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पहल: सब्सिडी की, पर राजनीति से दूर हो

केंद्र सरकार घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर पिछले कुछ सालों से नई-नई बदलाव कर रही है। लोगों को मिलने वाली सब्सिडी में बदलाव कर रही है। वर्तमान में एक बार फिर नया बदलाव किया गया है। इसमें सब्सिडी के नाम का बदलाव कर उसका नाम पहल कर दिया गया है। इसमें सिधे सब्सि़डी राशि लोगों के खाते में आ जाएगी। इसके लिए आधार कार्ड और बैंक एकाउंट होना जरुरी है बस। इसके लिए सरकार दोनों चीजे उपलब्ध करा रही है। तीन साल पहले से आधार कार्ड बनाने की स्कीम चला रही है। वहीं वर्तमान में प्रधान मंत्री जन-धन योजना के तहत हर परिवार का बैंक एकाउंट खोलने की शुरुआत की है। स्कीम का लाभ लोगों को मिलेगा और इस लाभ को लोग पाने के प्रयास कर रहे हैं। यह स्कीम लोगों के साथ सरकार को भी फायदे मंद साबित होने वाली है। इससे सिलेंडरों की काला बाजारी में कमी आएगी। साथ हीं पता चल सकेगा की वास्तव में एक परिवार कितना सिलेंडर घरों में उपयोग में लाते हैं साल भर में। वैसे सरकार ने खुद ही पहले 9 फिर 12 सिलेंडर देने की योजना बनाई है। योजना अच्छी है पहल अच्छी है बस इसमें राजनीति को न घुसाया जाए तो सफल होने की संभावना है। इससे पहले स्वच्छता अभ...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम तीसरा पत्र

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आयोग पर आयोग...आयोग पर आयोग... गठित कर रही है सरकार। आखिर कब  इसकी रिपोर्ट आएगी प्रधानमंत्री साहब। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी के बाद महिलाओं की और दवा खाने से आम लोगों की मौत के बाद एक बार फिरसरकार ने न्यायिक आयोग गठित कर दी है। जानकारों के अनुसार इससे पहले सात मामलों में न्यायिक आयोग का गठन  जांच के लिए किया गया है। जिसका अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। इन मामले के दोषियों को सजा भी नहीं मिली है और वे निश्चिंत होकर बाहर घूम रहे हैं। इसलिए अब सवाल यहां न्यायिक जांच आयोगो पर तो हैं ही साथ ही सरकार की कार्य प्रणाली पर भी उठ रही है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपकी बेशर्मियत की क्या तारीफ किया जाए। आपकी बड़ी-बड़ी बातों ने ही लोगों को आपकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए सोचने पर मजबूर किया पर आपकी जो अब निति है वह कहीं न कहीं लोगों को खल रही है। इतनी बड़ी योजना को आपकी पार्टी की राज्य में बैठी सरकार भट्‌टा बैठा दिया और आप मुकदर्शक बने विदेशों का दौरा करते रहे इससे शर्म की बात और क्या होगी। सही कहा गया है कि सत्ता में बैठने के बाद लोग अंधे हो जाते है। यह अंधत्व आप ...

छत्तीसगढ़ सरकार के कैसे फैसले

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छत्तीसगढ़ की सरकार का बहुरुपिया चेहरा अब नजर आने लगा है। सरकार में बैठे दोहरे चेहरे वालों को लोग पहचानने लगे हैं। लोगों को यह भी पता चल रहा है कि अब क्या हो रहा है। उसने तीसरी बार एक ही पार्टी की सरकार चुनकर कितनी बड़ी गलती किया है यह उसे अब खल रहा है। दूसरी बार में मिले दर्द और सबक को भूला कर तीसरी बार सरकार चुनने के बाद जो दर्द मिला है वह कभी नहीं भूला जा सकता। अभी वे सरकार के दूसरे कार्यकाल की घटनाओं को भूल भी नहीं पाए थे कि   नया दर्द छत्तीसगढियों को मिला है।                       विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर 2013   को अभी एक साल नहीं बीते हैं... और नसबंदी में महिलाओं की मौत का नया दर्द छत्तीसगढ़ियों को मिला है। नसबंदी में मिलने वाली दवाओं में जहर मिलना छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ क्या है यह सरकार न्यायिक आयोग गठित कर साफ कर चुकी है। दवाओं में जहर मिलना और लोगों को देने से पहले मिली सप्लाई को सरकार के जिम्मेदारों ने जांच न कराकर जो लापरवाही दिखाई है वह साफ है। सरकार को छत्तीसगढ़ के लोगों की चिंता नहीं है। स...

रामपाल कैसे संत जो देश की कानून को नहीं मानते

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देश की मीडिया में इन दिनों हरियाणा के कथित संत रामपाल (क्योंकि संत शांत शब्द से बना है और इनका नाम आते ही अशांति और उपद्रव होने की बात दिखती है) को लेकर कोहराम मचा हुआ है। हर बड़ी खबर के बाद इनके बारे में दिखाया जा रहा है। रामपाल जो भी हो इससे पहले भी कई संत जेल गए है। खुद रामपाल पहले भी जेल जा चुके हैं। ऐसे में यह कोहराम क्यों है। समझ से परे है। रामपाल देश की कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं है। उनके समर्थक देश के कानून को माने। खबर आ रही है कि एक रामपाल को बचाने 8 लोगों की मौत हो चुकी है। एक आदमी को बचाने इतने लोगों की बली दिया जाना कितना न्यायोचित है। देश की न्यायालय ने उन्हें पेश होने कहा है। इसके बाद भी अगर वे उसकी अवहेलना कर रहे हैं तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी। ऐसे व्यक्ति को फिर भी संत कहा जाना कितना सही होगा। संत तो वह होता है जो न्याय कानून और ऐसे तमाम चिजों को माने ‘और लोगों को इस और जागरूक करे ताकि वे गलत कार्य न कर सके। यहां तो संत खुद कानून तो तोड़ ही रहे हैं अपने अनुनाईयों और समर्थकों से भी कानून तोडवा रहे है। यह गलत है और संत समाज को इसकी निंदा करनी ...

नसबंदी कांड के विरोध में शब्द नहीं चित्र

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नसबंदी कांड पर कुछ कार्टूनिस्टों ने कुछ ऐसे कार्टून बनाए। कुछ ने ऐसे स्लोगन के साथ विरोध किया। तो कुछ ने अपने पेट्स को अच्छे दिन आने की बात लाई। नसबंदी कांड बिलासपुर छत्तीसगढ़ के साथ ही देश के लिए बहुत ही बड़ी बात है। इसके बाद भी राज्य सरकार के अड़ियल रवैया से लोगों को कैसे आहत किया है यह इन चित्रों को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है।                                           नसबंदी कांड के बाद विरोध करने वालों ने कुछ इस प्रकार के तख्तिया और तरीके अपनाएं है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम दूसरा पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।  आपके केंद्रीय मंत्रीमंडल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन बिलासपुर के नसबंदी कांड के बाद से गायब है। अगर आपको मिलेें तो बोल दिजीएगा कि वे अब सिर्फ दिल्ली के नेता नहीं रहे। केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री का पद मिला है तो पूरे देश का स्वास्थ्य विभाग उनके अंदर में आता है। उन्होने जिस तरह से अपने कार्य में लापरवाही बरती है इससे तो यही लगता है कि आपके मंत्री मंडल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। छत्तीसगढ़ राज्य देश के लिए कोई अहमियत नहीं रखता। आदिवासी बहुल्य राज्य है इसके कारण आप और आपके मंत्री मंडल के लोग जैसे चाहेंगे वैसे करेंगे। शर्मनाक बात यह है कि नसबंदी जैसे महत्वपूर्ण योजना को जिस तरह से लापरवाही बरत कर घटिया बनाई जा रही है। इससे न सिर्फ भारत में जनसंख्या विस्फोट होगा बल्कि ग्लोबलाईजेश की आपकी सोच पर भी चोट है। इसका फायदा अमेरिकी कंपनियां उठाना शुरु कर दी है। एक समय था जब भारत दवाइयों के सप्लाई के लिए प्रसिद्ध था अब यहां की घटिया दवाई की चर्चा जब कि विश्व स्तर पर हो रहा है तो इसका दुष्प्रभाव क्या होगा आप से बेहतर कौन समझ सकता है। दुनिया भर में इस बात क...

नसबंदी कांड के बाद कांग्रेसी गायब हुए

नसबंदी कांड में कुछ दिन तो कांग्रेसी सक्रीय दिखे। इसके बाद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बड़े नेता जिस प्रकार गायब हुए है यह सोच का विषय बन गया है। राज्य में भाजपा और कांग्रेस जिस तरह से काम कर रही है। वह संतोषजनक नहीं है। यहां कांग्रेस सुस्त हैं और बीजेपी तंदरुस्त। कांग्रेसियों का हाल अभी ऐसा है जैसे वह सिप्रोसिन की गोली खा लिये हों। अगर यह नहीं है तो फिर हुआ क्या है इन कांग्रेसियों को क्यों इतनी मौत के बाद भी सरकार को बर्दाश्त कर रहे है। क्यों उनका विरोध नहीं कर रहे। वैसे तो विधानसभा में तोड़ फोड और दिल्ली में हंगामा कर डालते है। छत्तीसगढ़ आदिवासी अंचल है इस लिए दिल्ली में आवाज नहीं उठाई जा रही। ऐसा है तो कांग्रेसियों का दुर्भाग्य ही है। ऐसे मुद्दे पर जब चहुओर विरोध हो रहा है तो कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी राज्य में चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस से राज्य की आवाम यह जानना चाहती है कि कांग्रेस किस लाभ के कारण ऐसा नहीं कर रही है। कांग्रेस के नेताओं की राजनीतिक बचपन में ही नसबंदी तो नहीं कर दी गई। वे अपने राजनीतिक अपना पौरुष क्यों नहीं दिखा रहे। कुछ तो ऐसा हुआ है जिससे कांग्रेसी च...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पहला पत्र

लेख के शब्दों में दर्द है गुस्सा है। इसलिए इस लेख को लिखने का लहजा गलत हो सकता है। दुख और गुस्सा है तो स्वभाविक है कि उसे बयां करना न आया हो। मेरे शब्दों का चयन हो सकता है गलत हुआ होगा, लेकिन अगर यही घटना आपके घर पर होता तो शायद इन शब्दों से कहीं ज्यादा गलत लहजे का प्रयोग आप करते। लोगों के मन में जो गुस्सा है और जितनी गालियां वे दे रहे हैं राज्य की सरकार को उतना यहां लिखना संभव नहीं है।  अगर उन लोगों के दर्द को लिखूं तो किताबों में भी न समा पाए। यह एक लेख है इसमें आपको राज्य के बारे में यहां हो रही घटनाओं के बारे में बताया जा रहा है। ताकि आप भी उनके गुस्सा को जाने कि कितना गुस्सा होगा जिनके घर यह घटनाएँ हुई हैं। यहां व्यक्त किया गया दर्द राज्य के आवाम का है। यहां आपको बता दूं कि राज्य की आवाम राज्य में अब रमन सरकार नहीं चाहती। खासकर स्वास्थ्य मंत्री जो सिर्फ कुर्सी के लोभ में है जनता का दर्द दु:ख नहीं देखते और राज्य के मुखिया डॉ. रमन सिंह उनका साथ दे रहे हैं। उनके नाक के नीचे दवा कंपनी दवाईयों में चूहा मार जहर डाल कर लोगों को मार डाले हैं और सरकार ऐसे स्वास्थ्य मंत्री को बर्खाश्त...

नसबंदी: सिप्रोजिन 500 एमजी में चूहा मार जहर अब दोषी कौन है नेता जी

छत्तीसगढ़ में जहरीली दवा खाने से मरने वालों कि संख्या बढ़कर 17  हो गई है। इससे पहले न्यायधानी बिलासपुर में नसबंदी के बाद इस जहरीली दवा को खाने से 16 महिलाओं की मौत हो गई। नसबंदी में महिलाओं की मौत का जिम्मेदार मिल गया। यह कोई और नहीं नसबंदी के बाद शासन की ओर से बांटी गई जहरीली दवा सिप्रोसिन 500एमजी है।  इसकी पुष्टि करते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि  साइंस कॉलेज बिलासपुर की प्राथमिक जांच में पता चला है कि इसमें चूहा मार जहर है। इसमें चूहा मारने का जहर जिंक फास्फेट मिला है। हलांकि गहन चिकित्सा के बाद डॉक्टरों ने तेजी से हो रही मौतों का सिलसिला जरुर रोक लिया है। लेकिन इस दवा के प्रभाव से कई महिलाओं की किडनी फेल हो गई है। नसबंदी शिविर में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर आरके गुप्ता पर गैर इरादतन हत्या का जुर्म दर्ज कर इस मामले में जेल भेज दिया गया। साथ ही उनको और सीएमएचओ को बर्खास्त भी कर दिया गया है। अब जबकि महावर फॉर्मा दवा कंपनी की दवा में ही फॉल्ट निकल आया है तो इसके बाद क्या इस मामले के जिम्मेदार दोषियों पर कार्रवाई होगी। क्या सीएम डॉ. रमन सिंह,...

नसबंदी: क्या पता था कि परिवार को रोकने में जिंदगी ही रुक जाएगी

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में 8 नवंबर को नेमीचंद्र जैन अस्पताल में परिवार नियोजन के लिए लगाए गए शिविर में डॉ. आरके गुप्ता और टीम ने लेप्रोस्कोपिक विधि से 6 घंटे में 83 ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन कराने आई महिलाओं जिनमें से कुछ को जबरदस्ती लाया गया था तो कुछ को बहला फुसलाकर। कुछ ने अपने परिवार वृद्धि को बढ़ने से रोकने के लिए आई थी। पर इनमें से किसी को पता नहीं था कि यह ऑपरेशन उठाने का कदम उनकी जिंदगी ले लेगी। उन्हें यह कतई नहीं पता था कि परिवार रोकने जो कदम उठाई हैं इससे उनकी मौत हो जाएगी। वे अपने मासुमों को जिंदगी भर का गम दे जाएंगी। यह उनके जिंदगी का आखिरी सच होगा। नसबंदी शिविर में ऑपरेशन और दवाईयों में हुई गड़बड़ी के कारण लोगों के दिलों दिमाग में परिवार रोकने के लिए नसबंदी कराने नामक भूत बैठी भूत अब बाहर निकल गया। जब एक के बाद एक 15 महिलाओं ने दम तोड़ दिया। जो हादसा बिलासपुर में घटी है वह इन शिविरों में होने वाली लापरवाही और सरकारी महकमें की उदडंता है। सरकार में बैठे लोगों को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी थी और कड़ी सजा मिलनी थी पर ना तो इन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ा ...