बातें अखबारों की
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आज बात अखबारों के कार्यालय की करते हैं। आप अखबारों में हमेशा लड़ाई, झगड़ा, मारपीट, लूट, डकैती, हत्या की खबरें पढ़ते होंगे। लेकिन क्या आपको पता है खबरों की हत्या हो जाती है? खबरें मर जाती है? खबरों को जीवित करने और खबरों को मारने का भी काम अखबार में होता है। इतना ही नहीं खबरें लड़ जाती हैं उन्हें लड़ने से रोकना होता है। जैसे दो व्यक्ति के बीच में लड़ाई होने पर तीसरा व्यक्ति, या पुलिस लड़ाई को रोकती है वैसे ही खबरें न लड़े इसके लिए भी अखबारों में आदमी होते हैं। आज इन्हीं तमाम बातों पर चर्चा करेंगे।
खबरों से बात शुरू करते हैं। खासकर यहां कई ऐसी भी बातें होती हैं, जिन्हें जानकर आपको अखबारों के कार्यालय में अखबारी काम देखने का मन करेगा। आखिर कैसे काम करते हैं अखबार में खबर आने और छपने से लेकर आपके हाथ में पहुंचने तक क्या क्या किया जाता है तमाम सवालों के जवाब मिलेंगे। तो बढ़ते हैं खबरों की तरफ जिसपर भी चर्चा होनी चाहिए। कुछ अंदरूनी बातें आज यहां बता रहा हूं। यह अमूमन हर अखबार में होती है। अखबारों में हर दिन खबर होती ही है। आपका सवाल होगा आती कहां से हैं तो इसका जवाब है संवाददाता लाते हैं। उनके पास उनके सूत्र और निश्चीत विश्वसनीय व्यक्ति द्वारा आते हैं। आप अखबार में किस तरह के न्यूज पढ़ते हैं हम उसपर चर्चा करते हैं। अपराध, राजनीतिक, अदालत, खेल, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक गतिविधियां, प्रशासनिक निर्णय, निर्माण, शहर की गतिविधिया, फिल्म की खबरें। इसे ही अपनी इच्छा के हिसाब से लोग पसंद करके पढ़ते हैं। अखबार में खबरें होती हैं और उसे बनाना पड़ता है। बोले तो पढ़ने के योग्य बनाना पड़ता है। जैसे खाना खाने के लिए भोज्य सामग्री तैयार की जाती है, वैसे ही पढ़ने योग्य समाचार तैयार किए जाते हैं। इसके लिए टीम होती है। इस टीम को संपादकीय कहा जाता है। जिसके प्रमुख संपादक होते हैं। अखबारों में कनिष्ट संवाददाता से लेकर विशेष संवाददाता तक कई संवाददाता होते हैं। जो पूरी जानकारी अखबार में उपलब्ध कराते हैं। इन्ही जानकारी के आधार पर तैयार खबर को कुछ लोग अखबार से काट कर यादों के लिए सहेज लेते हैं। इस तरह के अखबार के कतरन को कटिंग कहते हैं। अखबार में लगने से पहले कई खबरें मर जाती हैं। इन्हें मारने में संवाददाता से लेक संपादक तक का हाथ होता है। क ई अच्छी खबर को संवाददाता तैयार करने के डर से मार देता है, तो क ई बनी बनाई खबरें जांच और पेज तैयार करने के दौरान उपसंपादक और पेज डिजाइनर मार देते हैं। खबरों की हत्या भी की जाती है। यह काम सह संपादक या उप संपादक के करते हैं। खबरों को जीवित रखने का काम संवाददाता और संपादक करते हैं। खबर को अपडेट और अपडेट करके छापने खबर जी उठती है। लेकिन इसके बाद भी आपको पता नहीं होगा की अखबार के पेजों पर खबरें लड़ जाती हैं। इस लड़ाई को रोकने के लिए भी अखबार के दफ्तर में व्यक्ति होते हैं, जिन्हें डेस्क इंचार्ज कहते हैं, ये महाशय कयी अखबारों में डेस्क का अनुभव रखे हुए होते हैं कभी कभी एक ही डेस्क से बहुत कुछ सीखे होते हैं, जो खबरें लड़ रही होती हैं उनमें से एक खबर को पेज से बाहर का रास्ता दिखाते हैंऔर उस जगह पर दूसरी खबर को जगह दी जाती है। इस तरह दो खबरों की लड़ाई तो रोकते ही हैं ये ज्ञानी बाबा लोग दो फोटो को भी लड़ने नहीं देते।
यह जानकारी कैसी लगी? और किस विषय पर लिखना चाहिए कमेंट बाॅक्स में जरुर बताएं।
#काॅपीराइट
जय हिंद
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