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झीरम हमला की यादें

शाम के पांच बजे थे, यूनिवर्सिटी से छूटने के बाद हास्टल के लिए आया और क्या चल ‌रहा जानने के‌ लिए टीवी पर न्यूज लगाया था। तभी एक के बाद एक फूल स्क्रीन ब्रेकिंग आना शुरू हो गया। दरभा में नक्सली हमला... कांग्रेस के काफीले पर‌ नक्सली हमला... दरभा के झीरम घाटी में हमला हुआ है... पत्रकार के लिए यह अनुमान लगाना कठीन नहीं था, क्या हुआ होगा। वह भी उस क्षेत्र के पत्रकार के लिए जहां आए दिन नक्सली घटनाएं होती हैं। जर्नलिज्म के दूसरे सेमेस्टर का स्टूडेंट भले कुछ न समझ पाए लेकिन यह बड़ी घटना है एक पत्रकार के लिए समझना कठिन न था। उसके बाद कौन टीवी से हटता है, लगातार अपडेट आ रहे थे। महेंद्र कर्मा की हत्या.... नंदकुमार पटेल व दीपक पटेल का अपहरण.... पुलिस मौके पर पहुंची... विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल... जगदलपुर मेडिकल काॅलेज‌ में भर्ती... रायपुर के कई नेता थे उस काफीले मे.... मातम‌ का लहर छाया... चुनाव से ठीक छह माह पहले घटना हुई। इसके बाद भी प्रदेश में भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई‌। वजह स्पष्ट था, कांग्रेस में कोई भी शीर्ष नेता नहीं बचा था। जो थे उनपर लोगों को भरोसा नहीं था ऐसा बि...

दिल्ली दूर है तो क्या इरादे भी मजबूत हैं

दिल्ली के कई किस्से और कई कहानियां हैं। खुशी है, दर्द है इसके कई गम हैं। दिल्ली कभी दिलवालों की हो जाती है। तो कभी काम की तलाश में निकले बेरोजगारों की। रोजगार की तलाश में निकले मजदूरों की। अच्छे वेतन में नौकरी करने वालों की, उच्च शिक्षा के लालायित पढ़ाई करने वाले छात्रो की। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले उच्च महत्वाकांक्षी युवाओं की।‌ दिल्ली राजनीति में भविष्य तलाशने निकले नेताओं और दहशत फैलाने निकले आतंकियों की हो जाती है। दिल्ली कभी मांग पूरी नहीं होने पर विरोध करने का जगह होती है तो कभी दंगा फैलाने की। यह दिल्ली है यह कहने को तो केंद्र शासित प्रदेश है और यहां एक नहीं दो-दो राजधानियां और दो-दो सरकारों काम करती हैं, लेकिन व्यवस्था एक से भी सही नहीं हो पा रही। हिंदी पट्टी के ज्यादातर लोग (लोग इसलिए क्योंकि बच्चे से बुजुर्ग तक सभी) अपने जीवनकाल में एक बार दिल्ली जरुर जाना चाहते हैं। तभी तो कहावत भी बनी दिल्ली अभी बहुत दूर है।        स्कूल की किताबों में विज्ञान का चमत्कार (wonder of science) पढ़ाया जाता है जिसमें संसाधनों के बढ़ने और मेट्रो रेल के चलने से इसकी दूर...

बेरोजगार और लाचार मजदूरो की घर वापसी महंगाई और भुखमरी को जन्म देगी

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बिलासपुर में बैग ठीक कराते हुए मजदूर , किसान के लिए भारत में आजादी के बाद से सैकड़ों आंदोलन हुए हैं। कितनी ही पार्टियां और लोग मजदूर व किसान के हित के लिए लड़ते लड़ते अरबपति बन गये। पार्टियां सरकार बना लीं तो लड़ने वाले लोग मंत्री बन और अरबपति बन गये। नहीं बदली तो किसान व मजदूरों की समस्याएं उनकी किस्मत उनकी हालात। कल भी मजदूर मजदूरी करने, पेट पालने, भुखमरी से बचने पलायन कर रहा था, आज भी मजदूर पलायन कर रहाहै। कुछ गुदड़ी के लाल हुए होंगे जो आगे बढ़ गये होंगे उनकी गिनती लाखों में एक-दो होगी। लेेेेेकिन मजदूरों के हालात आज भी वही है, परिस्थितियां आज भी वैसी ही है जैसी आजादी के वक्त थी। मजदूरों के पास काम नहीं है, सरकारें राहत पैकेज की घोषणा पर घोषणा कर रही हैं। मजदूरों की घर वापसी करवा रही हैं। यह सोचे बिना कि यह मजदूर घर वापस जाकर क्या काम करेंगे। घर में बिना काम किए कितने दिन रहेंगे। उन उद्योगों का क्या होगा जहां ये काम कर रहे थे। उनके उत्पादन का क्या जिससे जीवन आसान हो रही थी। महंगाई कम थी‌। घर में रहकर मजदूर कितने दिन काम‌ नहीं करेगा। कितने दिन तक सरकारें इनको बिना काम क...

इस बार घर न जला बैठे देश में जाहिलों की कमी नहीं

कोरोना के असर से लक्षण, मरीज और मौत होने का सिलसिला जब से भारत में शुरू हुआ है। तब से आज तक प्रधानमंत्री जी तीन बार लाइव आए और लोगों को संबोधित किए। पहले संबोधन में उन्होंने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू  के साथ ही कोरोना सेनानी डाॅक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी, सफाईकर्मी जो सेवा कर रहे हैं को धन्यवाद देने के लिए अपील किया था। जो जनता कर्फ्यू के बाद शाम 5 बजे 5 मिनट अपने घर के दरवाजे, बालकनी, छत से ताली, थाली, घंटी, घड़ियाल जो भी हो बजाकर धन्यवाद करने कहा था। इसके परिपेक्ष्य में लोगों ने जिस तरह से धन्यवाद किया वह सोशल मीडिया पर सभी ने देखा। लोगों ने ऐसे बजाया कि उसका परिणाम कयी दिनों तक सामने आता रहा। जो बहुत ही भयानक था। कईयों ने पीट पीटकर थाली फोड़ दी, तो कुछ #जाहिलों ने रैली तक निकाले। जबकि कोरोना से बचने और कोरोना के चेन को तोड़ने के लिए  प्रधानमंत्री ने सोशल डिस्टेंसिंग बनाने के लिए जनता कर्फ्यू की अपील की थी। प्रधानमंत्री के कहे के पालन में लोग कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो गये। दूसरी बार 24 मार्च को जब प्रधानमंत्री जी लाइव आए तो उन्होने 21दिन के लाॅकडाउन की घोषणा की।...

कोरोना वायरस: चाइना की गंदी चाल से दुनिया परेशान, उपचार घरेलू उत्पाद

चीन के वुहान शहर में सबसे पहले कोरोना वायरस फैला। चीन सरकार का दावा है वुहान से किसी को बाहर निकलने नहीं दिया गया। इसकी वजह से चीन के दूसरे बड़े शहरों में कोरोना नहीं फैला। यह गंदी चाल चीन की सरकार के द्वारा चली गयी। ऐसे ही चाल कम्युनिस्ट चलते हैं। चीन हमेशा से ऐसी चालें अपने से छोटे देशों को तबाह करने के लिए चलता रहा है। चीन फिलहाल समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था को अपनाया है, जिसके अधीन पूंजीवा और अधिकारवादी राजनैतिक नियंत्रण सम्मिलित है। ऐसे में इस देश से कोरोना का फैलाव होना और उसी देश के दूसरे शहरों में प्रभाव न पड़कर दुनियाभर में इस महामारी के फैल जाने से चीनी चाल साफ दिखता है। आंकड़े बता रहे है कि चीन में जहां तीन हजार मौतें हुई हैं। वहीं अकेले इटली में दस हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। तबाही का आलम है। डब्लू एच ओ की माने तो संक्रामक रोग है। परिचय:-  कोरोना वायरस (COVID-19) एक संक्रामक रोग है। यह एक नए तरह के वायरस की वजह से होता है जिसे पहले कभी इंसानों में नहीं देखा गया। (WHO)।  रोक थाम :- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार  कोरोना वाय...

जनता कर्फ्यू के दौरान नक्सली हमला देश को उकसाने का काम कर रहा

बेरोजगारी से जंग लड़ रहे भारत के जवानों को ऐसे ही मारते रहेंगे तो‌ कैसे ये आपकी सुरक्षा करेंगे जनाब। आपकी लड़ाई जो भी हो, लेकिन हथियार उठाकर अपने ही देश के नौजवानों को मार दे यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। आप सत्ता के लिए लड़ रहे हैं, ‌लेकिन उस सत्ता को कोई हथियार के डर से कुछ समय के लिए भले स्वीकार करा ले, लेकिन वास्तविक रूप में उसे लोग सिर्फ कुछ समय के लिए ही सत्ता में रहने देंगे। बाद में फिर विद्रोह होगा, फिर उतनी ही जाने जाएंगी। क्योंकि हथियार के दम पर मिलने वाली सत्ता भी हथियार के दम पर ही नष्ट होती है। 17 जवान नक्सली हिंसा में शहीद हुए। एंबुश में उस दिन फंसे जिस दिन प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था, लोग अपने घरों से न निकले लोगों से न मिलें जिससे कोरोना से आम लोग बच जाएं। कोरोना का चेन टूटे और देश इस महामारी से सुरक्षित हो। ऐसे समय में असामाजिक ताकतों से सुरक्षा के लिए पुलिस जवान, रोग पीड़ित मरीज की सुरक्षा के लिए डाॅक्टर, जगह जगह क्या घटनाएं हो रही हैं उसको कवरेज करने के लिए पत्रकार, गंदगी न फैला रहे, रोग जनित जीव न हो इसके लिए सफाई कर्मी और दूसरे आवश्यक लोग काम कर र...

गंगा में खेती

हर हर गंगे... गंगा नदी को पवित्र नदी यू ही नहीं कहते, नदी के जल में जहां एंटीबायोटिक होती है, वहीं नदी के किनारे बसे लोगों का जीवन यापन गंगा के भरोसे ही होता है। इन दिनों सहायक नदियों से आने वाले पानी का दबाव कम हो गया है। यही वजह है कि अब गंगा का जल बिखराव और तेज बहाव दोनों कम होने से किनारे पर कटाव व बाढ़ का असर भी समाप्त हो गया है। नदी का बहाव धीमा होते ही स्थानीय लोग सदियों से नदी के तट में तरबूज, ककड़ी और दूसरे फसलों की खेती कर रहे हैं। बारिश के बाद एक बार फिर किसान नदी के बीच में बड़ी संख्या में पौधे लगाए हैं। यह अगले माह अप्रैल से फसल देना शुरू करेंगे जो गर्मी में लोगों को राहत देंगे। उपजाऊ और बालुई मिट्टी तरबूज, ककड़ी की खेती के लिए उपयुक्त बताया गया है, गंगा के रेत सले लिए बहुत ही अच्छा है। सिंचाई के पानी के लिए किसान नदी में पचास फीट तक गहराई पर मोटर लगा देतें। डिजल से चलने वाले मोटर पर्याप्त पानी बाहर निकालते हैं। यह मोटर बारिश के समय किसान निकाल लेते हैं। इस तरह नदी को नुकसान पहुंचाए बिना किसान फसल की पैदावार लेते हैं। नदी की रेत पतली है इसलिए इसका उपयोग निर्माण काम कम ...

बातें अखबारों की

#बातेंअखबारोंकी आज बात अखबारों के कार्यालय की करते हैं। आप अखबारों में हमेशा लड़ाई, झगड़ा, मारपीट, लूट, डकैती, हत्या की खबरें पढ़ते होंगे। लेकिन क्या आपको पता है खबरों की हत्या हो जाती है? खबरें मर जाती है?  खबरों को जीवित करने और खबरों को मारने  का भी काम अखबार में होता है। इतना ही नहीं खबरें लड़ जाती हैं उन्हें लड़ने से रोकना होता है। जैसे दो व्यक्ति के बीच में लड़ाई होने पर तीसरा व्यक्ति, या पुलिस लड़ाई को रोकती है वैसे ही खबरें न लड़े इसके लिए भी अखबारों में आदमी होते हैं। आज इन्हीं तमाम बातों पर चर्चा करेंगे। खबरों से बात शुरू करते हैं। खासकर यहां कई ऐसी भी बातें होती हैं, जिन्हें जानकर आपको अखबारों के कार्यालय में अखबारी काम देखने का मन करेगा। आखिर कैसे काम करते हैं अखबार में खबर आने और छपने से लेकर आपके हाथ में पहुंचने तक क्या क्या किया जाता है तमाम सवालों के जवाब मिलेंगे। तो बढ़ते हैं खबरों की तरफ जिसपर भी चर्चा होनी चाहिए। कुछ अंदरूनी बातें आज यहां बता रहा हूं। यह अमूमन हर अखबार में होती है। अखबारों में हर दिन खबर होती ही है। आपका सवाल होगा आती कहां से हैं तो इस...

कश्मीर व्यथा कथा तीन किश्त- कनक तिवारी

लहूलुहान अनुच्छेद 370 की कश्मीर व्यथा कथा पहली किश्त (1)भारतीय नेताओं के कारण सियासत का घाव पक गया है और उसमें मवाद भी है। सियासत की हर सांप्रदायिक खखार के जरिए देश के माहौल में हिंसा का बलगम थूका जा रहा है। यह समय बहुत परेशानदिमागी और चुनौतियों के साथ नागरिक खतरे का भी हो रहा है। हर सच को जिबह कर उसे नारों के गर्भगृह में भ्रूण बना दिया जाता है। यदि किसी घटना, निर्णय या तर्क की तटस्थ, उर्वर, बौद्धिक और देशज जांच की जाए तो उस पर नासमझ समर्थकों द्वारा कायिक, बौद्धिक और मानसिक हमले कराए जाते हैं। इसके बावजूद देश है कि उसे रोशनी की तरफ चलना है। घटाटोप अंधेरा अब उसका नहीं है जिसका सूरज दिन के चौबीस घंटे संसार के किसी मुल्क के ऊपर इतराता रहता था। यह खतरा हिन्दुस्तानी खुद उगा रहे हैं। हर समझदार नागरिक और विशेषकर युवा पीढ़ी को अब सभी विचारधाराओं को दरकिनार करके केवल उस राष्ट्रीय फलसफाई पुस्तक संविधान की इबारत को इस तरह समझने की जरूरत है मानो वह दिए या टाॅर्च की रोशनी बल्कि जुगनू की जगमग तो मान ली जाए जिससे अंधेरा छंटे। जम्मू कश्मीर की सत्यनारायण की कथा का पाठ हर उस पार्टी और नेता की आलोचना भ...

भारत बैंक और हरिशंकत बागला व अन्य

भारत बैंक ऑफ इंडिया -  अपीलार्थीगण          बनाम भारत बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड के कर्मचारीगण - उत्तर्थीगण संदर्भ - A.I.R. 1950, S.C. 188. विषय - यह विवाद औध्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7 एवं 15 पर आधारित है जो यह प्रतिपादित करता है कि ट्रिब्यूनल न्यायिक स्वरूप में कार्य करता है। यद्यपि व न्यायालय नहीं है। वाद के तथ्य - भारत बैंक लिमिटेड कंपनी की स्थापना कंपनी अधिनियम के अंतर्गत हुई थी। कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के सम्मुख कुछ मांगे रखी, परंतु कंपनी ने अनसुनी कर दी। मांगे न मानी जाने पर कंनपी के कर्मचारियों ने दबाव डालने के लिए 9 मार्च 1949 ई. को काम करना बंद कर दिया। कंपनी ने अपने कर्मारियों के काम पर आने की सूचना दी, लेकिन वे काम पर वापस नहीं आए। परिणामस्वरूप कंपनी ने 19 मार्च तथा 24 मार्च के मध्य कुछ कर्मचारियों को सेवा-मुक्त कर दिया और यहीं से औद्योगिक विवाद शुरू हो गया। इस औद्योगिक विवाद का निपटारा करने के लिए केंद्रयी सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत तीन व्यक्तियों का ट्रिब्यूनल स्थापित कर दिया। ट्रिब्यूनल को कर्मचारियों क...