नसबंदी कांड के बाद कांग्रेसी गायब हुए
नसबंदी कांड में कुछ दिन तो कांग्रेसी सक्रीय दिखे। इसके बाद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बड़े नेता जिस प्रकार गायब हुए है यह सोच का विषय बन गया है। राज्य में भाजपा और कांग्रेस जिस तरह से काम कर रही है। वह संतोषजनक नहीं है। यहां कांग्रेस सुस्त हैं और बीजेपी तंदरुस्त। कांग्रेसियों का हाल अभी ऐसा है जैसे वह सिप्रोसिन की गोली खा लिये हों। अगर यह नहीं है तो फिर हुआ क्या है इन कांग्रेसियों को क्यों इतनी मौत के बाद भी सरकार को बर्दाश्त कर रहे है। क्यों उनका विरोध नहीं कर रहे। वैसे तो विधानसभा में तोड़ फोड और दिल्ली में हंगामा कर डालते है। छत्तीसगढ़ आदिवासी अंचल है इस लिए दिल्ली में आवाज नहीं उठाई जा रही। ऐसा है तो कांग्रेसियों का दुर्भाग्य ही है। ऐसे मुद्दे पर जब चहुओर विरोध हो रहा है तो कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी राज्य में चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस से राज्य की आवाम यह जानना चाहती है कि कांग्रेस किस लाभ के कारण ऐसा नहीं कर रही है। कांग्रेस के नेताओं की राजनीतिक बचपन में ही नसबंदी तो नहीं कर दी गई। वे अपने राजनीतिक अपना पौरुष क्यों नहीं दिखा रहे। कुछ तो ऐसा हुआ है जिससे कांग्रेसी चुप्पी साधे हुए हैं। उनकी सक्रियता भंग हो गई है। इतना बड़ा कांड होता है और कांग्रेस मात्र एक या दो दिन विरोध करती है। यह विपक्ष की कार्यप्रणाली नहीं है। भाजपा के केंद्र में आते ही उन सभी कांग्रेसियों की नसबंदी कर दी गई क्या जो ज्यादा बोलते थे। ज्यादा विरोध करते थे। अब हुआ जो भी पर कुछ तो ऐसा है जिसके कारण इस घटना के बाद से ही विपक्ष ठंडा है। राज्य सरकार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की योजना को छत्तीसगढ में बट्टा बैठा रही है और कांग्रेस यहां ही नहीं दिल्ली में चुप है कैसे संभव है समझ नहीं आता। क्या कांग्रेस के सभी नेता को लकवा मार गया है। या फिर उनके मुंह सिल दिया गया। ऐसा नहीं है तो क्या हुआ है कि सरकार के नाक में दम नहीं की कांग्रेस ने। माना केंद्र में 44 की संख्या है पर राज्य में तो ठीक है। फिर ऐसा क्या हुआ है। वैेसे तो बहुत चिल्लाते हैं। लोगों का तो यह भी आरोप है कि राहुल गांधी के बिलासपुर के अमसेना भ्रमण के बाद प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश की सरकार के साथ समझौता कर लिया। लोग मरे तो मरे कोई दिक्कत नहीं है। अपन अपना काम बनाते हैं। कांग्रेस और भाजपा के लोग यहां अपना काम बनता भांड में जाए जनता के तर्ज पर काम कर रहे हैं।
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