अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बहुत सारी बधाईयां देखने मिली काश उतना पालन भी करते
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर फेसबुक, ट्वीटर और ब्लॉग के साथ इंस्ट्राग्राम, गुगल प्लस, मैसेज हर जगह बधाई के दौर चलते रहे। लोग महिला सशक्तिकरण से लेकर शिक्षा प्रणाली और रोजगारोन्मुखीकरण, रोजगार परख बनाने, मानसिक और आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने कई तरह की बातें की गई। काश सारी बातें पूरी भी कर दी जाती। छोडों वह सब इतना तो करो कि उन्हें सम्मान करना सिख जाओ। मालूम है अब कई बहाने भी हो जाएगें यह तो बधाई देने वालों को सोचना चाहिए।
पुरुष दिवस भी मनाना चाहिए - देश में कई तरह के दिवस मनाए जाते हैं। इसमें न्यू इयर से लेकर 31 दिसंबर तक कई खास मौके आदे है। गणतंत्रता दिवस, आजादी दिवस, इसकी जंयती उसकी जयंती पुरुषों ने क्या बिगाड़ा है भाई इनके लिए भी कोई दिवस निर्धारित कर दो। ताकि इन्हें भी कोई बधाई दे दे।
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कैसा महिला दिवस शराब दुकाने तो बंद करवा सकती थी सरकार - महिला दिवस वो भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। कम से कम सरकार महिलाओं का इज्जत करना तो सीख जाए। उनको एक दिन ही मिलती है माना इस दिन कम से कम शराब की बिक्री पर बंदी लगा सकती है। गांधी ने विरोध किया शराब का इसलिए उनके जन्म और मृत्यु बर बंदी हो गई, घासीदास ने इसका विरोध किया तो उनके जन्मदिन पर बंदी कर दी गई। महिलाएं अपना जन्म दिवस मना सके शराबी पुरुष मन उन्हें परेशान न करे इसलिए कम से कम शराब की बिक्री तो बंद करनी ही चाहिए थी।
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सरकार खुद सिख जाती महिलाओं का सम्मान करना - सरकार खुद नहीं चाहती की जो वर्तमान में समस्याएं हैं वह खत्म हो जाए। महिलाओं का सम्मान सरकार खुद नहीं करती। वहां बैठे जिम्मेदार लोग खुद अपमान करते है महिलाओं का। उनको आदर्श वैसे तो कोई मानता नहीं पर बुरी आदतों के लिए बुरे लोगों को ही आदर्श माना जाता है। सरकार खुद पहले महिलाओं का सम्मान सिखे।
पुरुष दिवस भी मनाना चाहिए - देश में कई तरह के दिवस मनाए जाते हैं। इसमें न्यू इयर से लेकर 31 दिसंबर तक कई खास मौके आदे है। गणतंत्रता दिवस, आजादी दिवस, इसकी जंयती उसकी जयंती पुरुषों ने क्या बिगाड़ा है भाई इनके लिए भी कोई दिवस निर्धारित कर दो। ताकि इन्हें भी कोई बधाई दे दे।
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कैसा महिला दिवस शराब दुकाने तो बंद करवा सकती थी सरकार - महिला दिवस वो भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। कम से कम सरकार महिलाओं का इज्जत करना तो सीख जाए। उनको एक दिन ही मिलती है माना इस दिन कम से कम शराब की बिक्री पर बंदी लगा सकती है। गांधी ने विरोध किया शराब का इसलिए उनके जन्म और मृत्यु बर बंदी हो गई, घासीदास ने इसका विरोध किया तो उनके जन्मदिन पर बंदी कर दी गई। महिलाएं अपना जन्म दिवस मना सके शराबी पुरुष मन उन्हें परेशान न करे इसलिए कम से कम शराब की बिक्री तो बंद करनी ही चाहिए थी।
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सरकार खुद सिख जाती महिलाओं का सम्मान करना - सरकार खुद नहीं चाहती की जो वर्तमान में समस्याएं हैं वह खत्म हो जाए। महिलाओं का सम्मान सरकार खुद नहीं करती। वहां बैठे जिम्मेदार लोग खुद अपमान करते है महिलाओं का। उनको आदर्श वैसे तो कोई मानता नहीं पर बुरी आदतों के लिए बुरे लोगों को ही आदर्श माना जाता है। सरकार खुद पहले महिलाओं का सम्मान सिखे।
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