गांधी को ही सिर्फ क्यों शास्त्री को याद क्यों नहीं कर रहा देश...
देश का भला करने वाले क्या सिर्फ गांधी ही थे बाकी नेता क्या देश को चट बस किए क्या। अगर देश का भला किए तो सिर्फ गांधी को ही हर मौके पर याद क्यों किया जाता है बाकि नेताओं को क्यों नहीं। अब 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती मनाई जा रही हैं ठिक बात है उनका जन्मदिन है उन्हें याद किजीए श्रद्धाजंलि अर्पित किजीए पर इस दिन लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्म हुआ था। उनकी आज 110 वीं जयंती है उन्हे देश में कितने लोंगो ने याद किया कुछ दिन पहले की हीं बात है भगत सिंह की जयंती थी उन्हें कितनों ने याद किया। क्या ये लोग देश के लिए कुछ नहीं किया। हालत तो ऐसे हो गए कि जिसका नाम हो रहा है वह अमर शहीद हो गया पर जो वाकई में देश का भला किया है देश के लिए कुर्बान हुआ उसको कुत्ता तक नहीं पुछ रहा। कुत्ते जयंती पर मुर्तियों पर पेशाब कर रहे हैं कही तो कहीं प्रतिमाओं के पास इतने घास उग आए है कि पता ही नहीं चलता है कि आखीर ए महा पुरुष है कौन। बस भगवान तो वे लोग बन बैठे है जिनके नाम का लोग फायदा उठा रहे है। राजनीतिक हरकतें हो पर महापुरुषों के साथ तो मत करो राजनीतिक रोटियां तोड़ रहे हैं बहुत अच्छा है, लेकिन उनका सम्मान भी होना चाहिए। हालत यह है कि एक नेता के नाम पर हजारों योजनाए बना दी जाती है रातों रात क्योंकि वह देश का महानायक है तो बाकि क्या अंग्रेजों के पीछ लगु कुत्ते थे। साहब नरेंद्र मोदी जी सुना है आप दिन रात इंटरनेट की दुनिया में रहते है अगर मेरा यह संदेश आप तक पहुंचे तो बड़े ध्यान से पड़ लिजीए बहुत जल्द नोटों पर सभी महापुरुषों की फोटो छपवाई जाई जैसे अमेरिका में होता है वैसे आप कहेंगे की यह नकल है तो कौन सा आप का संविधान आपका अपना है वह भी तो नकल मारकर खिचड़ी और मिलावटी रूप में बनाई गई है। साथ ही एक व्यक्ति को राष्ट्रपिता बना दिए है ठिक है तो जो 1857 विद्रोह में मारे गए थे उनके बारे में सोचिए साहब वे कितने क्रांतिकारी रहे होंगे की उनकी लगाई आग में देश इस तरह झूलसा की पुरे देश में आजादी को लेकर हंगामा मच गया। यह हंगामा भी इतना दिली की आजादी की भूख लोगों में इस कदर भड़की की आजादी पाकर हीं दम लिया। मंगल पांडेय, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, नाना साहेब ऐसे क्रांति कारी थे जिन्होंने लोगों को एक कर दिया आजादी की लड़ाई के लिए हा वे आजादी पाने में सफल नहीं हुए अलग बात है क्योंकि जरुरी नहीं की हर बार हर काम में सफलता मिले पर वहां से मिशन तो बदला और तैयारी के सात लोग भीड़े और आजादी पाकर ही दम लिया। असफलता इंसान को सफलता की ओर ले जाती है अगर उस समय मंगल पांडेय, लक्ष्मी बाई जैसे लोग शहीद नहीं हुए होते तो क्या ऐसा कभी संभव हो पाता की हम आजाद होते शायद ही। क्योंकि जब महात्मा गांधी पैदा हुए उस समय का दौर क्रांति का दौर था 1969 क्यों कि उस समय लगातार युद्ध और अंग्रेजों के खिलाफ भारत के लोग आजादी के लिए अलग अलग अंदाज में उनका विरोध कर रहे थे। और फिर गांधी जी भी उनसे जुड़े आकर रविन्द्र नाथ टौगोर जैसे नेता, लाला लाजपत राय तो महान बन गए सोचिए उन लोगों को जो उन्हें इसके लिए तैयार किए होंगे। उनकी जरा याद करो कुर्बानी....!
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