महंगाई : हमारे पास है बचने के उपाय
महंगाई से बचने के लिए हमारे पास बहुत सारे साधन है बस उन्हें अपनाने की जरुरत है। क्योंकि हर जगह आज महंगाई महंगाई महंगाई...शब्द लोगों के बीच गुंज रही है। रोज हर रोज यह मुद्दा लोगों को परेशान कर रहा है। लोगो के लिए आज हर जगह महंगाई है। हर इंसान इस महंगाई से परेशान है। अमीर हो चाहे गरीब सभी पर महंगाई का असर समान रूप से पड़ रहा है। अमीर परेशान है पेट्रोल के दाम बढ़ने से तो गरीब परेशान है दो वक्त की रोटी जुटाने में। आज महंगाई की कोई सीमा नहीं है...सब्जी के दाम बढ़े तो महंगाई टमाटर के दाम बढ़े तो महंगाई, प्याद महंगा हुआ, मोबाइल के कॉल रेट तक महंगे हो गए... कपड़े महंगे हुए, खाद सामग्री महंगी हुई। गाड़ियों के दाम घट रहेंं है तो पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ रहे है, जमीन का दाम बढ़ रहें हैं, जनसंख्या बढ़ रही है तो महंगाई भी बढ़ रही है घर बनाने से पहले ही लोगों का दिवाला निकल जाता है। इसके बढ़ने से लोग कमा तो ज्यादा रहे हैं पर आमदनी से ज्यादा खर्च हो रहा है। इससे उनमें ब्याप्त गरीबी बनी रह रही है। इस वक्त लोगों को महंगाई से राहत दिलाने बैंक मदद के लिए आगे आ रही है लोगों को तरह-तरह के लोन उपलब्ध करा रही है। महंगाई से बचने के लिए यह अच्छा उपाय है पर लोन लेने के बाद लोग और परेशान हो रहे है। महंगाई से बचने के लिए भारतीय परम्परा को अपना कर बचा जा सकता है। लोगों को समझना होगा। जो चिज महंगे है उनका ऑप्शन निकाला जा सकता है। भारत की परम्परा रहा है और यह परम्परा हमें महंगाई से राहत दिलाएगा भी और हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करेगा। पहला आप एकल परिवारवाद को खत्म करके संयुक्त परिवार को प्राथमिकता देना शुरु करें आप का काम आसान हो जाएगा। एक ही घर में अलग-अलग चुल्हे जल रहे हैं जहां 1 घंटे दो व्यक्ति का वही खाना बनाने में अपना वेश कीमती समय बर्बाद कर रहे है। इससे अच्छा होगा संयुक्त परिवार होगा तो एक व्यक्ति खाना पका ले तो दूसरा बच्चों को तैयार कर लिए। या फिर झाड़ू पोछा कर लिए काम आसान भी होगा और समय बचेगा भी और जब समय बचेगा तो मंहगाई को कम करने के लिए घर की महिलाएं भी पुरुषों का हाथ बटाएंगी ताकि उसका असर उनके परिवार पर कम पड़े। साथ ही बड़े बुजुर्ग एक साथ रहेंगे तो छोटे बच्चो को वे संभाल लेंगे। सेवा निवृत्त वृद्ध जन घर पर होंगे तो वे बच्चों को सभाल लेंगे वहीं घर की वृद्ध महिला दूसरे काम जो घर की महिलाएं वैसे नहीं कर पाती उसे करेंगी जैसे नौकर चाकरों से अनाज धुलाने का काम, अचार तैयार करने का काम, हरी भाजियों को तैयार करने का काम आदि। दूसरा दूरदर्शिता हम अपनाएं रखे तो महंगाई से राहत मिलेगी। इसके लिए करना बस यह होगा कि पहले देखने को मिलता था कि घर पर लोग अचार रखते थे। अब ऐसा नहीं है खाने का मन किया तो दुकान चले गए और वहां से ले आए। पहले अचार घर पर तैयार होता था इसके लिए आम, नीबू, आवंला आदि को घर लाया जाता था। अचार के लायक जो आम, आवंला होता था उसे अचार बनाते थे। शेष को सुखा दिया जाता था इसमें आम की खटाई बना दिया जाता था और आवंला वैगेरह का उपयोग भी वैसे ही कर लिया जाता था। खटाई बनाने से फायदा यह होता था कि बारिश में सभी को पता है कि टमाटर महंगा हो जाता है लोगों को यह तक पता नहीं है कि ऐसा होता क्यों है। दरअसल इसके पीछे कारण यह है कि टमाटर खट्टा होता है और इसका पौधा भी नमकीन मिश्रित खट्टा होता है जो बरसाती पानी जो की मीठा होता है जिसके लगातार पड़ने से उसका पेड़ खराब हो जाते है। इस कारण बारिश के मौसम में टमाटर का उत्पादन कम हो जाता है। ऐसे में जब घर पर खटाई होती है तो सब्जी को खट्टा करने के लिए उसका उपयोग किया जाता है। ऐसे में भी बड़ी राहत हमें मिल सकती है। तीसरा साग-सब्जीयों को सुखाकर रखने की आदत खत्म हो गयी है। हम पहले साग-सब्जीयों को सुखाकर रखते थे जिससे विपरित मौसम में उस सब्जी का आनंद भी लेते थे और सब्जी खरीदने की जरुरत भी नहीं पड़ती थी। इसमें हम कच्चे आम को काटकर सुखाते थे, इमली, लकड़ा (अमारी), लालभाजी, टमाटर साथ ही कई हरी सब्जीयां फूल गोभी, पत्ता गोभी, केला, करेला, पेहटा, परवल। इसके अलावा हम भूरा कुम्हडा (रखीया) की बड़ी बनाते थे। इससे भी हमें मिलती थी। साथ ही खिरा, लौकी और न जाने कितने प्रकार की सब्जीयों की बड़ी बनाते थे ताकि बरसात के मौसम में जब सब्जीयों के दाम बड़े तो इनसे काम चलाया जा सके। इनको फिर से अपना कर हम राहत महसूस कर सकते हैं।
कहने का अर्थ यह है कि उपाय हैं बस उसे करना होगा। यह तभी संभव है जब हम अपनी परपंरा के तरफ जाएगें।
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