किसान की मौत पर हंगामा क्यों यह तो रोज हो रहा है दिल्ली में हुआ तो सब जाग गए
दिल्ली में राजस्थान का एक किसान आम आदमी पार्टी की किसान रैली के दौरान फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेता है। इस पर पूरे देश में हंगामा मच गया है। दो साल पहले भी इसी दिल्ली में एक लड़की की रेप के बाद हत्या की गई थी। उस समय भी हंगामा हुआ था। दिल्ली में आत्महत्या और हत्या का अब सिलसिला चल पड़ा है। इसका एक वजह है दिल्ली अब लोगों को भा नहीं रही है। वहां पर बैठे लोगों के कारण जनता परेशान हैं। इस आत्महत्या की वजह क्या बनी? मौसम। जी नहीं मौसम ने तो सिर्फ उस किसान गजेंद्र सिंह का फसल बर्बाद किया। देश की कचरा व्यवस्था ने उसका जीना मुहाल कर दिया। बता दें कि कुछ दिन पहले हीं तीन केंद्रीय मंत्रियों ने कहा है कि कोई मरता है तो इसमें सरकार का क्या दोष है। सही है जी इसमें सरकार का क्यया दोष है। मरने वाला मर रहा है आपको क्या है पार्लियामेंट में बैठकर रोटी तोड़ रहे हो उसपर भी आपके जेब से तो कुछ लगता है नहीं। वहां सिर्फ खाने के ही आपको लाखों रुपए सालाना मिल रहा है। इनके बयान से पता चलता है मंत्री चाहते हैं कि किसान मरें। दूसरी बात यह है कि ऐसी आत्महत्या हर जगह हो रहा है। कभी विदर्भ में तो कभी कही। इसबार नई बात यहां यह हुआ कि दिल्ली में पहली बार कोई किसान ने आत्महत्या करने पहुंचा। आत्महत्या किया वह भी भरी सभा में। पीपली लाइव में जैसे नत्था मरेगा कब वाला सीन याद आ गया। कहते हैं यह गांधी नेहरू लाल बहादुर शास्त्री का देश है लेकिन अब यह कांग्रेस भाजपा और आप का देश है। ऐसे में किसान को तो मरना ही है। आजादी से पहले किसान की उन्नति की बात की जाती थी अब उद्योग की उन्नति की बात कही जा रही है। आजादी के बाद से उद्योगिकरण का जितनी तेजी से देश में विकास हुआ है उतनी तेजी से किसी और क्षेत्र का विकास नहीं हुआ।
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