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पशु वध बंद हो...गाय क्या और बकरी क्या

बाकरीद आ गया है...अब कुर्बानी की बात होगी। कुर्बानी के नाम पर हजारों बकरों को काटा जाएगा। इससे पहले नवरात्रि बीता इसमें भी हजारों बकरों को बली के नामपर काट दिया गया। हो क्या रहा है समझ नहीं आता। कुछ हिंदूओं ने कहा कि गाय मत काटो क्योंकि इसके दुध को हम पीते है यह हमारी माता है। फिर नवरात्र पर बकरी के बच्चे को क्यों काट दिया क्या बकरी का दुध नहीं पीते। अगर बकरी का दुध पीते हैं तो बकरा तो भाई हुआ ना। मतलब आप अपने ही भाई के मांस को खा रहे हैं। मुझे उन लोगों से घीन आता है जो इस तरह की हरकत करते हैं। जरा सोचिए कितनी खुबसुरत चीज बनाई है ऊपर वाले ने इंसान तो इंसान ही बने रहो ना क्यों जानवर बनने पर तुले हुए हो। तुले क्या हो उससे भी तो गए बीते हो जंगल के जानवर शेर, भालू, तेंदुआ अपने भूख को मिटाने के लिए शिकार करते हैं जबकि तथा कथित इंसान शौक पुरा करने के लिए जीवों की हत्या कर रहे है। कितना गलत है जीवों की हत्या करना। गाय को लेकर यह धारना बन गई है लोगों में की गाय हमारी माता है क्योंकि उसका हम दुध पीते है और वह प्रकृति दृष्टिकोण से भी अच्छी है तो क्या दूसरे जीव खराब है? जितने भी हिंदू वादी लोग...

रावण मारा गया....

बधाई हो रावण मारा गया है... कितना खुश हुए आप। दसहरा बीत गया लोगों के लिए सिर्फ यह त्योहार ही तो है। रावण मारना और उसके बाद घर जाकर मन में रा‌वण को पाले रखना। मैदान में रा‌वण को जब मारते है तो कहते हैं कि मन की बुराई रावण को मार दो और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है यह त्योहार क्या वाकई मन की गंदगी दूर हो जाती है। क्या हम फिर उसी तरह से जीवन गुजारते है जैसे बचपन में गुजारते थे। नहीं ना यही है मन में बैठे रावण की देन इसे इतनी आसानी से नहीं मारा जा सकता और कोई मारना भी चाहे तो नहीं मार सकता क्योंकि उसे दूसरे मारने नहीं देंगे। रावण दहन में अक्सर देखा जाता है कि गंदगी दूर करने की बात तो कहते है पर शहर में इतना गंदगी होता है उसे कभी कोई साफ तक नहीं करते। काश एक दिन भी लोग गंदगी साफ करते शहर में उन तमाम सफाई कर्मियों को छुट्‌टी देकर। 

लापरवाही किसकी...पब्लिक या प्रशासन...जिम्मेदार कौन...हम या...

पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के दौरान भगदड़ मच गया 33 लोगों की मौत हो गई 100 से ज्यादा लोग घायल हुए है। अफवाह के कारण यह हादसा हुआ अभी तक की जो रिपोर्ट है उसके हिसाब से। लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने व्यवस्था नहीं की थी। सवाल यहां यह है कि प्रशासन ने क्या व्यवस्था नहीं किया? जिसके कारण यह हादसा हुआ। देखने के लिए क्या प्रशासन ने आमंत्रित किया था? या प्रशासन ने यह अफवाह फैलाई थी कि वहां बिजली का तार गिर गया है। यह सब बकवास है लग रहा होगा हम पर सच यही है कि हम अपनी जिम्मेदारी कितना निभाए। पटना की बात है वहां अक्सर ही हादसे क्यों हो रहे है क्या यह प्रायोजित है नहीं ना तो फिर लापरवाही साहब हम आप की है जानते है कि वहां इतनी भीड़ है निकलने के लिए चार दरवाजे है तो क्या उस मैदान की क्षमता उतनी थी जितने लोग उसमें समा गए थे। प्रशासन मना करती तो हगांमा नहीं की तो मारे गए 33 लोग। लापरवाही तो है पर किसकी यह तय करने का अधिकार मुझे नहीं पर यह कह सकता हूं कि जितना जिम्मेदारी प्रशासन की आपकी सुरक्षा को लेकर है उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी आपकी अपनी सूरक्षा को लेकर होना चाहिए। हादसा हुआ लोग मारे गए...

यहां रावण के सौदागर भी हैं और खरीददार भी

रावण को बेचने और खरीदने की परम्परा है इस पर ही एक लेख है। टॉपिक मुझे थोड़ा इंट्रेस्टिंग लगा तो सोचा आप तक पहुंचा ही दूं ताकि आप भी जान जाए कि हो क्या रहा है। बात यह है कि रावण दहन दसहरा की पूर्व रात मैं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर जिसे यहां का न्यायधानी कहते हैं में घुमा। मैं यहां तीन महीने से हूं पर कभी भी रात 2 बजे भ्रमण करने का मौका नहीं मिला। किसी कारण वश यह देखने का मौका मिला घुमने का मौका मिला तो अपनी बाईक पर शहर घुमने निकल पड़ा। यहां मैं दुर्गा पंडालों को देखा, गली मोहल्लों को देखा और भी बहुत कुछ देखा साथ ही देखा की लोग रावण बना रहे है। थोड़ा जिज्ञासु हूं तो उनके पास जाकर खड़ा हो गया दूसरे दिन रावण दहन है तो सभी जी जान से इस काम में जुटे है देखता हूं। जितने भी कारिगर इस कार्य में लगे है वे सारे के सारे जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा रा‌वण के पुतले को तैयार कर रहे थे। मैं सोचा रावण दहन को लेकर कोई कंपटिशन होगा। उनसे पुछ लिया कि इतने सारे रावण पुतला का वे करेंगे क्या तो पुतला बनाने वालों की जवाब था बेंचने के लिए बना रहे हैं। यह सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ कि वे पुतला बेचेंगे। यह सुनकर मैं...

गांधी को ही सिर्फ क्यों शास्त्री को याद क्यों नहीं कर रहा देश...

देश का भला करने वाले क्या सिर्फ गांधी ही थे बाकी नेता क्या देश को चट बस किए क्या। अगर देश का भला किए तो सिर्फ गांधी को ही हर मौके पर याद क्यों किया जाता है बाकि नेताओं को क्यों नहीं। अब 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती मनाई जा रही हैं ठिक बात है उनका जन्मदिन है उन्हें याद किजीए श्रद्धाजंलि अर्पित किजीए पर इस दिन लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्म हुआ था। उनकी आज 110 वीं जयंती है उन्हे देश में कितने लोंगो ने याद किया कुछ दिन पहले की हीं बात है भगत सिंह की जयंती थी उन्हें कितनों ने याद किया। क्या ये लोग देश के लिए कुछ नहीं किया। हालत तो ऐसे हो गए कि जिसका नाम हो रहा है वह अमर शहीद हो गया पर जो वाकई में देश का भला किया है देश के लिए कुर्बान हुआ उसको कुत्ता तक नहीं पुछ रहा। कुत्ते जयंती पर मुर्तियों पर पेशाब कर रहे हैं कही तो कहीं प्रतिमाओं के पास इतने घास उग आए है कि पता ही नहीं चलता है कि आखीर ए महा पुरुष है कौन। बस भगवान तो वे लोग बन बैठे है जिनके नाम का लोग फायदा उठा रहे है। राजनीतिक हरकतें हो पर महापुरुषों के साथ तो मत करो राजनीतिक रोटियां तोड़ रहे हैं बहुत अच्छा है, लेकिन उनका सम्मान भी ...

मन का रावण मारकर जीत लो जग सारा...

विजय दसमी पर रावण का वध दस सिरों वाले का अंत। हमारे राम ने आज के हजारों साल पहले हमें राक्षस रूपी रावण से मुक्त तो कर दिया पर क्या रावण मरा? सवाल तो है। जवाब है हां रावण तो मर गया जब राम ने रावण को मारा उसी समय रावण की मौत हो गई। फिर रावण को मैं जींदा कर क्यों रहा हूं तो इसका जवाब है कि रावण को पता था कि उसे राम मार देंगे इसलिए वह अपने शरीर में अपना प्राण को न बसाकर आदमी के मन में रा‌वण को बसा दिया क्योंकि वह विद्वान था राक्षण कुल में पैदा तो हुआ पर उसके पिता प्रखांड विद्वान थे और वह स्वयं भी प्रखांड विद्वान था। जिसनें शिव और ब्रम्हा को खुश कर लिया हो और उनको अपने अनुसार वरदान देने के लिए मजबुर कर दिया हो वह सामान्य तो नहीं हो सकता। यह भी मान्यता है कि रावण ने कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और वह जब पर्वत लेकर लंका के लिए जाने लगा तो भगवान शिव ने उसे रोका तभी तो उन्होंने शिव स्त्रोत किया और फिर शिव को साक्षात प्रकट होना पड़ा। जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌। डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥ जटा कटा हसंभ्...

केजरीवाल की मुहिम को कहीं अपना तो नहीं रहे मोदी

आम आदमी पार्टी (आप) यह नाम तो आप ने सुना हीं होगा। हांजी हां हम बात कर रहे हैं आपकी आम आदमी पार्टी की आम आदमी की जिसने दिल्ली में 49 दिन की सरकार चलाई और अपनी शर्त न मानने पर इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद उसकी खुब छीछा लेदर किया गया और फिर मजाक भी उडाई गई की झाड़ू वाले क्या करेंगे। दरअसल झाड़ू आम आदमी पार्टी की चुनाव चिन्ह है और उसका एजेंडा भी था गंदगी को साफ करेंगे। फिर आप के संयोजक अरविंद केजरीवार जिन्हें एके 49 भी कहा जाता है वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़े और उनके दिल में यह झाड़ू इतना बस गया कि वे केजरीवाल के मुहिम को अपना सा लिए है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर जगह झाड़ू लग रहा है। कलेक्टर हो या एसपी मंत्री हो या संत्री सब के सब झाड़ू लगाने में व्यस्त हैं। आखिर प्रधानमंत्री ने जो यह मुहिम चालू करने कहा है। और यह तो भाजपा का राष्ट्रीय मुहिम भी बन गई है। कांग्रेस के लोग भी इसे अपना रहे है कारण महात्मा गांधी जयंती पर नरेंद्र मोदी ने जो यह मुहिम चालू कर रहे हैं। पता चला है कि कर्मचारियों को इस सफाई अभियान के लिए आधे दिन की छुट्‌टी भी इसमें शामिल होने के लिए दी जा रह...

जेल जाने का डर या झूठी बीमारी... बिका हुआ कानून और न्याय व्यवस्था...

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जेल जाने का डर या झूठी बीमारी...  बिका हुआ कानून और न्याय व्यवस्था... न्यायालय ने आय से अधिक मामले में जे. जयललीता को चार साल सजा सुनाई। 18 साल पहले किए गुनाह आय से अधिक संपत्ति मामले में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता को कोर्ट ने 4 साल कैद की सजा सुनाई। हमारी न्याय व्यवस्था कितनी मजबूत है और हम कितनी जल्दी न्याय पा रहे है इसी बात से पता चलता है। सिर्फ जयललिता ही नहीं उनकी तरह के कई और मामले है जिसमें कोर्ट में नेताओं के खिलाफ या तो केस पेंडिग है या फिर उनपर करप्शन का दोष सिद्ध हो चुका है। कुछ माह पहले की ही तो बात है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाला सिद्ध हुआ और उन्हें जेल जानी पड़ी। पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर सुखराम और हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला को भी कोर्ट ने दोषी करार दे चुकी है।                 समझ नहीं आता एक बात की जब भी किसी बड़ा नेता या सफेद पोश लोगों को न्यायालय से सजा मिलती है तो उनकी तबीयत कैसे बिगड़ जाती। अब तो वक्त आ गया है कि न्यायालय में भी डॉक्टर नियुक्त ...

अब सोच बदलने की जरुरत है...

बहुत साल हो गए समाज में अब बदलाव होना चाहिए। लोगों की सोच बदलनी चाहिए। देखने को मिल रहा है लगातार कन्या भ्रूण हत्या की संख्या में इजाफा हुआ है लोगों को अब अपनी इस छोटी मानसिकता को बदलना होगा कि लड़का ही उसका बेड़ा पार करेगा। अगर ऐसा है तो ‌वे शादी हीं न करे। पुरुषों की मानसिकता में अगर लड़का और लड़की को लेकर मतांतर हो तो चलता है क्योंकि वे यह सोच सकते हैं कि वे लड़के को पसंद करते हैं पर अगर महिलाएं भी लड़कियों के जन्म लेने पर विरोध करेंगी तो उनको खुद यह सोचना होगा कि वे क्या हैं। महिलाएं खुलकर सामने आएं और कन्या भ्रूण हत्या कराने से पहले इस पर विचार कर ही कदम उठाए। अगर किसी घर में सास दबाव बनाती है कि कन्या भ्रूण है इसका गर्भपात कराओ तो उसे सिधे जवाब दिया जा सकता है कि अगर उनकी मां भी कन्या भ्रूण होने पर गर्भपात करा ली होती तो आज की स्थिति क्या होता। अगर उस समय उनकी भी कोख में हत्या हो जाती तो आज शायद यह दिन ही नहीं देखना पड़ता। अगर फिर भी दबाव बनाती हैं तो खुलकर पहले उस महिला की हत्या की जाए जो इसके लिए दबाव बना रही है। क्योंकि ऐसे लोग दोषी है और उनकी मृत्यु समाजहित में है। और अगर ऐसी ...

कार्पोरेट जगत के हाथों बिके मीडिया के लिए नेपोलियन बोना पार्ट का कथन कितना सही होगा...

महान विचारक नेपोलियन बोनापार्ट ने कहा है कि हजार छूरों की तुलना में चार विरोधी अख़बारों से अधिक डरना चाहिए। आज जब मीडिया कार्पोरेट घराना हो गया है और कार्पोरेट में तब्दिल होकर बिक चुका है तो उनका यह कथन कितना सही होगा। नेपोलियन ने यह भी कहा था कि एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है यह वाकई सही है पर आज अखबारों और टीवी चैनलों पर जैसी तस्वीर छापी और दिखाई जाती हैं वह कितने शब्दों के बराबर हैं। अर्ध नग्न अभिनेत्रियों की वे तस्वीरें सुबह देखकर कोई युवा तो युवा बुजुर्ग का भी मन मचल जाएगा। क्या इस पर सरकार रोक लगा पाएगी, या यह उसी प्रकार कह दिया जाएगा। सेंसर बोर्ड की आज शख्त जरुरत है चाहे वह मीडिया हो या फिल्म उद्योग। अब यह बहाना नहीं चलना चाहिए कि जनता की जो मांग है जो जनता देखना चाहती है वह हम दिखा रहें है। क्या वाकई आम जन यही देखना चाहते है अगर उन्हें यह न दिखाया जाए तो वे समाचार नहीं पढ़ेगें, टीवी पर समाचार नहीं देखेंगे, फिल्म देखना बंद कर देंगे। यह सरासर गलत है तब भी लोग यह करेंगे और तब भी लोग यह करते थे। यह एक कोरा बकवास है जिसे लोग यह कह रहे हैं कि देखने वालों कि यह मांग ...