंच दिए हैं। पानी बिक रहा है अब बोतल बंद होकर यहां प्राकृति से बिना शुल्क लिए पानी को बोतल बंद कर बेंचा जा रहा है। इसके लिए भी अब मजदूरों की संख्या की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनियां मशीनों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर लोगों की उपयोगिता खत्म करना चाह रही है। इसकी बड़ी वजह कंपनी काम में तेजी चाहती हैं। मजदूरों में यह तेजी उनके प्रशिक्षण प्राप्त करने से ही होगा। चा...

राहुल गांधी ने जनरल में सफर कर क्या साबित किए

कुछ समय पहले प्रधान नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर अपनी फोटो शेयर की थी। वह मैट्रों ट्रेन में सफर कर रहे थे। कुछ समय बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनरल बोगी में सफर करते देखे गए। इसको लेकर सोशल मिडिया में उनकी खुब खिल्ली उड़ाई गई। किसी ने राहुल से हाथ पर आटोग्राफ लिया तो किसी ने अपने हाथ में पोगो और छोटा भीम का टाइमिंग लिखकर मजाक उठाया। इन सब के बीच एक बात जो मन को खटकती है और यह कि राहुल गांधी में अभी भी बचपना है वह दिखाना नहीं चाहते पर दिख जाता है। बतौर उदाहरण मोदी के मेट्रो में सफर के बाद जनरल में राहुल का सफर करना यह साबित करत है कि उन्हें अभी भी बहुत कुछ सिखने की जरूरत है। 

किसान की मौत पर हंगामा क्यों यह तो रोज हो रहा है दिल्ली में हुआ तो सब जाग गए

दिल्ली में राजस्थान का एक किसान आम आदमी पार्टी की किसान रैली के दौरान फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेता है। इस पर पूरे देश में हंगामा मच गया है। दो साल पहले भी इसी दिल्ली में एक लड़की की रेप के बाद हत्या की गई थी। उस समय भी हंगामा हुआ था। दिल्ली में आत्महत्या और हत्या का अब सिलसिला चल पड़ा है। इसका एक वजह है दिल्ली अब लोगों को भा नहीं रही है। वहां पर बैठे लोगों के कारण जनता परेशान हैं। इस आत्महत्या की वजह क्या बनी? मौसम। जी नहीं मौसम ने तो सिर्फ उस किसान गजेंद्र सिंह का फसल बर्बाद किया। देश की कचरा व्यवस्था ने उसका जीना मुहाल कर दिया। बता दें कि कुछ दिन पहले हीं तीन केंद्रीय मंत्रियों ने कहा है कि कोई मरता है तो इसमें सरकार का क्या दोष है। सही है जी इसमें सरकार का क्यया दोष है। मरने वाला मर रहा है आपको क्या है पार्लियामेंट में बैठकर रोटी तोड़ रहे हो उसपर भी आपके जेब से तो कुछ लगता है नहीं। वहां सिर्फ खाने के ही आपको लाखों रुपए सालाना मिल रहा है। इनके बयान से पता चलता है मंत्री चाहते हैं कि किसान मरें। दूसरी बात यह है कि ऐसी आत्महत्या हर  जगह हो रहा है। कभी विदर्भ में तो कभी कही। इसबार...

दिल्ली में गंदगी फैल रहा है, मजबूर जनता देख रही

आम आदमी पार्टी (आप) का सही मतलब कही अंदर अंदर पटकनी ( आप) तो नहीं है। अभी जो दौर दिल्ली में आप के अंदर चल रहा है उसे देखकर तो यही मतलब निकाला जा रहा है। पहले दिल्ली के लोगों ने 49 दिन की सरकार बनाने का मौका दिया। उसके बाद 67 विधायक जीता कर पूर्ण बहुमत दिए, ताकी पुरानी गंदी हो चुकी व्यवस्था में साफ सुथरे लोग आकर सुधार करें। मौका मिलने के बाद ये आदर्श लोग, सच्चे इमानदार लोग जो गंदगी फैला रहे है उसे कैसे दूर किया जाएगा। यह अब सोच का विषय होता जा रहा है। अभी जो गंदगी ये लोग कर रहे हैं उसको देखकर तो बस एक कहानी याद आती है। जो कुछ इस तरह है...बहुत साल पहले एक व्यापारी के गोदाम में चुहे बहुत गंदगी और नुकसान पहुंचा रहे थे। इससे ब्यापारी को घाटा तो हो ही रहा था आस-पास के लोगों ने गोदाम के चुहों की शिकायत भी करनी शुरू कर दी। ब्यापारी इन काले चुहों से तंग आने के बाद भी कुछ नहीं कर पा रहा था, लेकिन एक दौर आया जब उसे इस परेशानी को खत्म करने का मौका आखिरकार मिल गया। उसके कुछ करीबी मित्रों ने बताया कि बाजार में सफेद चुहे आए हैं जिनसे काले चुहे डरते हैं और ये सफेद चुहे नुकसान नहीं पहुंचा...

वादा पूरा करने में लगी है आप...स्टींग तो एक बहाना है

दिल्ली में चुनावी घोषणा में आम आदमी पार्टी ने कहा था दिल्ली की सुरक्षा को लेकर 15 लाख सीसीटीवी कैमरा लगाएंगे। चुनाव जीते अब लोगों को किया वादा आपीयों ने पूरा करना शुरू कर दिया है। इसीका असर है की स्टिंग पर स्टिंग आ रहा है  इन दिनों। हर टीवी चैनल पर स्टिंग खुब छाया हुआ है। खबरचियों को भी मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ रही। आपीयो के कार्यालय जा रहे हैं वहां कोई सीडी तो कोई डीवीडी और कोई तो पेन ड्राइव तक में स्ट्रिंग लेकर आ रहा। इससे ही पता चलता है कि आपीयो ने वादा किया था सीसीटीवी लगवाने का तो माना जा रहा है कि सभी असुरक्षित जगहों पर इसे लगाकर स्टिंग-स्टिंग ला रहे हैं। वैसे सही भी है यहां से नकलने वाले स्टिंग भी मजेदार हैं। कुछ लोग तो इस स्टिंग को ही आप का वादा पूरा करना मान रहे हैं। लोगों का मानना है कि स्टिंग तो एक बहाना है सरकार का वादा पूरा करके दिखाना है। 

महात्मा गांधी जयंती पर छुट्टी जरूरी क्यों ?

चित्र
इसका जवाब कोई देगा। देश को सिर्फ महात्मा गांधी ने ही तो आजाद नहीं कराया। क्या वे अकेले देश को आजाद कराए। तो फिर उनके अकेले के जन्मदिन और पुण्यतिथि पर छुट्‌टी क्यों दी जा रही है। बहुत सारे राजनेता हैं जिन्होंने देश के लिए किया, और करने की क्या बात है जिस दौर में जो होता है वह उस दौर की बुराई दूर करने के लिए करता ही हैं। वर्तमान में अन्ना हजारे लगातार सरकार के खिलाफ हैं ऐसे में क्या उनके जन्मदिन को भी छुट्‌टी होगी। बाल साहब ठाकरे ने मुंबई के लोगों के हित के लिए लड़ाई किया। कई राज्यों में लोग लगातार लोगों के हित में लड़ाई कर रहे हैं। सभी के जन्म पर छुट्‌टीयां नहीं दी जा सकती। महात्मा गांधी का नाम बड़ा और दर्शन छोटा कांग्रेस के समय में कर दिया गया। सुभाष चंद्र बोस की जानकारी नहीं दी जा रही सुप्रीम कोर्ट से लेकर हर जगह पर इसकी मांग की गई। अगर उनकी जानकारी सरकार नहीं दे सकती तो महात्मा गांधी के जन्मदिन पर छुट्‌टी भी हमें नहीं चाहिए। अगर संविधान में समानता का अधिकार है तो पहले जाओ उन सभी राजनेताओं को समानता का अधिकार दो जिन्होंने देश की आजादी के लिए बहुत कुछ किया है महात्मा गांधी...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बहुत सारी बधाईयां देखने मिली काश उतना पालन भी करते

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर फेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग के साथ इंस्ट्राग्राम, गुगल प्लस, मैसेज हर जगह बधाई के  दौर चलते रहे। लोग महिला सशक्तिकरण से लेकर शिक्षा प्रणाली और रोजगारोन्मुखीकरण, रोजगार परख बनाने, मानसिक और आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने कई तरह की बातें की गई। काश सारी बातें पूरी भी कर दी जाती। छोडों वह सब इतना तो करो कि उन्हें सम्मान करना सिख जाओ। मालूम है अब कई बहाने भी हो जाएगें यह तो बधाई देने वालों को सोचना चाहिए। पुरुष दिवस भी मनाना चाहिए  - देश में कई तरह के दिवस मनाए जाते हैं। इसमें न्यू इयर से लेकर 31 दिसंबर तक कई खास मौके आदे है। गणतंत्रता दिवस, आजादी दिवस, इसकी जंयती उसकी जयंती पुरुषों ने क्या बिगाड़ा है भाई इनके लिए भी कोई दिवस निर्धारित कर दो। ताकि इन्हें भी कोई बधाई दे दे। ----------- कैसा महिला दिवस शराब दुकाने तो बंद करवा सकती थी सरकार  - महिला दिवस वो भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। कम से कम सरकार महिलाओं का इज्जत करना तो सीख जाए। उनको एक दिन ही मिलती है माना इस दिन कम से कम शराब की बिक्री पर बंदी लगा सकती है। गांधी ने विरोध किया शराब का इसलिए उनके जन...

मोदी जी अब मान भी लिजीए कि जो बादल गरजते ज्यादा है वे बरसते कम हैं

देश के प्रधानमंत्री जी यह क्या करवा रहे हैं इससे देश में भूचाल मचा हुआ है। आपकी वह मर्दानगी भरी बातें कहा गई जो राजस्थान की विधानसभा चुनाव के दौरान और लोकसभा चुनाव के समय किया करते थे।“ भाईयों और बहनों... मित्रों” कहां गया वह दावा जिसमें कहे थे कि सेना का एक जवान मारा जाएगा तो हम कंदा कोडकर ले आएंगे पाकिस्तान से। अब भाजपा समर्थित पार्टी पीडीपी देश की सरकार से पूछे बीना ही आंतकी को छोड़ देती है ताकि सेना के जवान मारे जाएं यह कैसी कथनी और करनी है। मोदी जी... आपने जो देश के नौ जवानों को वादा किया था वह झूठा निकला है। पहले 370 पर आपका 376 हो गया और अब आंतकी पर 377 भी लग रहा है कर दी पीडीपी ने। माना तो ऐसा ही जा रहा है। आपकी कथनी और करनी में उतना ही फर्क है जितना देश के पूर्व प्रधानमंत्री के कथनी और करनी में होती थी। हर सवाल का जवाब देना पहले प्रधानमंत्री भी नहीं चाहते थे और आप भी आपके और उनमें फर्क इतना ही है कि आप बोलते ज्यादा हो और वे चुप ज्यादा रहते थे। अब तो आपको भी मान लेना चाहिए की कथनी और करनी में फर्क होता है। जो बादल ज्यादा गरजते हैं वे बरसते कम हैं।

गुलामी से दो कदम ही निकले हैं हम

15 अगस्त को हम आजाद हुए। ढाई साल बाद बना हामारा संविधान। नकल का यह संविधान 26 जनवरी 1950 हमारा संविधान लागू हुआ। इसमें वे सारी व्यवस्थाएं हमें मिली जो अंग्रेजों की नकल कर ली गई। गुलामी हमें जकड़ी रही। साल बीतते गए। साल, दस साल और फिर पचास साल बीत गए। हम उन्हीं नियमों को मानते रहे जो उस समय की व्यवस्था थी। कुछ परिवर्तन भी हुआ पर नाम मात्र का। दुनिया का सबसे बड़ा लिखीत संविधान होने का परचम हर साल लहरा रहे हैं पर फायदा क्या है पता नहीं। संविधान ऐसा ही कि दो वक्त की रोटी इसके कागज को जलाकर सेंकी जा सकती है लेकिन गरीबों के लिए इसमें कुछ भी नहीं है। अमीरों के लिए भी कुछ नहीं है। अगर इसमें कुछ है तो मध्यम वर्गीय लोगों के लिए न मरे में है न जींदा में। ये वे लोग है जो न मर्द में है न औरत में थर्ड जेंडर को कुछ समय तो मान्यता भी मिल गई है। इनका उससे भी हाल बुरा है। अभी तो बस जिसके पास राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार, बैंक में खाते आदि-आदि है उन्हे सभी लाभ मिल रहे हैं। जिनके पास नहीं है वे परेशान है इसके लिए प्रतिदिन सिर फुड़वा रहे हैं। साला एक नागरिकता ही नहीं है भारत का। किसी के पास अगर वोरट आईडी कार...

मांझी का नाव नहीं डूबता मतलब बिहार की नैया को पार लगाने जीतन करेंगे जतन

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मांझी का कभी नाव नहीं डूबता। उनकी यह बात कितनी सही हो सकती है यह तो वक्त ही बतलाएगा, लेकिन अभी जो स्थिति है वह तो ऐसा लगता है कि उनका कहना सच हो सकता है। खासकर इससे कि वे खुद दिल्ली पहुंचकर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाह रहे हैं। इस बात को लेकर नरेंद्र मोदी को भी उस वक्त का इंतेजार रहेगा। जब वे नितीश के मांझी से मिलेंगे, क्योंकि 20 मई 2014 को जब जीतन राम मांझी ने बिहार का पतवार थाम्हा था, उस समय यह बात निकलकर आई थी कि मांझी जैसे राम की नाव को खेया था उसी तरह जीतन राम मांझी नितीश के नाव को पार लगा देंगे। वर्तमान में जो स्थिति बनी है वह तो नितीश को मजधार में डूबाने वाला है, क्योंकि बीच मजधार में नितीश ने पतवार थाम्हे मांझी को ऐसा तमाचा मारा है कि वे अब नैया को वहीं डूबाने के लिए नाव में छेद कर खूद नदी में कूद तैरकर पार करने निकल पड़े हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि नितीश नाव में पानी भरने से पहले नाव को किनारे पर ले आते है या फिर बीच में हीं डूब जाएगे। दूसरी तरफ यह भी देखना होगा कि नदी में कूदे मांझी क्या नदी के किनारे पहुंचते है...