महात्मा गांधी जयंती पर छुट्टी जरूरी क्यों ?
इसका जवाब कोई देगा। देश को सिर्फ महात्मा गांधी ने ही तो आजाद नहीं
कराया। क्या वे अकेले देश को आजाद कराए। तो फिर उनके अकेले के जन्मदिन और
पुण्यतिथि पर छुट्टी क्यों दी जा रही है। बहुत सारे राजनेता हैं जिन्होंने
देश के लिए किया, और करने की क्या बात है जिस दौर में जो होता है वह उस
दौर की बुराई दूर करने के लिए करता ही हैं। वर्तमान में अन्ना हजारे लगातार
सरकार के खिलाफ हैं ऐसे में क्या उनके जन्मदिन को भी छुट्टी होगी। बाल
साहब ठाकरे ने मुंबई के लोगों के हित के लिए लड़ाई किया। कई राज्यों में लोग
लगातार लोगों के हित में लड़ाई कर रहे हैं। सभी के जन्म पर छुट्टीयां नहीं
दी जा सकती। महात्मा गांधी का नाम बड़ा और दर्शन छोटा कांग्रेस के समय में
कर दिया गया। सुभाष चंद्र बोस की जानकारी नहीं दी जा रही सुप्रीम कोर्ट से
लेकर हर जगह पर इसकी मांग की गई। अगर उनकी जानकारी सरकार नहीं दे सकती तो
महात्मा गांधी के जन्मदिन पर छुट्टी भी हमें नहीं चाहिए। अगर संविधान में
समानता का अधिकार है तो पहले जाओ उन सभी राजनेताओं को समानता का अधिकार दो
जिन्होंने देश की आजादी के लिए बहुत कुछ किया है महात्मा गांधी से पहले भी
बहुत सारे नेता काम किए हैं देश के लिए। कौन याद कर रहा है उनके काम को।
मंगल पांडेय, लक्ष्मी बाई, नाना साहेब, लोकमान्य तिलक सहित अनगिनित नाम ऐसे
है जो कई गांधी को जन्म दिए। नाम उनका इसलिए खत्म कर दिया गया क्योंकि
आजादी के बाद सुभाष चंद्र बोस की कांग्रेस ने हत्या करवाई और सरदार पटेल को
प्रधानमंत्री न बनने देने के लिए महात्मा गांधी से मजबुर करवाया। यहीं से
महात्मा गांधी पैदा होते हैं। महात्मा गांधी 1931 में देश के तीन युवा
क्रांतिकारी के मौत के जिम्मेदार भी है। इसमें भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु
को मौत के घाट अंग्रेजों ने उतारा है यह सर्वविदीत है। 1948 में जो हुआ वह
उसी का परिणाम था। आजादी गांधी नहीं उन हजारों आंदोलनकारियों के कारण मिली
है। इसलिए यह जन्मदिन पर मिलने वाली छुट्टी को रद्द कर नया नियम लाया जाया
चाहिए। अगर गोवा की सरकार गलती से भी यह कदम उठाई है तो सही है। कोई जरूरत
नहीं है देश में जबरन गांधी को थोपना। पहले ही उन्हें राष्ट्रपिता के रूप
में जबरन थोपा जा चुका है। यहां तक की लोगों को नोट तक का उपयोग करने का मन
नहीं करता तो सिर्फ गांधी के चित्र के कारण मेरे संपर्क में कई ऐसे लोग है
जो अंग्रेजो का चापलुस कहते हैं गांधी को। एक नजरिए से देखा जाए तो सचमुच
गांधी चापलूस थे।
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