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23 महीने में 3114 दुष्कर्म, बस्तर में 299 इसके बाद भी छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया हैं?

0 237 महिलाओं को नहीं मिली सहायता 0 163 आदिवासी के साथ भी दुष्कर्म , विपक्ष का सदन से वाक आउट छत्तीसगढ़ में हर दिन 5 महिलाओं की लुटती है आबरू ... ये आंकड़े प्रदेश के लिए शर्मनाक जनक हैं…जिसे सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है। दंतेवाड़ा विधायक देवती कर्मा के सवाल पर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा का जवाब सबको सोचने पर मजबूर करती है। छत्तीसगढ़ में 23 महीने में 3314 महिलाओं से दुष्कर्म की घटना हुई। मतलब हर दिन 5 महिलाओं की अस्मत लुटी गी। गृहमंत्री के आंकड़े को माने तो सिर्फ बस्तर में दो साल में 299 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया है। 299 महिलाओं में अनुसूचित जाति की 17 और 163 आदिवासी महिलाएं शामिल हैं। हालांकि सरकार ने ये भी दावा किया कि जिन 299 महिलाओं के साथ रेप किया गया है.. उनमें 270 मामलों के आरोपी पकड़ लिए गए। वहीं 8 मामले के आरोपी अभी भी फरार हैं। इन प्रकरणों के बीच सरकार ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि 36 रेप पीड़िता को सरकारी मदद के तौर पर 38.72 लाख रुपए दिए गए हैं। जबकि 237 रेप पीड़िता को सरकारी मदद इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि वो सरकारी मदद की पात्रता नहीं रखती थी। सबसे ज्...

हम टैक्स क्यों दें ? एक तनख्वाह से कितनी बार टैक्स दैं और घोटाले को नजरअंदाज करें

सरकार के आकड़े के मुताबिक भारत में मात्र कुछ परशेंट लोग ही टैक्स देते हैं। अगर आंकड़ा सच है तो इस तर्क पर सरकार को जवाब देना चाहिए। वित्त मंत्री को आगे आकर बताना चाहिए कि देश के 250 करोड़ जनता किसी न किसी रूप में टैक्स नहीं देती। सवाल यह कि हम कितने बार टैक्स दें। और क्यों दें। रात दिन हाड़तोड़ मेहनत करते हम हैं... हमें न सही सड़क मिलती हैं, न ढंग का पानी, न सुरक्षा की कोई गारंटी। थाने में जाओ तो पुलिस को घूस दो, कोर्ट में जाओ तो बाबू को घूस दो। निगम में जाओ तो क्लर्क को, मंत्रालय में जाओ तो आईएएस को तो फिर टैक्स देने की जरूरत ही क्या है। मेरे ख्याल से यह टैक्स भी एक घूस की तरह ही हो गया है। महीने के पहली तारीख को एक तनख्वाह मिलती है। इसके बाद कितनी बार टेक्स देते हैं इस पर कभी सरकार ने गौर क्यों नहीं किया... इसका जबाब है??? ये थे ब़डे घोटाले … 1948 जीप घोटाला, आज़ाद भारत का पहला घोटाला 1951 साइकिल घोटाला, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सचिव फंसे 1956 बीएचयू फंड घोटाला, आज़ाद भारत का पहला शैक्षणिक घोटाला 1958 मूंध्रा घोटाला, फिरोज गांधी ने किया खुलासा, फंसे वित्त मंत्री 1963 आज़ा...

जनगणना 2001: उत्तर प्रदेश की आबादी पाकिस्तान से ज्यादा

उत्तर प्रदेश में इन दिनों चुनाव चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश भर की निगाहें इस चुनाव पर हैं। वजह साफ है, देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में मुख्यमंत्री का चुनाव चल रहा है। यहां किस दल का मुख्यमंत्री चुना जाएगा यह ई‌वीएम के गर्भ में वोट बटन के माध्यम से डाला जा रहा है। बहरहाल हम बात कर रहे हैं चर्चा पर। तो बता देना चाहता हूं कि यह उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रधानमंत्री भी स्टार प्रचारक की तरह लगातार रैली और मंचीय कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश एक प्रदेश बस नहीं बल्कि अपने आप में कई देशों से बड़ा है। आबादी के क्षेत्र में अगर बात करुं तो पड़ोसी देश पाकिस्तान की आबादी भी उत्तर प्रदेश से कम है। बीबीसी हिंदी की 2004 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार  2001 की जनगणना में उत्तर प्रदेश की आबादी पाकिस्तान की आबादी से ज्यादा हो गई थी। भारत की जनगणना के आंकड़ों में आबादी के लिहाज़ से उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जबकि लक्षद्वीप में सबसे कम लोग रहते हैं। भारत के महापंजीयक जेके बांठिया ने 2001 की जनगणना के विस्तृत आंकड़े जारी करते हुए शनिवार को दिल्ल...

नोट बंदी के 50 दिन पूरे, सर्कुलर पर सर्कुलर

8 नवंबर 2016 की रात 7.50 बजे...टीवी पर एक घोषणा होती है कि अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। इस घोषणा को देखकर जिन लोगों ने रिमोट से टीवी का चैनल बदला उनकी जिंदगी अगले कुछ मिनटों में प्रधानमंत्री ने बदलकर रख दिया। जी हां यह शत प्रतिशत सही है ये वे लोग थे जो प्रधानमंत्री के इस भाषण को बाद में कई बार सुने टीवी चैनलों को बार बार बदलकर देखे। वजह लोगों की जिंदगी को प्रधानमंत्री ने चैनल की तरह आगे पीछे कर दिया था। इस समय तक लोगों ने भाषण शुरू होने को प्रधानमंत्री को मजाक में लिए वे अगले 31 दिसंबर तक मजाक बनकर रह गए है। उनको बड़बोला बोलने वाले अब हर दिन दहशत में है कि फेंकू अब क्या बोल देगा। उनकी एक भाषण ने लोगों को कई पेटी फेंकने पर मजबूर कर दिया। इसलिए कहा गया है कि बंदे को हर समय एक जैसे नहीं लेना चाहिए। कब माथा सटका और सडक पर लाकर खड़ा कर दिया...  अब उड़ाओ मजाक और उड़ाते रहो...भाइयों और बहनों...मित्रों... बम बड़बोला बोल रहे है। 8 नवंबर की रात 8 बजे वाले भाषण ने लोगों की बोलती बंद कर रख दिया। कुछ इस तरह हुई थी उस रात की शुरुआत... 08:01 PM देश को संबोधित कर रहे हैं...

छत्तीसगढ़ सरकार की हिंदू संस्कृति से खिलवाड़?

- नारायणपुर में देवउठनी एकादशी से पहले करवा दिया सामूहिक विवाह राज्य की भाजपा सरकार राज्य की जनता हितकर नहीं है। इसका उदाहरण गर्भाशय कांड, अंखफोडवा कांड, नसबंदी ऑपरेशन, भूमि अधिग्रहण, नदियों पर बांध बनाने का निर्णय, राज्य की बिजली को राज्य के किसान और उद्योगों के बजाय दूसरे राज्यों को बेचने का निर्णय ऐसे कई उदाहरण है जिसने सरकार से भरोसा उठाया है। हालिया में गायों की मौत और फिर उसके बाद हिंदू संस्कृति पर हमला का नया मामला सामने आया है। सरकार हिंदू रीति-रिवाजों से खिलवाड़ करने में लग गई है। भारतीय जनता पार्टी खुद को हिंदू संस्कृति का ध्वजवाहक बताती और कहती आई है। इसके बाद भी अब छत्तीसगढ़ में सरकार हिंदू रीति रिवाजों को दरकिनार कर शादियां करा रही है। यह सब मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की मौजूदगी में हुआ। अब सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री क्या एक पिता की हैसियत से अपने बेटे और बेटी की शादी देवउठनी एकादशी के पहले कराइ थी? अगर नहीं, तो फिर नारायणपुर में ऐसा क्यों किया? नारायणपुर में राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 176 जोड़ों की शादी करवाई गई। जिसके आशीर्वाद समारोह में म...

बिना सिर पैर के संचालित हो रहे इलेक्ट्रानिक मीडिया

सातवां वेतनमान आयोग  केंद्र सरकार ने  लागू कर दिया। इसकी अड़चनों को लेकर अब आंदोलनों का दौर चल रहा है। जिसे प्रिंट के साथ इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोग कवरेज कर रहे हैं। इसी तरह के कई आयोग सालों से प्रिंट मीडिया के लिए भी बने हैं। इसमें हालिया विवाद में मजीठिया है। जिसे देने के लिए प्रेस मालिक तैयार नहीं है और प्रिंट मीडिया के लोग लगातार हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके विपरित इलेक्ट्रानिंक मीडिया जन्म से अनाथ जैसी है। यहां प्रिंट मीडिया से भी ज्यादा शोषित वर्ग है, पत्रकारिता के नाम पर इलेक्ट्रानिक मीडिया के रिपोर्टर, कैमरा मैन के साथ जिस तरह का शोषण हो रहा है वह देखने लायक है। बावजूद इसके इनके लिए न तो आज तक कोई बोर्ड का गठन हुआ न वेतन आयोग और न ही कोई नियम बनी।  न उनके वेतन को लेकर न उनकी सुरक्षा को लेकर। पत्रकार मर रहे हैं तो इससे सरकार को क्या? वे बीमार है तो प्रेस, इलेक्ट्रानिक मीडिया के मालिकों को क्या?           टीवी चैनलों में बैठकर देश और राज्य की बात करने वाले दिग्गज ने कभी पत्रकारों की दशा पर चिंता नहीं की।...

ओलंपिक में भारत की स्थित आबादी के हिसाब से घातक है, अच्छा होगा मेडल के लिए किसी थर्ड जेंड़र की तलाश करें

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रियो ओलंपिक में भारत के साक्षी और सिंधू को छोड़कर बाकि खिलाड़ियों ने कुछ खास कर नहीं पाए हैं। भारती की स्थिति 2 पदक के साथ 64 वें स्थान पर है। यह शर्मनाक है कि 120 करोड़ आबादी वाले देश में हम इतने भी खिलाड़ी नहीं तैयार कर पराते कि वे विश्वस्तर की इस प्रतियोगिता में 1 स्वर्ण भी ला सकें। जबकि हर वस्तु पर टैक्स लोगों से वसूला जाता रहा है। इन खिलाड़ियों पर खर्च होने वाली राशि और खेल में व्याप्त राजनीति ने देश के सिर को विश्व स्तर पर नीचा किया है। साथ ही यहां के राजनीतिक लोगों को सोचना ही चाहिए कि वे देश की क्या हालात बना रखे हैं। यह देश के मतदाताओं के लिए भी सोच की विषय है कि देश में खिलाड़ियों की जो स्थिति हैं उससे उनकी स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। खुशी की बात है कि जिस देश में लगातार दष्कर्म की पीड़ा बेटियां झेल रही हैं वहीं की दो बेटियों ने पदक हासिल किया। देश में महिलाओं पर पाबंदी लगाने और कोख में मारने से पहले अब लोगों को यह सोचना होगा। तीसरी बात यह भी कहना चाहूंगा कि बेटे की चाहत में अंधे लोग न सिर्फ बेटी बल्कि उस संतान को भी महत्व दें जो लिंग से बाहर हैं अर्थात थर्ड जेंडर को भी प्राथ...