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अंधविश्वास की भी हद होती है

आजादी के बाद से लोगों में लगातार शिक्षा और रहन सहन में बदलाव हुआ है। लगातार लोग जागरुक और जानकार होते गए। उच्च शिक्षा देश में मिलने लगी तो यहां के कई नामचीन संस्थाओं के दुनिया में नाम हो गए। भारत के लोगो का नाम दुनिया भर में फैल गया इसलिए की यहां के लोग संस्कार वान होते है। बहुत ही बुद्धिमान होते हैं। लेकिन जब सुनता हूं की तांत्रिक के विश्वास में आकर मां ने अपने बेटे को, पड़ोसी ने पड़ोसी के बच्चे को, सांप न काटे इसके लिए मंंत्र तंत्र के बाद प्रसाद खाने से, और टोनही होने के शक में किसी की हत्या कर दी जाती है कि इससे अच्छा तो गुलामी था। कम से कम लोगों में यह अंधविश्वास तो नहीं था। तंत्र मंत्र होना चाहिए पर इस तरह नहीं कि जो वैज्ञानिक मान्यता को और सांस्कृतिक मान्यता को शर्मशार कर दे। कुछ दिन पहले दो समाचारों ने मन को बहुत आघात पहुंचाया। दोनों ही मामला छत्तीसगढ़ राज्य का है। ‌वैसे तो बहुत सारे समाज सेवी यहां काम कर रहे है। समाज सेवी संस्थाएं काम कर रही है पर यहां कुछ ज्यादा ही टोनही होने पर अपराध होने की घटनाए होती है। कुछ दिन पहले कि ही बात है यहां के छत्तीसगढ़ के बेलतरा की घटना दिल दहला द...

जब डूबते सूर्य को नमस्कार करते हैं

एक कहावत है ना कि डूबते सूर्य को कोई नमस्कार नहीं करता। ऐसा नहीं है हिंदूओं का छठ एक मात्र ऐसा त्योहार है जिसमें डूबते सूर्य को भी नमस्कार किया जाता है। यह दिवाली से छठे दिन अर्थात षष्ठी तिथि को पड़ता है। इस दिन डूबते सूर्य को और दूसरे दिन उदय होते सूर्य को नमस्कार किया जाता है। दिवाली त्योहार के छठवे दिन सूर्य पूजा का अपना महत्व है। धन धान्य देने वाले इस त्योहार की पूर्वोत्तर भारत में बड़ी धूम होती है। लोग इसे बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास से मनाते है। इसका केंद्र हलांकि बिहार को माना जाता है, पर अब यह अन्य राज्यों और देशों में भी फैल गया है। बिहार के छठ पूजन करने वाले लोग वहां भी इसे मनाने लगे हैं। त्योहार में लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा पाठ करते है। इसमें शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता है। उपवास रखते हैं और धन धान्य, संतान के लिए सूर्य देव के साथ छठ माता की पूजा करते हैं, कामना करते हैं। डूबते और उगते दोनों सूर्य को नमस्कार किया जाता है। लद गए वो दिन कब किसका वक्त बदल जाए कहा नहीं जा सकता। जानते हैं सूर्योपासना के बारे में छठ कार...

काला धन और हाय तौबा

अकबर इलाहाबादी की लिखी वो लाईन याद आती है “ हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है...डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है...यह लाइन देश भर में कुछ सालों से उठे मुद्दे पर बहुत गजब की बैठती है। यह मुद्दा गरम है इसलिए सोचा कुछ मैं भी इसपर हथौड़ा मारू और टिप्पणी करुं। मुद्दा है विदेशों मे जमा धन, जिसे देश की कंपनियों और राजनेताओं ने जमा कर रखा। इसे काला धन नाम दिया गया है। इस पर इतना हाय तौबा क्यों मचा हुआ है यह पता नहीं। यह धन काला कैसे है यह भी समझ नही आता। राज नेताओं ने जो जमा किया है वह पूरी तरह गलत है। उन्होने कमीशन खोरी की है इसमें दो राय नहीं। वैसे इनका तनख्वाह कुछ कम नहीं होता फिर भी पांच साल में करोड़ों रुपए कमाना इतना आसान नहीं होता। उदाहरण के तौर पर जे. जयललिता को ही ले लिया जाए। खैर इन कंपनियों ने जो धन कमाया है क्या वह काला था? या भारत की उस मुद्रा को वे काला करके यहां से विदेश ले गए? हो सकता है विदेश में ले जाकर इसे काला कर दिए हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर यह काला कैसे हो गया। कहीं ऐसा तो नहीं हम बचपन से पढ़ते आ रहे है कि काला बाजारी होता है व्यवसायी अक्सर ऐसा कर...

कनफोडू पटाखा और हम

शोर सभी के लिए नुकसानदेह होता है चाहे वे बुजुर्ग हो या बच्चे। लेकिन जवानी के जोश और पैसे की गर्मी के कारण हमें यह शोर कभी सुनाई नहीं देता। सुनाई नहीं देता यह मतलब नहीं है इस शोर में भी हमें आज आनंद आने लगा है। इससे ना सिर्फ हम खुश होते हैं बल्कि दूसरे परेशान होते हैं तो उससे हमें ज्यादा खुशी मिलती है। बड़े धमाके करके जितना खुश हम नहीं होते उतना उससे परेशान लोगों को देखकर हमें खुशी मिलती है। फिर पटाखे घर के आंगन में तो नहीं फोड़ेगें हमारे बाप का सड़क है दूसरे मेरे घर के सामने आराम से कैसे जा सकते हैं उन्हें भी तो पता चले कि हम पैसे वाले रइस है इस लिए सड़क पर बल्कि बीच सड़क पर हम पटाखे बिछाएंगे। भले ट्रैफिक जाम हो जाए उससे मुझे क्या मुझे तो पटाखे जलाने है साला कोई मरता है तो मरे इससे मुझे क्या। मुझे मजा आना चाहिए और मेरे इस काम मेें कोई दखल दिया तो जानते हैं ना फिर आप मेरे घर के सामने से गुजर रहे यह गली भी हमारी है और उस गली के हम छोड़ों क्या है आपको इससे क्या जो भी है हम हैं बस हमें यही बने रहने में मजा आता कोई ना तो मुझे गाली देगा और ना ही कुछ बोलेगा अपनी गली में तो हम हीं सबकुछ है। आपको प...

महंगाई : हमारे पास है बचने के उपाय

महंगाई से बचने के लिए हमारे पास बहुत सारे साधन है बस उन्हें अपनाने की जरुरत है। क्योंकि हर जगह आज महंगाई महंगाई महंगाई...शब्द लोगों के बीच गुंज रही है। रोज हर रोज यह मुद्दा लोगों को परेशान कर रहा है। लोगो के लिए आज हर जगह महंगाई है। हर इंसान इस महंगाई से परेशान है। अमीर हो चाहे गरीब सभी पर महंगाई का असर समान रूप से पड़ रहा है। अमीर परेशान है पेट्रोल के दाम बढ़ने से तो गरीब परेशान है दो वक्त की रोटी जुटाने में। आज महंगाई की कोई सीमा नहीं है...सब्जी के दाम बढ़े तो महंगाई टमाटर के दाम बढ़े तो महंगाई, प्याद महंगा हुआ, मोबाइल के कॉल रेट तक महंगे हो गए... कपड़े महंगे हुए, खाद सामग्री महंगी हुई। गाड़ियों के दाम घट रहेंं है तो पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ रहे है, जमीन का दाम बढ़ रहें हैं, जनसंख्या बढ़ रही है तो महंगाई भी बढ़ रही है घर बनाने से पहले ही लोगों का दिवाला निकल जाता है। इसके बढ़ने से लोग कमा तो ज्यादा रहे हैं पर आमदनी से ज्यादा खर्च हो रहा है। इससे उनमें ब्याप्त गरीबी बनी रह रही है। इस वक्त लोगों को महंगाई से राहत दिलाने बैंक मदद के लिए आगे आ रही है लोगों को तरह-तरह के लोन उपलब्ध करा रही है। मह...

दीपावली बनाम पटाखा, मिठाई बनाम मिलावट

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दीपावली आ गई अब मिठाइयां खिलाने और पटाखों की झड़ी लगेगी। धमाको से पूरा गांव और शहर गुंजायमान होगा। लोग एक दूसरे को मिठाई खिला बधाई देंगे। रोशनी और खुशियों की प्रतीक दिवाली को अगर सुरक्षित रूप में मनाना है, तो कुछ उपायों को ध्यान में रखकर दिवाली को उल्लासपूर्वक मनाया जा सकता है। फेफड़े की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को पटाखों के प्रदूषण से दूर रहना चाहिए और ज्यादा आवाज वाले पटाखों से परहेज करना चाहिए। दीवाली आई तो पटाखे और फुलझड़ियों के साथ मिठाइयों की सौगात भी लाई है। अब सभी को फेस्टिवल पर तो मिठाईयां खाना अच्छा लगता ही है। मिठाइयों की बात आती है जब तो मिलावट भी उसके साथ-साथ चली आती है। मिलवटखोरों के लिए दिवाली केंद्र सरकारी के कर्मचारियों के बोनस की तरह ही तो आती है। दिवाली आते ही नकली और मिलवटी खोवे आने शुरु हो जाते हैं। साथ ही मिलवटी मिठाइयों का कारोबर चल निकलता है। जांच के लिए फूड विभाग और ड्रग विभाग तो हैं और समय-समय पर वे जांच करते हीं है पर नियमित जांच और कार्रवाई न होने निगरानी न रखने के कारण मिलावटखोरों का हौसला बुलंद है। मिलावट तो अब हर चीज में है और बिना ...

पर्यावरण की रक्षा वस्तुओं के ज्यादा इस्तेमाल से होगी

दुनिया में बढ़ती आबादी, गाड़ियों की संख्या और घटती पेड़ों की संख्या से हमारा पर्यावरण प्रदुषित हो रहा है या यूं कहें कि प्रदुषित हो चुका है। इससे बचने का एक मात्र उपाय है कि हम घरेलू वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना सिखे। कहने का अभिप्राय यह है कि पर्यावरण की रक्षा को ध्यान में रखकर ऐसे वस्तुओं जिसका रिसायकल हो सकता है और जो पर्यावरण के साथ घुल मिल सकते हैं सड़ सकते हैं और उसका पर्यावरण पर घातक प्रभाव नहीं पड़ता। उनका इस्तेमाल हम करके पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा वातावरण को प्लास्टिक प्रदुषित कर रहा है। यह न तो सड़ता है और न हीं घुलता है। इसके कारण जमीन बंजर हो रही है। लोग अगर इसके इस्तेमाल से बाज नहीं आए तो आने वाला समय बहुत ही दुखदायी होगा। यह न सिर्फ जमीन को खराब कर रहा है बल्कि पानी, हवा सब इसके संपर्क में खराब हो रहा है। इससे बचने में हम हिंदूस्तान के लोग पहल कर दुनिया को सिखा सकते हैं। हमारे पूर्वज इसका बेहतर इस्तेमाल करते थे उनसे ही हम सिख लेकर किसी भी वस्तु का दोहरा तेहरा इस्तेमाल कर सकते है। हम हिंदूस्तानी किसी भी वस्तु का इतना अच्छा इस्...

मोदी की चाल...कांग्रेस और आप को पहचान को क्या

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लोक सभा चुनाव के पहले देश की बड़ी पार्टियों के पीछे पड़े मोदी लगातार उनको पटखनी दे रहे हैं। वे पहले चुनाव के समय कांग्रेसी नेताओं के मुंह से निकले शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव जीत प्रधानमंत्री बन गए। अभियान इसके बाद भी खत्म नहीं हुआ। चुनाव के समय मोदी को चाय वाला बोल दिया गया तो उन्होंने चाय पर चर्चा और न जाने क्या-क्या किया।  चुनाव के बाद अब उन्होंने ऐसी चाल चलनी शुरु कर दी है कि देश में बची खुची कांग्रेस और विलुप्त प्राय आम आदमी पार्टी के दिन और बुरे होते जा रहे हैं। 6 दशक तक महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस को महात्मा गांधी के 145 वीं जयंती पर 2 अक्टूबर को मोदी ने ऐसी पटखनी दी की कांग्रेस तो कांग्रेस आम आदमी पार्टी सहित देश के छोटी बड़ी सभी पार्टियों के चारो खाने चीत हो गए। मोदी ने कुछ खास किया नहीं पर उनका फॉर्मूला इतना हीट हुआ कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लोगों के बीच मजाक बनकर रह गई। बापू की जयंती पर प्रमं मोदी ने दोनों पार्टियों को सबक सिखाया। मोदी ने कांग्रेस को तो जोरदार झटका दिया ही देश में कभी उभरने की कोशिश करने वाली आम आदमी पार्टी को ऐसा सबक दिय...

हम बेवकूफ नहीं है साहब उल्लू मत बनाओ

देश में स्वदेशी और विदेशी का बहुत जोरों से विरोध हो रहा है। लोग महात्मा गांधी की तर्ज पर विदेशी वस्तुओं का बहिस्कार कर रहे हैं। लोग काम बहुत अच्छा कर रहे हैं मैं उनका समर्थन करता हूं पर जितने भी लोग इससे जुड़े हुए हैं उनके बच्चों से अगर बात की जाए तो पता चलेगा कि वास्तविक स्थिति क्या है। आपको बता दूं कि जितने विरोध करने वाले है सभी के बच्चे अच्छे कॉनवेंट स्कूल में अंग्रेजी की पढ़ाई कर रहे है। अब आप सोचेंगे की पैसा है तो क्या बच्चों के सरकारी स्कूल में पढ़ाएं तो मैं कहां कह रहा हूं कि आप सरकारी स्कूल में पड़ाओ पर हम बेवकूफ नहीं है साहब उल्लू मत बनाओ... हमें पता है कि आप हमारा माइंड वास कर रहे हो स्वदेशी के नाम पर। आने वाले समय में माइंड वास जब हो जाएगा आपका वही बेटा कोर्ट पेंट में खड़ा होकर कहेगा Stupid Indian nappy holder क्योंकि वह बाद में बनेगा उच्च अधिकारी और हम लोग स्वदेशी जो पहनेंगे लंगोट... साहब आप हमें यह न बताओ कि हमें स्वदेशी अपनाना है आप पहले अपना दोहरा चोला उतारो क्योंकि जरुरत आपको है। एक तरफ तो स्वदेशी का राग अलापा जा रहा है दूसरी ओर इंटरनेट पर आप सर्च कर देखीए कि स्वदेशी नाम स...

सरकार बदली पर शरहद पर हालात वही है

आजादी के वक्त मिले बंटवारे के दर्द को देश कैसे भूल सकता है। ऐसे में जब लगातार विभाजित देश पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी हो रहा हो तो यह दर्द और बढ़ जाता है। भारत सरकार लगतार समझौता का रुख अख्तियार करती रही है और पाकिस्तान इसे भारत की कमजोरी मानकर लगातार गोलीयां और बंबबारी कर रहा है। इसी हालात के कारण भारत-पाकिस्तान के बीच  कई बार युद्ध भी हुई और इसमें हर बार पाकिस्तान को हार मिली पर हालात वही रहे जो थे। सन् 1999 के कारगिल युद्ध में बुरी तरह पराजय के बाद पाकिस्तान ने तत्कालिन भारत की भाजपा सरकार अटल विहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री के समक्ष  सरेंडर किए और फिर सीज फायर समझौता हुआ जैसा की हमेशा से होता आया है। तबके बाद कुछ समय तक तो हालात ठीक रहे फिर 2004 में केंद्र की सरकार बदली कांग्रेस की सरकार बनी उनको सत्ता मिली। सरकार ने पाकिस्तान के साथ पूर्ववत सहानुभूति के साथ बात करने की कोशिश की जितनी बार बात करते उतनी हीं बार शरहद पार से गोलीयां चलती रही। यहां तक की सेना के जवानों का सिर तक काट लिया गया। भारत की सरकार नरमी बरत कर सहती रही और सह रही है। कब तक सहेगी पता नहीं। अब हालात वहां और ख...