संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पहला पत्र

लेख के शब्दों में दर्द है गुस्सा है। इसलिए इस लेख को लिखने का लहजा गलत हो सकता है। दुख और गुस्सा है तो स्वभाविक है कि उसे बयां करना न आया हो। मेरे शब्दों का चयन हो सकता है गलत हुआ होगा, लेकिन अगर यही घटना आपके घर पर होता तो शायद इन शब्दों से कहीं ज्यादा गलत लहजे का प्रयोग आप करते। लोगों के मन में जो गुस्सा है और जितनी गालियां वे दे रहे हैं राज्य की सरकार को उतना यहां लिखना संभव नहीं है।  अगर उन लोगों के दर्द को लिखूं तो किताबों में भी न समा पाए। यह एक लेख है इसमें आपको राज्य के बारे में यहां हो रही घटनाओं के बारे में बताया जा रहा है। ताकि आप भी उनके गुस्सा को जाने कि कितना गुस्सा होगा जिनके घर यह घटनाएँ हुई हैं। यहां व्यक्त किया गया दर्द राज्य के आवाम का है। यहां आपको बता दूं कि राज्य की आवाम राज्य में अब रमन सरकार नहीं चाहती। खासकर स्वास्थ्य मंत्री जो सिर्फ कुर्सी के लोभ में है जनता का दर्द दु:ख नहीं देखते और राज्य के मुखिया डॉ. रमन सिंह उनका साथ दे रहे हैं। उनके नाक के नीचे दवा कंपनी दवाईयों में चूहा मार जहर डाल कर लोगों को मार डाले हैं और सरकार ऐसे स्वास्थ्य मंत्री को बर्खाश्त...

नसबंदी: सिप्रोजिन 500 एमजी में चूहा मार जहर अब दोषी कौन है नेता जी

छत्तीसगढ़ में जहरीली दवा खाने से मरने वालों कि संख्या बढ़कर 17  हो गई है। इससे पहले न्यायधानी बिलासपुर में नसबंदी के बाद इस जहरीली दवा को खाने से 16 महिलाओं की मौत हो गई। नसबंदी में महिलाओं की मौत का जिम्मेदार मिल गया। यह कोई और नहीं नसबंदी के बाद शासन की ओर से बांटी गई जहरीली दवा सिप्रोसिन 500एमजी है।  इसकी पुष्टि करते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि  साइंस कॉलेज बिलासपुर की प्राथमिक जांच में पता चला है कि इसमें चूहा मार जहर है। इसमें चूहा मारने का जहर जिंक फास्फेट मिला है। हलांकि गहन चिकित्सा के बाद डॉक्टरों ने तेजी से हो रही मौतों का सिलसिला जरुर रोक लिया है। लेकिन इस दवा के प्रभाव से कई महिलाओं की किडनी फेल हो गई है। नसबंदी शिविर में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर आरके गुप्ता पर गैर इरादतन हत्या का जुर्म दर्ज कर इस मामले में जेल भेज दिया गया। साथ ही उनको और सीएमएचओ को बर्खास्त भी कर दिया गया है। अब जबकि महावर फॉर्मा दवा कंपनी की दवा में ही फॉल्ट निकल आया है तो इसके बाद क्या इस मामले के जिम्मेदार दोषियों पर कार्रवाई होगी। क्या सीएम डॉ. रमन सिंह,...

नसबंदी: क्या पता था कि परिवार को रोकने में जिंदगी ही रुक जाएगी

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में 8 नवंबर को नेमीचंद्र जैन अस्पताल में परिवार नियोजन के लिए लगाए गए शिविर में डॉ. आरके गुप्ता और टीम ने लेप्रोस्कोपिक विधि से 6 घंटे में 83 ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन कराने आई महिलाओं जिनमें से कुछ को जबरदस्ती लाया गया था तो कुछ को बहला फुसलाकर। कुछ ने अपने परिवार वृद्धि को बढ़ने से रोकने के लिए आई थी। पर इनमें से किसी को पता नहीं था कि यह ऑपरेशन उठाने का कदम उनकी जिंदगी ले लेगी। उन्हें यह कतई नहीं पता था कि परिवार रोकने जो कदम उठाई हैं इससे उनकी मौत हो जाएगी। वे अपने मासुमों को जिंदगी भर का गम दे जाएंगी। यह उनके जिंदगी का आखिरी सच होगा। नसबंदी शिविर में ऑपरेशन और दवाईयों में हुई गड़बड़ी के कारण लोगों के दिलों दिमाग में परिवार रोकने के लिए नसबंदी कराने नामक भूत बैठी भूत अब बाहर निकल गया। जब एक के बाद एक 15 महिलाओं ने दम तोड़ दिया। जो हादसा बिलासपुर में घटी है वह इन शिविरों में होने वाली लापरवाही और सरकारी महकमें की उदडंता है। सरकार में बैठे लोगों को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी थी और कड़ी सजा मिलनी थी पर ना तो इन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ा ...

आजादी दिखाने गजब का जोश है

देश के युवाओं में गजब जोश दिखा। सरे राह चुंबन करने में जो जोश दिखाया हमारे युवाओं ने वह बहुत बडी बात है। काश ऐसा ही जोश सड़क पर घुंमतु कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने में दिखाते। रोड पर जीवन यापन करने वाले मजबूर हैं उनकि मदद में देते। साथ ही इतना हीं वक्त उन लाखों लोगो को वक्त देते जो अनपढ़ हैं। बदहाल जीवन जीने मजबूर हैं को देते तो शायद दुनिया में हमारी पहंचान आज कुछ और होता और हमारी पहचान उनकी नजर में कुछ और होती। हम दुनिया में कहीं और होते। खैर देश आजाद है और सब विचार वान और बुद्धिमान है। सभी को अपना अधिकार मालूम है कर्तव्य से क्या लेना देना। कौन सा देश हमें कुछ दे रहा है कि हम कुछ दें। मुझे यह नहीं पता कि मेरे विचार सही हैं या नहीं। अपना विचार इस लिए रख रहा हूं क्योंकि मुझे लगा यह जो किया जा रहा है अपनी आजादी को दिखाने के लिए वह सही हरकत नहीं है। कई लोगों का इस विचार को पढ़ने के बाद यह भी विचार आया कि इसे मौका नहीं मिला इस लिए यह यहां पर लोगों को अपने विचार से मतांतर कर रहा है। मेरी बातों पर लोगों को यह भी लगेगा कि इसे मौका मिला होता तो यह भी वहीं हरकत करता जो दिल्ली में...

तोड़ दो दीवार कर लो विकास यही लहर भी है और मांग भी

चित्र
आज के ही दिन 25 साल पहले 9 नवंबर 1989 को जर्मनी ने एक दीवार तोड़ी थी जिसका नाम था बर्लिन की दीवार। दीवार तोड़ने के बाद जर्मनी का जो विकास हुआ वह दिखता है। उसकी अर्थव्यवस्था से दुनिया भर में उसका नाम है। उसके समान आज दुनिया के कोने-कोने में बिक रहे हैं। आप को बता दूं कि यह बर्लिन की दीवार पश्चिम और पूर्वी जर्मनी के बीच 13 अगस्त 1961 में बनाई गई। क्योंकि पूर्वी जर्मनी के लोग ज्यादा पैसे कमाने पश्चिम जर्मनी जाते थे। 28 साल तक यह दीवार बनी रही, और अंतत: जब समझ आया कि आर्थिक तंगी और गरीबी की वजह क्या है तो इस 155 किलोमीटर लंबी, 11 हजार सौनिको की रखवाली 302 ऑब्जर्वेशन टावर, इलेक्ट्रिकल वायर फैंसिंग, 20 बंकर और 127 किमी की फैंसिंग से सुरक्षित इस कंक्रीट की दीवार को तोड़ दिया गया सिर्फ विकास और विकास के लिए। और इस दीवार को तोड़ने के बाद दुनिया में सबसे कमजोर देश बन चुके जर्मनी की हालत आज दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार निर्माता,  बीएमडब्ल्यू, ऑडी, मर्सेडीज बैंज, एडिडास, प्यूमा उसकी पहचान है। दोनों देश एक होकर आज अर्थव्यवस्था में मशीनरी व्हीकल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया है। ...

मनमोहन को जापान का सर्वोच्च सम्मान मिला

देश के युवाओं में गजब जोश दिखा। सरे राह चुंबन करने में जो जोश दिखाया हमारे युवाओं ने वह बहुत बडी बात है। काश ऐसा ही जोश सड़क पर घुंमतु कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने में दिखाते। रोड पर जीवन यापन करने वाले मजबूर हैं उनकि मदद में देते। साथ ही इतना हीं वक्त उन लाखों लोगो को वक्त देते जो अनपढ़ हैं। बदहाल जीवन जीने मजबूर हैं को देते तो शायद दुनिया में हमारी पहंचान आज कुछ और होता और हमारी पहचान उनकी नजर में कुछ और होती। हम दुनिया में कहीं और होते। खैर देश आजाद है और सब विचार वान और बुद्धिमान है। सभी को अपना अधिकार मालूम है कर्तव्य से क्या लेना देना। कौन सा देश हमें कुछ दे रहा है कि हम कुछ दें। मुझे यह नहीं पता कि मेरे विचार सही हैं या नहीं। अपना विचार इस लिए रख रहा हूं क्योंकि मुझे लगा यह जो किया जा रहा है अपनी आजादी को दिखाने के लिए वह सही हरकत नहीं है। कई लोगों का इस विचार को पढ़ने के बाद यह भी विचार आया कि इसे मौका नहीं मिला इस लिए यह यहां पर लोगों को अपने विचार से मतांतर कर रहा है। मेरी बातों पर लोगों को यह भी लगेगा कि इसे मौका मिला होता तो यह भी वहीं हरकत करता जो दिल्ली में...

इमानदार...होने का मलाल है

एक सड़क छाप इमानदार ने लिखा है... हतोत्साहित हो जाता हूं यह देखकर मैं कि आज भी सड़क पर हूं अपनी इमानदारी के कारण। जो लोग सड़क पर थे कल तक वे आज आसमानी सफर कर रहे हैं। मैं सड़क पर चलता भी हूं तो डर लगता है़। इन जर्जर सड़क की कहीं गिट्‌टी छिटककर लग ना जाए। गरीब हूं इसका मलाल नहीं मुझे। मलाल यह भी नहीं है कि उनकी उचे लोगों से पटती है। मुझे जलन भी नहीं है उनकी कमाई को देखकर। उंचे लोग कैसे बनूं यह राज नहीं जानता बस इतना सा मलाल है। मेरे दिल मे हैं चुभन इस बात की कि तरक्की मैं नहीं कर पाया पूरी मेहनत करके। मैने हमेसा मुल्याकंन भी किया इमानदारी के राह पर चलकर। हां कई बार इमानदारी लोगों ने खरीदने के लिए दाम जरुर लगाए पर दाम क्या करता इसलिए उसे बेंचा नहीं। खुलकर कहता हूं कि मैं अपनी इमानदारी को बेंच नहीं पाया शायद यह गलती हुई है मुझसे। फिर खयाल आया मुझे कुछ तो ऐसा बदलाव उन्होंने भी किया जरुर होगा। जिससे आज वे अमीर है और हम गरीब। चुभती है हमेशा एक बात दिल में कि वे रोटी खाने के लिए वक्त को तरसते हैं और हम हर वक्त रोटी को तरसते हैं। फिर दिल को सुकुन आता है मुझे की मैं कल भी मरा हुआ सा था...

पुस्तकालयों की घटती संख्या और हम

चित्र
दीपेंद्र की कलम से... क्या है? क्यों है, क्या हुआ था? कैसे हुआ था? और आने वाले समय में उससे क्या उम्मीदें होती। इन सारे सवालों के जवाब इतिहास से हीं मिलते हैं। यह इतिहास हमें कहां से मिलता है या तो दादा दादी की कहानियों में या फिर पुस्तकों में। अब एकल परिवारवाद जोरों पर है तो कोई भी अब अपने मां बाप के साथ नहीं रहता। जब वह साथ नहीं रहता तो बच्चे अपने दादा दादी से दूर होंगे। इतिहास तो बच्चों को पता नहीं चलेगा। बच्चे कैसे जाने की इतिहास क्या है। इसके लिए पुस्तक है जो बताती हैं कि इतिहास क्या है? वर्तमान में जो हम देख रहे हैं वह इतिहास की देन है और जो वर्तमान है वह भविष्य है। अब ऐ पुस्तकें कहां मिलेंगी जिससे इतिहास की जानकारी हो तो फिर याद आता है कि पुस्तकों को संग्रह किया जाता रहा है पुराने समय से यह प्रक्रिया चलती आ रही है। राजा रानी सभी की कहानियां और इतिहास इसी से तो पता चलता है कि कौन सा राजा कैसा था और वह अपनी रानी और प्रजा के साथ कैसे रहता था। जानकारी देने वाली यह पुरानी पुस्तकें मिलेगी कहा से जब यह बात याद आती है तो हम संग्रहालय की तरफ रूख करते हैं कि पुस्तक वहां ...

अंधविश्वास की भी हद होती है

आजादी के बाद से लोगों में लगातार शिक्षा और रहन सहन में बदलाव हुआ है। लगातार लोग जागरुक और जानकार होते गए। उच्च शिक्षा देश में मिलने लगी तो यहां के कई नामचीन संस्थाओं के दुनिया में नाम हो गए। भारत के लोगो का नाम दुनिया भर में फैल गया इसलिए की यहां के लोग संस्कार वान होते है। बहुत ही बुद्धिमान होते हैं। लेकिन जब सुनता हूं की तांत्रिक के विश्वास में आकर मां ने अपने बेटे को, पड़ोसी ने पड़ोसी के बच्चे को, सांप न काटे इसके लिए मंंत्र तंत्र के बाद प्रसाद खाने से, और टोनही होने के शक में किसी की हत्या कर दी जाती है कि इससे अच्छा तो गुलामी था। कम से कम लोगों में यह अंधविश्वास तो नहीं था। तंत्र मंत्र होना चाहिए पर इस तरह नहीं कि जो वैज्ञानिक मान्यता को और सांस्कृतिक मान्यता को शर्मशार कर दे। कुछ दिन पहले दो समाचारों ने मन को बहुत आघात पहुंचाया। दोनों ही मामला छत्तीसगढ़ राज्य का है। ‌वैसे तो बहुत सारे समाज सेवी यहां काम कर रहे है। समाज सेवी संस्थाएं काम कर रही है पर यहां कुछ ज्यादा ही टोनही होने पर अपराध होने की घटनाए होती है। कुछ दिन पहले कि ही बात है यहां के छत्तीसगढ़ के बेलतरा की घटना दिल दहला द...

जब डूबते सूर्य को नमस्कार करते हैं

एक कहावत है ना कि डूबते सूर्य को कोई नमस्कार नहीं करता। ऐसा नहीं है हिंदूओं का छठ एक मात्र ऐसा त्योहार है जिसमें डूबते सूर्य को भी नमस्कार किया जाता है। यह दिवाली से छठे दिन अर्थात षष्ठी तिथि को पड़ता है। इस दिन डूबते सूर्य को और दूसरे दिन उदय होते सूर्य को नमस्कार किया जाता है। दिवाली त्योहार के छठवे दिन सूर्य पूजा का अपना महत्व है। धन धान्य देने वाले इस त्योहार की पूर्वोत्तर भारत में बड़ी धूम होती है। लोग इसे बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास से मनाते है। इसका केंद्र हलांकि बिहार को माना जाता है, पर अब यह अन्य राज्यों और देशों में भी फैल गया है। बिहार के छठ पूजन करने वाले लोग वहां भी इसे मनाने लगे हैं। त्योहार में लोग बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा पाठ करते है। इसमें शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता है। उपवास रखते हैं और धन धान्य, संतान के लिए सूर्य देव के साथ छठ माता की पूजा करते हैं, कामना करते हैं। डूबते और उगते दोनों सूर्य को नमस्कार किया जाता है। लद गए वो दिन कब किसका वक्त बदल जाए कहा नहीं जा सकता। जानते हैं सूर्योपासना के बारे में छठ कार...