छत्तीसगढ़ सरकार की हिंदू संस्कृति से खिलवाड़?
- नारायणपुर में देवउठनी एकादशी से पहले करवा दिया सामूहिक विवाह
राज्य की भाजपा सरकार राज्य की जनता हितकर नहीं है। इसका उदाहरण गर्भाशय कांड, अंखफोडवा कांड, नसबंदी ऑपरेशन, भूमि अधिग्रहण, नदियों पर बांध बनाने का निर्णय, राज्य की बिजली को राज्य के किसान और उद्योगों के बजाय दूसरे राज्यों को बेचने का निर्णय ऐसे कई उदाहरण है जिसने सरकार से भरोसा उठाया है। हालिया में गायों की मौत और फिर उसके बाद हिंदू संस्कृति पर हमला का नया मामला सामने आया है। सरकार हिंदू रीति-रिवाजों से खिलवाड़ करने में लग गई है। भारतीय जनता पार्टी खुद को हिंदू संस्कृति का ध्वजवाहक बताती और कहती आई है। इसके बाद भी अब छत्तीसगढ़ में सरकार हिंदू रीति रिवाजों को दरकिनार कर शादियां करा रही है। यह सब मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की मौजूदगी में हुआ। अब सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री क्या एक पिता की हैसियत से अपने बेटे और बेटी की शादी देवउठनी एकादशी के पहले कराइ थी? अगर नहीं, तो फिर नारायणपुर में ऐसा क्यों किया?
नारायणपुर में राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 176 जोड़ों की शादी करवाई गई। जिसके आशीर्वाद समारोह में मुख्यमंत्री स्वयं पहुंचे और विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिए। सामूहिक विवाह करवाना अच्छी बात है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को बताना चाहिए कि क्या हिंदू संस्कृति के अनुसार यह समय शादियों का है? क्या देव उठ गए हैं? क्या देवउठनी एकादशी हो चुकी है? क्योंकि हिंदू संस्कृति के अनुसार तो शादियां देव उठने या देवउठनी एकादशी से ही प्रारंभ होती है। उससे पूर्व तो देव शयन के माह होते हैं, जिस दौरान शादियां नहीं होती है। यह सरकार देव शयन के माह में ही शादियां करवा रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार की यह कैसी संस्कृति कि अशुभ समय में विवाह जैसा संस्कार करवाएं। भाजपा हमेशा पश्चिमी संस्कृति का विरोध करती आई है, लेकिन अपनी संस्कृति की ऐसी तौहीन करना भाजपा की कौन सी संस्कृति है? सरकार महज अपनी पीठ थपथपाने के लिए क्यों हिंदू और आदिवासी संस्कृति से खिलवाड़ करने पर तुली है? एक मुखिया का दायित्व होता है कि वह सभी संस्कृति, रीति-रिवाजों का पालन करे और करवाए लेकिन यहां तो उल्टा ही नजर आ रहा है। संस्कारों के उलट शादियां हो रही है और प्रदेश का मुखियां वहां मुस्कुराते हुए आशीर्वाद दे रहे हैं। इस सामूहिक विवाह में आदिवासी जोड़ों का भी विवाह उनकी अपनी आदिवासी संस्कृति से खिलवाड़ कर किया जा रहा है। आदिवासियों का विवाह उनके अपने पुजारी करवाते हैं, लेकिन नारायणपुर के इस सामूहिक विवाह को दूसरे समाज के पुजारियों से कराया गया। सरकार आदिवासी संस्कृति का एक तरफ पुलिसिया अत्याचार में मारकर खत्म कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी संस्कृति को इस तरह से नष्ट किया जा रहा है।
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