अब सोच बदलने की जरुरत है...

बहुत साल हो गए समाज में अब बदलाव होना चाहिए। लोगों की सोच बदलनी चाहिए। देखने को मिल रहा है लगातार कन्या भ्रूण हत्या की संख्या में इजाफा हुआ है लोगों को अब अपनी इस छोटी मानसिकता को बदलना होगा कि लड़का ही उसका बेड़ा पार करेगा। अगर ऐसा है तो ‌वे शादी हीं न करे। पुरुषों की मानसिकता में अगर लड़का और लड़की को लेकर मतांतर हो तो चलता है क्योंकि वे यह सोच सकते हैं कि वे लड़के को पसंद करते हैं पर अगर महिलाएं भी लड़कियों के जन्म लेने पर विरोध करेंगी तो उनको खुद यह सोचना होगा कि वे क्या हैं। महिलाएं खुलकर सामने आएं और कन्या भ्रूण हत्या कराने से पहले इस पर विचार कर ही कदम उठाए। अगर किसी घर में सास दबाव बनाती है कि कन्या भ्रूण है इसका गर्भपात कराओ तो उसे सिधे जवाब दिया जा सकता है कि अगर उनकी मां भी कन्या भ्रूण होने पर गर्भपात करा ली होती तो आज की स्थिति क्या होता। अगर उस समय उनकी भी कोख में हत्या हो जाती तो आज शायद यह दिन ही नहीं देखना पड़ता। अगर फिर भी दबाव बनाती हैं तो खुलकर पहले उस महिला की हत्या की जाए जो इसके लिए दबाव बना रही है। क्योंकि ऐसे लोग दोषी है और उनकी मृत्यु समाजहित में है। और अगर ऐसी हत्या करने के बाद मौत की भी सजा मिलती है तो मंजुर क्योंकि बेकसुर को मारने से अच्छा है जो कसुरवार है उसकी हत्या की जाए। कन्या भ्रूण हत्या कराने वालों और करने वालों के लिए कई तरह के कानून बने हैं पर ऐसा कोई कानून नहीं बना की जिसमें ऐसा कृत्य करने वाले को मौत की सजा हो। ऐसे लोगों को मौत की सजा भी कम होगी। हत्या का आरोपी तो एक समझ वाले इसांन को मारता है पर ऐ लोग तो उस मासूम को मार डालते हैं जिसका कोई कसुर नहीं है। वैज्ञानिक शोध में यह जबकि स्पष्ट हो चुका है कि महिलाओं में अंडाणु (x) होता है जबकि पुरुष में शुक्राणु (x और y) दोनों होता है। इसका मतलब पुरुष का शुक्राणु के आधार पर ही कन्या और पुरुष भ्रूण तैयार होता है। तो इसमें गलती महिलाओं की कहां से है। पहले ‌वो महिला जो सास है, ननद है, देवरानी है, जेठानी है यह तय करलें कि किसकी गलती है फिर किसी बात का निष्कर्ष निकाले। डॉक्टर भी गर्भपात करने से पहले यह तय कर ले कि जिस भ्रूण की हत्या की जा रही है वह अवैध है या उसकी जरुरत नहीं है। वरना ऐसे डॉक्टर को उनलोगों के समान ही सजा मिले जो इस बात की जांच कर रहा है कि कोख में पलने वाला बच्चा क्या है। ऐसे लोगों के क्लिनिक को बस बंद न किया जाए वरन ऐसे लोगों को सजा भी सख्त दी जाए ताकी वह मिसाल बन सके। इसके अलावा लोगों को लड़कियों को लेकर सोच बदलने की जरुरत है। उनपर लगने वाली बंदिशे खत्म होनी चाहिए। सिर्फ लड़के ही हर कुछ नहीं कर सकते लड़कियों में भी वह काबिलयत है जिसे पहचानने की जरुरत है और पहचानकर उसे उनकी प्रतिभा के अनुसार प्रोत्साहित करने की जरुरत है। तभी समाज का विकास सही मायने में होगा। लोगों की मानसिकता में बदलाव की जरुरत है। अभी लगातार हत्या और दुष्कर्म की खबरें आ रही हैं इस तरह कि घटनाओं के लिए ज्यादातर जिम्मेदार हमारा रहन-सहन, खान-पान और विचार भिन्नता है। काम का दबाव और बेरोजगारी भी इसमें शामिल है। जो बेरोजगार हैं वे अक्सर अच्छे रोजगार पाने वाले युवक युवती से चिढ़ते है और इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते है।

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