नसबंदी: सिप्रोजिन 500 एमजी में चूहा मार जहर अब दोषी कौन है नेता जी
छत्तीसगढ़ में जहरीली दवा खाने से मरने वालों कि संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इससे पहले न्यायधानी बिलासपुर में नसबंदी के बाद इस जहरीली दवा को खाने से 16 महिलाओं की मौत हो गई। नसबंदी में महिलाओं की मौत का जिम्मेदार मिल गया। यह कोई और नहीं नसबंदी के बाद शासन की ओर से बांटी गई जहरीली दवा सिप्रोसिन 500एमजी है। इसकी पुष्टि करते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि साइंस कॉलेज बिलासपुर की प्राथमिक जांच में पता चला है कि इसमें चूहा मार जहर है। इसमें चूहा मारने का जहर जिंक फास्फेट मिला है। हलांकि गहन चिकित्सा के बाद डॉक्टरों ने तेजी से हो रही मौतों का सिलसिला जरुर रोक लिया है। लेकिन इस दवा के प्रभाव से कई महिलाओं की किडनी फेल हो गई है। नसबंदी शिविर में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर आरके गुप्ता पर गैर इरादतन हत्या का जुर्म दर्ज कर इस मामले में जेल भेज दिया गया। साथ ही उनको और सीएमएचओ को बर्खास्त भी कर दिया गया है। अब जबकि महावर फॉर्मा दवा कंपनी की दवा में ही फॉल्ट निकल आया है तो इसके बाद क्या इस मामले के जिम्मेदार दोषियों पर कार्रवाई होगी। क्या सीएम डॉ. रमन सिंह, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल इन मौतों की जिम्मेदारी लेंगे। अगर वे इन मौतों की जिम्मेदारी लेते हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देनी ही चाहिए। यह नसबंदी सिर्फ बिलासपुर में नहीं हुआ इसके बाद जांजगीर चांपा और अंबिकापुर से भी कई महिलाओं की तबीयत खराब होने का खुलासा हुआ है। अब तो इस मामले में दोषियों की संख्या भी बढ़नी ही चाहिए। मामले में जितना दोषी सर्जन डॉ. गुप्ता और सीएमएचओ डॉ. आरके भांगे हैं अब उतना ही जिम्मेदार स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य मंत्री और सीएम भी माने जाएंगे। साथ ही उस दवा कंपनी को क्या बख्शा जाएगा। जिसके कारण न जाने कितनी मौतें हो चुकी है। यहां तो गिनती में 16 हैं कब से यह जहरीली दवा बिक रही है इसको कोई नहीं जानता। महावर फार्मा नाम की कंपनी से स्वास्थ्य विभाग ने दवा खरीदी की है। लाखों दवाईयां जब्त कर नष्ट की जा रही हैं फिर भी लोगों की पहुंच से यह दवा अब भी दूर नहीं हुआ है। शासन ने एलर्ट जारी जरुर कर दिया है। लोगों में इसके लिए जागरूकता कैसे लाएंगे। लोगों को इससे दूर कैसे करेंगे और दुकानदारों के पास पड़े इस सिप्रोसिन प्रोडक्ट के स्टॉक को कैसे खत्म किया जाएगा यह भी सोच का विषय है। अभी तो किसी को यह भी पता नहीं है कि इस जहर को कब से बेचा जा रहा है। इसके साइड इफैक्ट से न जाने कितनी जानें जा चुकी हैं। कितनों का इस जहर के खाने से किडनी फेल हो गई और यह जहर जिसे दवा कंपनी और स्वास्थ्य विभाग दवा करार दे रही है कितने परिवारों का घर उजाड़ दिया चुका है। इस कथित दवा से कितने लोग मौत के मुंह में समा गए होंगे यह कैसे पता चलेगा। जबकि हमारे छत्तीसगड़ में दवा परिक्षण करने का अब तक लैब नहीं बन पाया है।
8 नवंबर को बिलासपुर के नेमीचंद्र जैन अस्पताल के साथ ही संभाग के कई जिलों और ब्लॉक मुख्यालयों में नसबंदी शिविर आयोजित की गई। एक दिन बाद 10 नवंबर को तखतपुर क्षेत्र के चिचिरदा निवासी जानकी बाई पति विद्या सागर 36 वर्ष जो पेंडरी के सरकारी शिविर में ऑपरेशन कराई थी की मौत हो गई। उसका पीएम किया गया जिसका रिपोर्ट 14 नवंबर को आया। इसमें गर्भाशय में दवाओं का दुष्प्रभाव पड़ने की बात सामने आई है।
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