मजदूर दिवस : मौसम का चक्र बदलने से हर साल मजदूरों की संख्या कम होती जा रही है

1 मई है मजदूरों के हक की बात चारों ओर हो रही हैं। लोग हर साल मजदूर दिवस मना रहे हैं। हक की बात कर रहे हैं। इन दिनों एक बात देखने को मिल रही है मजदूरों की संख्या बढ़ने के बजाय कम होने की। संख्या कम होने का कारण सीधा है शहरों के मजदूर महानगरों के तरफ रुख कर रहे हैं, तो ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर शहरों के ओर। धन अर्जन के लिए ग्रामीण मजदूर शहर के ओर आ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल में इनकी कमी बहुत तेजी से हो रही है। मजदूर किसानों को भी गांव छोड़ना पड़ रहा है। किसान घर छोड़ रहे हैं क्योंकि मौसम का चक्र बदल रहा है। चक्र बदलने से पानी गिरने का समय खराब हो गया है, नदियां सूख चुकी हैं और जिन नदियों में पानी है उसे राज्य शासन उद्योग पतियों को बेंच दिए हैं। पानी बिक रहा है अब बोतल बंद होकर यहां प्राकृति से बिना शुल्क लिए पानी को बोतल बंद कर बेंचा जा रहा है। इसके लिए भी अब मजदूरों की संख्या की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनियां मशीनों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर लोगों की उपयोगिता खत्म करना चाह रही है। इसकी बड़ी वजह कंपनी काम में तेजी चाहती हैं। मजदूरों में यह तेजी उनके प्रशिक्षण प्राप्त करने से ही होगा। चाहे वह आईटीआई से मिले या अन्य संस्थानों से। उन्हें अगर मजदूर की श्रेणी से आगे बढ़ना है तो प्रशिक्षण प्राप्त करना ही होगा। किसानों को भी अपने कार्य का तरिका बदलना होगा। इसके लिए उन्हें तालाब और अन्य जल स्त्रोत का माध्यम अपनाना होगा। 

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