पर्यावरण की रक्षा वस्तुओं के ज्यादा इस्तेमाल से होगी
दुनिया में बढ़ती आबादी, गाड़ियों की संख्या और घटती पेड़ों की संख्या से
हमारा पर्यावरण प्रदुषित हो रहा है या यूं कहें कि प्रदुषित हो चुका है।
इससे बचने का एक मात्र उपाय है कि हम घरेलू वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा
उपयोग करना सिखे। कहने का अभिप्राय यह है कि पर्यावरण की रक्षा को ध्यान
में रखकर ऐसे वस्तुओं जिसका रिसायकल हो सकता है और जो पर्यावरण के साथ घुल
मिल सकते हैं सड़ सकते हैं और उसका पर्यावरण पर घातक प्रभाव नहीं पड़ता। उनका
इस्तेमाल हम करके पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा
वातावरण को प्लास्टिक प्रदुषित कर रहा है। यह न तो सड़ता है और न हीं घुलता
है। इसके कारण जमीन बंजर हो रही है। लोग अगर इसके इस्तेमाल से बाज नहीं आए
तो आने वाला समय बहुत ही दुखदायी होगा। यह न सिर्फ जमीन को खराब कर रहा है
बल्कि पानी, हवा सब इसके संपर्क में खराब हो रहा है। इससे बचने में हम
हिंदूस्तान के लोग पहल कर दुनिया को सिखा सकते हैं। हमारे पूर्वज इसका
बेहतर इस्तेमाल करते थे उनसे ही हम सिख लेकर किसी भी वस्तु का दोहरा तेहरा
इस्तेमाल कर सकते है। हम हिंदूस्तानी किसी भी वस्तु का इतना अच्छा इस्तेमाल
करते हैं कि उससे न सिर्फ उसकी लागत वरन उसकी लागत की दुगनी भरपाई वसुल
लेते हैं। एक घटना जिससे पता चलता है कि हम उपयोग करने के मामले में कितना
ज्यादा सक्षम हैं। हमारे पूर्वज इसे करते आए हैं और इसका एक सटिक उदाहरण यह
हो सकता है।
एक बार एक पजामा पहने हुए हिन्दुस्तानी से एक अंग्रेज ने पूछा, "आप का यह देशी पैंट (पजामा) कितने दिन चल जाता है?
हिन्दुस्तानी ने जवाब दिया, "कुछ ख़ास नहीं, मै इसे एक साल पहनता हूँ। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट कर राजू के साइज़ का बना देती है। फिर राजू इसे एक साल पहनता है। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट छांट कर तकियों के कवर बना लेती है। फिर एक साल बाद उन कवर का झाडू पोछे में इस्तेमाल करते हैं।"
अंग्रेज बोला, "फिर फेंक देते होंगे?"
हिन्दुस्तानी ने फिर कहा, "नहीं-नहीं इसके बाद 6 महीने तक मै इस से अपने जूते साफ़ करता हूँ और अगले 6 महीने तक बाइक का साइलेंसर चमकाता हूँ। बाद में मारदडी की हाथ से बनायीं जाने वाली गेंद में काम लेते हैं और अंत में कोयले की सिगडी (चूल्हा) सुलगाने के काम में लेते हैं और सिगड़ी (चुल्हे) की राख बर्तन मांजने के काम में लेते हैं।"
इतना सुनते ही अंग्रेज रफू चक्कर हो गया।
किसी भी चीज का सम्पूर्ण इस्तेमाल कोई हम से सिखे कि हम कितना बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।हलांकि यह आपको एक चुटकुला और मजाक लगता होगा। पर मैं आपको अपने और आपके घर से जुड़ी घटनाएं बताता हूं जो कोरा सत्य है कभी न कभी आप अपने घर में माता जी या दादी अम्मा को करते देखे होंगे। मैं तो यह कहुंगा कि आप और हम खुद इसका प्रयोग करते हैं और इससे हमें नया पन का अनुभव भी होता है। कुछ इस तरह आप जो महंगी जींस पहनते हैं जब वह घुटने के ऊपर फट जाता है तब उसका क्या करते हैं। मुझे पता है आपका जवाब पर फिर भी आप उसे फेंक देते हैं... नहीं ना। मुझे पता है बहुत कम लोग फेंकते हैं ज्यादातर उसका बरमुड़ा बना लेते हैं फिर उसका इस्तेमाल करते हैं। फिर अगर वह पीछे से फट जाए तो घर की महिलाएं उसका झोला बना लेती हैं ताकि सब्जी भाजी लाया जा सके। यह सही भी है प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचना है तो आप इस तरह का प्रयोग कर सकते हैं। यह उपयोगी भी है और पार्यावरण के हिसाब से बेहतर भी। इस तरह का प्रयोग हम शहर के लोग अब नहीं करते पहले इसका इस्तेमाल सभी करते थे। जबसे प्लास्टिक का चलन बड़ा है हम झोला का इस्तेमाल करना भूल गए हैं हमें इसका इस्तेमाल करना सिखना होगा। शहर के लोग अगर चाहे तो बेहतर व्यापार हो सकता है यह। बस करना यह है कि सप्ताह में एक दिन उपयोग किए कपड़ो को खरीदा जाए जब ऐसा करेंगे तो लोग अपने घर में पड़े कचरा का मुल्य समझेंगे। हजारों के जींस जो वे ओल्ड फैसन के नाम पर फेंक देते है उसको आप उनसे कुछ पैसे में खरीद सकते हैं। एक खराब जींस की कीमत अगर आप उन्हे 20 रुपए भी देते हैं तो बहुत है क्योंकि उनके पास यह पहले से बहुत सारे पड़े होंगे। लोग इसको बेंचेंगे भी। अब जो इसका व्यापार करना चाहते हैं तो बस उन्हे एक दर्जी वाली मशीन खरीदनी है और फिर बनावा दिजीए मजबूत झोला। एक जींस से कम से कम 4 झोला तैयार हो गया। उसे 20-20 के हिसाब से बेंचेंगे तो कितना हुआ 80 रुपए। अब कच्चा माल और लागत मुल्य निकाल लिजीए। तो उसमें से 40 रुपए निकालने के बाद भी आपको एक जींस 40 रुपए का फायदा देगा। अब बोलिए की है ना बेहतर उद्योग। बस इसी तरह से आप अन्य वस्तुओं का भी इस्तेमाल करके शहर को स्वच्छ बना सकते है। आप अपने घर पर पीज्जा, केक लाते होंगे उससे कार्टन निकलता है उसे आप फेंक देते है इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है बस करना यह है कि उसे आप इकट्ठा करें और कबाड़ वाले को बेंच दे। साथ ही इसका आप भी इस्तेमाल कर सकते हैं आप इन कार्टन का इस्तेमाल इन्हे पानी में फुलाकर टोकरी बनाने में कर सकते हैं। सुन्दर-सुन्दर टोकरी बनाकर भी इसका व्यवसाय किया जा सकता है। इस तरह आप घर के कचरे का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। बस शुरु करने की जरुरत है आप शुरु किजीए आपको टक्कर देने के लिए हजारों लोग आ जाएगें बस शुरुआत करने की जरुरत होती है यहां आपका अनुसरण करने वालो की कमी नहीं है यहां।
एक बार एक पजामा पहने हुए हिन्दुस्तानी से एक अंग्रेज ने पूछा, "आप का यह देशी पैंट (पजामा) कितने दिन चल जाता है?
हिन्दुस्तानी ने जवाब दिया, "कुछ ख़ास नहीं, मै इसे एक साल पहनता हूँ। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट कर राजू के साइज़ का बना देती है। फिर राजू इसे एक साल पहनता है। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट छांट कर तकियों के कवर बना लेती है। फिर एक साल बाद उन कवर का झाडू पोछे में इस्तेमाल करते हैं।"
अंग्रेज बोला, "फिर फेंक देते होंगे?"
हिन्दुस्तानी ने फिर कहा, "नहीं-नहीं इसके बाद 6 महीने तक मै इस से अपने जूते साफ़ करता हूँ और अगले 6 महीने तक बाइक का साइलेंसर चमकाता हूँ। बाद में मारदडी की हाथ से बनायीं जाने वाली गेंद में काम लेते हैं और अंत में कोयले की सिगडी (चूल्हा) सुलगाने के काम में लेते हैं और सिगड़ी (चुल्हे) की राख बर्तन मांजने के काम में लेते हैं।"
इतना सुनते ही अंग्रेज रफू चक्कर हो गया।
किसी भी चीज का सम्पूर्ण इस्तेमाल कोई हम से सिखे कि हम कितना बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।हलांकि यह आपको एक चुटकुला और मजाक लगता होगा। पर मैं आपको अपने और आपके घर से जुड़ी घटनाएं बताता हूं जो कोरा सत्य है कभी न कभी आप अपने घर में माता जी या दादी अम्मा को करते देखे होंगे। मैं तो यह कहुंगा कि आप और हम खुद इसका प्रयोग करते हैं और इससे हमें नया पन का अनुभव भी होता है। कुछ इस तरह आप जो महंगी जींस पहनते हैं जब वह घुटने के ऊपर फट जाता है तब उसका क्या करते हैं। मुझे पता है आपका जवाब पर फिर भी आप उसे फेंक देते हैं... नहीं ना। मुझे पता है बहुत कम लोग फेंकते हैं ज्यादातर उसका बरमुड़ा बना लेते हैं फिर उसका इस्तेमाल करते हैं। फिर अगर वह पीछे से फट जाए तो घर की महिलाएं उसका झोला बना लेती हैं ताकि सब्जी भाजी लाया जा सके। यह सही भी है प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचना है तो आप इस तरह का प्रयोग कर सकते हैं। यह उपयोगी भी है और पार्यावरण के हिसाब से बेहतर भी। इस तरह का प्रयोग हम शहर के लोग अब नहीं करते पहले इसका इस्तेमाल सभी करते थे। जबसे प्लास्टिक का चलन बड़ा है हम झोला का इस्तेमाल करना भूल गए हैं हमें इसका इस्तेमाल करना सिखना होगा। शहर के लोग अगर चाहे तो बेहतर व्यापार हो सकता है यह। बस करना यह है कि सप्ताह में एक दिन उपयोग किए कपड़ो को खरीदा जाए जब ऐसा करेंगे तो लोग अपने घर में पड़े कचरा का मुल्य समझेंगे। हजारों के जींस जो वे ओल्ड फैसन के नाम पर फेंक देते है उसको आप उनसे कुछ पैसे में खरीद सकते हैं। एक खराब जींस की कीमत अगर आप उन्हे 20 रुपए भी देते हैं तो बहुत है क्योंकि उनके पास यह पहले से बहुत सारे पड़े होंगे। लोग इसको बेंचेंगे भी। अब जो इसका व्यापार करना चाहते हैं तो बस उन्हे एक दर्जी वाली मशीन खरीदनी है और फिर बनावा दिजीए मजबूत झोला। एक जींस से कम से कम 4 झोला तैयार हो गया। उसे 20-20 के हिसाब से बेंचेंगे तो कितना हुआ 80 रुपए। अब कच्चा माल और लागत मुल्य निकाल लिजीए। तो उसमें से 40 रुपए निकालने के बाद भी आपको एक जींस 40 रुपए का फायदा देगा। अब बोलिए की है ना बेहतर उद्योग। बस इसी तरह से आप अन्य वस्तुओं का भी इस्तेमाल करके शहर को स्वच्छ बना सकते है। आप अपने घर पर पीज्जा, केक लाते होंगे उससे कार्टन निकलता है उसे आप फेंक देते है इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है बस करना यह है कि उसे आप इकट्ठा करें और कबाड़ वाले को बेंच दे। साथ ही इसका आप भी इस्तेमाल कर सकते हैं आप इन कार्टन का इस्तेमाल इन्हे पानी में फुलाकर टोकरी बनाने में कर सकते हैं। सुन्दर-सुन्दर टोकरी बनाकर भी इसका व्यवसाय किया जा सकता है। इस तरह आप घर के कचरे का सही इस्तेमाल कर सकते हैं। बस शुरु करने की जरुरत है आप शुरु किजीए आपको टक्कर देने के लिए हजारों लोग आ जाएगें बस शुरुआत करने की जरुरत होती है यहां आपका अनुसरण करने वालो की कमी नहीं है यहां।
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