यहां रावण के सौदागर भी हैं और खरीददार भी
रावण को बेचने और खरीदने की परम्परा है इस पर ही एक लेख है। टॉपिक मुझे थोड़ा इंट्रेस्टिंग लगा तो सोचा आप तक पहुंचा ही दूं ताकि आप भी जान जाए कि हो क्या रहा है। बात यह है कि रावण दहन दसहरा की पूर्व रात मैं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर जिसे यहां का न्यायधानी कहते हैं में घुमा। मैं यहां तीन महीने से हूं पर कभी भी रात 2 बजे भ्रमण करने का मौका नहीं मिला। किसी कारण वश यह देखने का मौका मिला घुमने का मौका मिला तो अपनी बाईक पर शहर घुमने निकल पड़ा। यहां मैं दुर्गा पंडालों को देखा, गली मोहल्लों को देखा और भी बहुत कुछ देखा साथ ही देखा की लोग रावण बना रहे है। थोड़ा जिज्ञासु हूं तो उनके पास जाकर खड़ा हो गया दूसरे दिन रावण दहन है तो सभी जी जान से इस काम में जुटे है देखता हूं। जितने भी कारिगर इस कार्य में लगे है वे सारे के सारे जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा रावण के पुतले को तैयार कर रहे थे। मैं सोचा रावण दहन को लेकर कोई कंपटिशन होगा। उनसे पुछ लिया कि इतने सारे रावण पुतला का वे करेंगे क्या तो पुतला बनाने वालों की जवाब था बेंचने के लिए बना रहे हैं। यह सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ कि वे पुतला बेचेंगे। यह सुनकर मैं उन्हें देखता रहा तो उनमें से कुछ लोग जो पुतला रात को खरीदने आए थे ने बताया यहां हर साल रावण का पुतला बिकता है। यह सब देख कर मैं आश्चर्यचकित था पर जब लोगों से और बात किया तो उनके लिए यह बात कॉमन सी लगी। जितने भी लोग वहां थे सभी इसके बारे कहे कि यहां यह हमेसा से होता रहा है नया नही है। फिर वे मुझसे पुछने लगे आप कहां से हो? क्या करते हो? इत्यादि.... मैं यह सोचकर चकित था कि यहां रावण के सौदागर है... और यहां के लोग शौक से रावण खरीदते है। सच में यह मेरे लिए एकदम नया अनुभव था। रावण का पुतला बिक रहा है लोग खरीद रहे है भीड़ है बेचने वालों की भीड़ है खरीदने वालों की। फिर मैं वहां से आगे बढ़ चला सड़क के चरो तरफ सिर्फ पुतला ही पुतला था। घर पहुंचा फिर सो गया सोया तो सपने भी लोगों को रावण खरीदते और बेचते ही देेखा। सुबह जगा अपने ऑफिस के लिए चला तो फिर एक एकबार एक दृश्य देखकर सोच में डूब गया। दरअसल कुछ छोटे बच्चे छोटे से रावण के पुतले को सायकल में लेकर जा रहे थे। सच में लगा कि रावण कितने आसानी से सड़को पर बिक जाता है और लोग उसे कितने आसानी से खरीद कर मीटा देते हैं जला देते हैं। काश यह संभव हो जाता कि मन में बैठे रावण को रावण दहन के साथ ही जला दें हम। मिटा दें सारे फसाद की जड़ को।
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