मांझी का नाव नहीं डूबता मतलब बिहार की नैया को पार लगाने जीतन करेंगे जतन
बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मांझी का कभी नाव नहीं डूबता। उनकी यह बात कितनी सही हो सकती है यह तो वक्त ही बतलाएगा, लेकिन अभी जो स्थिति है वह तो ऐसा लगता है कि उनका कहना सच हो सकता है। खासकर इससे कि वे खुद दिल्ली पहुंचकर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाह रहे हैं। इस बात को लेकर नरेंद्र मोदी को भी उस वक्त का इंतेजार रहेगा। जब वे नितीश के मांझी से मिलेंगे, क्योंकि 20 मई 2014 को जब जीतन राम मांझी ने बिहार का पतवार थाम्हा था, उस समय यह बात निकलकर आई थी कि मांझी जैसे राम की नाव को खेया था उसी तरह जीतन राम मांझी नितीश के नाव को पार लगा देंगे। वर्तमान में जो स्थिति बनी है वह तो नितीश को मजधार में डूबाने वाला है, क्योंकि बीच मजधार में नितीश ने पतवार थाम्हे मांझी को ऐसा तमाचा मारा है कि वे अब नैया को वहीं डूबाने के लिए नाव में छेद कर खूद नदी में कूद तैरकर पार करने निकल पड़े हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि नितीश नाव में पानी भरने से पहले नाव को किनारे पर ले आते है या फिर बीच में हीं डूब जाएगे। दूसरी तरफ यह भी देखना होगा कि नदी में कूदे मांझी क्या नदी के किनारे पहुंचते हैं। अगर वे पहुंचते भी है तो समय पर पहुंचते हैं या नहीं क्योंकि वे खुदे समय पर हैं, किनरे बहुत किनारे पहुंच भी गए हैं। अगर मोदी की मुलाकात उनका सफल मुलाकात रहा तो नैया डूबे या किनारे लगे मांझी को इससे फर्क नहीं पड़ता। हां इससे बिहार की राजनीति में मची हलचल और तेज हो जाएगी। आपको बताते चलूं कि नितीश के इस्तिफा के बाद मुख्यमंत्री का पद सम्हालने वाले जीतन राम महादलित मुसहर समुदाय से हैं। उनको राज्य में शीर्ष पद पर 20 मई 2014 को बिहार के राज्यपाल डी.वाई.पाटील पद व गोपनीयता की शपथ दिला बैठाया था। उस समय वे बिहार के 23 वें मुख्यमंत्री बने थे।
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