जनता कर्फ्यू के दौरान नक्सली हमला देश को उकसाने का काम कर रहा

बेरोजगारी से जंग लड़ रहे भारत के जवानों को ऐसे ही मारते रहेंगे तो‌ कैसे ये आपकी सुरक्षा करेंगे जनाब। आपकी लड़ाई जो भी हो, लेकिन हथियार उठाकर अपने ही देश के नौजवानों को मार दे यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। आप सत्ता के लिए लड़ रहे हैं, ‌लेकिन उस सत्ता को कोई हथियार के डर से कुछ समय के लिए भले स्वीकार करा ले, लेकिन वास्तविक रूप में उसे लोग सिर्फ कुछ समय के लिए ही सत्ता में रहने देंगे। बाद में फिर विद्रोह होगा, फिर उतनी ही जाने जाएंगी। क्योंकि हथियार के दम पर मिलने वाली सत्ता भी हथियार के दम पर ही नष्ट होती है। 17 जवान नक्सली हिंसा में शहीद हुए। एंबुश में उस दिन फंसे जिस दिन प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था, लोग अपने घरों से न निकले लोगों से न मिलें जिससे कोरोना से आम लोग बच जाएं। कोरोना का चेन टूटे और देश इस महामारी से सुरक्षित हो। ऐसे समय में असामाजिक ताकतों से सुरक्षा के लिए पुलिस जवान, रोग पीड़ित मरीज की सुरक्षा के लिए डाॅक्टर, जगह जगह क्या घटनाएं हो रही हैं उसको कवरेज करने के लिए पत्रकार, गंदगी न फैला रहे, रोग जनित जीव न हो इसके लिए सफाई कर्मी और दूसरे आवश्यक लोग काम कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस बल पर घात लगाकर हमला किया जाना यह विदेशी आतंकी ताकतों जैसे उकसाने का काम है। सरकार भले इस मामले में चूप बैठ जाए लेकिन क्या उन जवानों के बेटों को पिता की हत्या का बदला लेने की सोच को उकसाने का काम नहीं किया जा रहा। वे भी इसी तरह नक्सली गतिविधियों में शामिल लोगों को या कम्युनिस्ट सोच के हर उस व्यक्ति जो संविधान के खिलाफ काम कर रहा है इसी तरह घात लगाकर हत्याएं करने लगे तो संविधान सम्मत होगा। तब ये लोग मानवाधिकार की बात करेंगे। क्या इन जवानों का मानवाधिकार नहीं था। यह भी तो अपनी बेरोजगारी को खत्म करने और चार पैसा कमाने के लिए अपने गांव, शहर को छोड़कर इतनी दूर आए हुए हैं, ताकि देश का हर एक व्यक्ति चैन से सो सके, अपने घर में घंटा, घड़ियाल, शंख, थाली, कटोरी, प्लेट और पारात बजा सके। लेकिन यह काम यह हमला लोगों को उकसाने और उन्हे असुरक्षित करने के लिए किया गया। मानसिकता व्याक्त किया गया कि सरकार के साथ वे नहीं हैं। एकजुटता को तोड़ने के लिए यह किया गया, वे एक‌मानसिकता के साथ खुद संगठित हैं, लेकिन कोई अम व्यक्ति संगठित न हो इसके लिए यह हमला किया गया है। देश अभी कोरोना वायरस से लड़ रहा है इस घड़ी में लोगों की जान पहले से खतरे में है ऐसे समय में यह हमला किया जाना नक्सलियों के नकारात्मक सोच को प्रदर्शित करता है। यह एक दूसरे युद्ध को भी जन्म दे रहा है कि शहीदों के परिवार भी सरकार और नस्लवाद के खिलाफ हथियार उठाए और फिर जिस क्षेत्र में घटना हुई उस क्षेत्र के लोगों को गाजर मूली की तरह काट दें। आने वाले समय में यह युद्ध होगा क्योंकि ऐसी घटनाएं न रुक रही हैं न रोकी जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद उम्मीद थी नक्सली प्रभावित क्षेत्र में चर्चा होगी, नक्सलवाद समाप्त किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुआ। केंद्र सरकार भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। अभी जबकि आपातकाल है, देश वायरस से लड़ रहा है नक्सलियों, कम्युनिस्ट सोच रखने वाले लोगों को भी इस बुरे समय में देश की मदद करनी चाहिए, लेकिन इसके उलट वे देश के जवानों को  मारने का काम कर रहे हैं...🖊दीपेंद्र

सभी शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि। 💐🙏

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