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कुकुरमुत्ते की तरह न उगे आईअईटी और आईआईएम...

संसद के बजट में जिस तरह आईआईटी और आईआईएम की घोषणा हुई है इससे इस पढ़ाई का मान गिरेगा। पहले चिकित्सा और इंजीनियरिंग का बहुत मान था पर हर जगह खुले मेडिकल और इंजिनियरिंग कॉलेज के कारण स्थिति सबके सामने है। कहीं यही हाल इस प्रोफेशनल कोर्स का न हो जाए सरकार इस ओर ध्यान दे नहीं तो आने वाले समय में कुकुरमुत्ते की तरह ये संस्थाएं उग आएगीं और स्थिति बड़ा भयावह होगा। आज खड़गपुर, अहमदाबाद और दिल्ली आईआईएम का नाम है दुनिया भर में पर अगर यही संस्थाएं लगातार खुली तो इसका मान कम हो जाएगा। सरकार को इन संस्थाओं का मान बनाए रखना चाहिए। जिस तरह रोल्स रॉयल का अपना क्रेज है उसी प्रकार आईआईएम का अपना मान है और उसमें पड़ने के लिए उसी प्रकार की योग्यता होनी चाहिए जिस प्रकार रोल्स रॉयल को खरीदने के लिए राजा होना या उसका बंसज होना अनिवार्य होता है। आईआईएम में एडमिशन उन्हीं को मिलता है जो उस लेबल का टेस्ट फाईट करता है। अमेरिका और ब्रिटेन के विश्वविद्यालय ऐसे हैं जिनकी शाखाएं नहीं खुली इससे उनकी मान तो बनी ही रही साथ ही आज उनका वर्चस्व भी बना हुआ है। शाखा बड़ाने से सुविधाएं बड़ जाती है पर कंपटीशन कम होने से उसका...

कॉमन वेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा

कॉमन वेल्थ गेम्स (cwg) में इस बार भारत का प्रदर्शन अच्छा है। हमारे खिलाड़ी लगातार जीत रहे हैं। उससे भी अच्छा यह है कि वर्तमान में हमरा हर खेल पर पर्दर्शन बेहतर रहा है। हम कुछ खेलों में हारे भी हैं पर निराश होने की जरुरत नहीं है। खेलने वाले ही हारते है।  इस बार अब तक स्वर्ण, रजत और कास्य हमने खुब जीता और अच्छे प्रदर्शन से देश के लोगों का दिल भी। हमारे खिलाड़ी कई खेलों में भाग ले रहे हैं कई के खिलाड़ी अब तक हमारे देश में तैयार नहीं हो पाए है कि वे कॉमन वेल्थ गेम्स में खेल सके। सरकार  हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि ऐसे खिलाड़ियों का मान बढ़ाए और उन्हें प्रोत्साहित करें ताकि वे भी देश के लिए खेल सके। सिर्फ देश के लिए खेल न सके बल्कि देश का नाम रोशन करें और उनका बेहतर प्रदर्शन देखकर दूसरे खिलाड़ी और उनके मां बाप भी इसपर ध्यान दे सकेंगे और प्रोत्साहित होंगे। एक बात हम सभ को बचपन से सुनने को मिलता है पड़ोगे लिखोगे होगे नवाब खेलोगे कूदोगे होगे खराब। लेकिन अब यह अवधारना खत्म हो रही है न सिर्फ खत्म हो रही है बल्कि बहुत तेजी से लोग समझ रहे हैं कि अपने बच्चे की प्रतिभा को निखारें यह खेल ...

अघोषित युद्ध पर रोक लगना चाहिए...वरना बे मौत मरेंगे दुनिया वाले

दुनिया में अघोषित युद्ध चल रहा है. जहां देखो बस बम बरस रहे है। लोग मारे जा रहे है और लगातार मारे जा रहे है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 50 सालों तक तो शांति रही पर अब लगता है जैसे तृतीय विश्वयुद्ध छीड़ चुका है जल्द अगर इस पर रोक नहीं लगा तो बहुत जल्द पुरी दुनिया तबाह हो जाएगी। िइसका एक मात्र कारण मानव द्वारा निर्मित परमाणु हथियार होंगे जो कहीं न कहीं हमारी तबाही का कारण बनेगा। इस युद्ध में वे लोग मारे जा रहे हैं जो बेचारे बेकसुर है और आने वाले समय में भी वही लोग पहले मारे जाएगें जो बेकसुर होंगे। इसका उदाहरण हम द्वितीय विश्व युद्ध से ले सकते है हिटलर मरा पर उससे पहले लाखों लोग मारे गये जो बेचारे बेकसुर थे। अगर दुनिया के लोग नहीं सुधरे तो आने वाले समय में और भी भयावह स्थिति होगी।

मीडिया के रंग बदलने से गिरगिट है परेशान

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मीडिया के रंग बदलने से गिरगिट है परेशान   12 मई को चुनाव सर्वेझण की रिपोर्ट आने और उसमें नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजग को पूर्ण बहुमत मिलने की खबर का खुलासा होने के बाद मीडिया ने जिस तरह रंग बदला है उससे गिरगिट भी परेशान है। 16 मई को चुनाव परिणाम जब आया तो हर मीडिया का मुंह बंद हो गया जो कभी गोधरा कांड तो कभी गुजरात दंगे को बड़े जोरों से उठाया करते थे। कुछ दिनों से अख़बारों में भी पढ़ने को मिल रहा है कि नरेन्द्र मोदी अच्छा काम कर रहे हैं। मीडिया की इस हरकत ने गर्मी के मौसम में हरा, लाल, काला, पीला अपनी इच्छा से रंग बदलने वाला गिरगिट परेशान है वह समझ नहीं पा रहा की क्या करे। गिरगिट इतना अधिक परेशान हो गया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से अज्ञात वास पर चला गया है।  हलांकि छिपकलियों का राज हो गया है। गिरगिट विलुप्त होता जा रहा है मीडिया की भूमिका देख कर। कुछ दिनों से समाचार पत्रों में बड़े लेखक जो अक्सर मोदी की खिचाई करते रहते थे वे भी अब उनके पक्ष में लेख लिख रहे है आश्यर्य की बात है कि वे अपनी मानसिकता कैसे परिवर्तित कर लिए जबकि वे अक्सर मोदी विरोधी रह...

बंद हो देश का और विभाजन

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बंद हो देश का और विभाजन  1947 में आजादी के दौरान देश ने विभाजन का जो दंश झेला और उस समय लगी जख़्मे आज तक भरी नहीं हैं। समय-समय पर काश्मीर का यहां पर मैं जिक्र नहीं करना चाहता। मैं तो यहां यह कहना चाहता हूं कि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने जो एक भारत नेक भारत का सपना देखा था वह साकार न हो सका। आजादी के समय से शुरु हुए देश का बटवारा आज तलक तक जारी है. पाकिस्तान बंटवारा शुरु हुई यह कहानी अनवरत जारी है । दुःख इस बात का होता है कि इतनी सरकारें आई और गई पर भारत को एक देश एक शक्ती शाली देश, एक विकसीत देश नहीं बना पाई। विकास के लिए सिर्फ देश का विभाजन किया जाता रहा। हाल में ही देश का एक और विभाजन किया गया। जिसका नाम तेलंगाना रखा गया। भाषा, धर्म, जाति के नाम पर लगातार इस तरह के विभाजन जारी हैं और अनवरत जारी रहेंगे। भारत का विभाजन कर राज्य पर राज्य बनाए जा रहे हैं मुख्यमंत्रियों को नियुक्त किया जा रही है...क्या इससे सचमुच देश का भला हो रहा जनता इससे कितना खुश है। इन बातों का कोई मतलब भी है या सिर्फ सत्ता के लिए देश का विभाजन हो रहा है। बतौर उदाहरण यहां पर मैं बात करना चाहता हूं झारखंड...

जान अब भी बाकी है

छोड़ ताम झाम को मैं निकला घर से क्योंकि मुझमे अब भी जान बाकी है क्या बताऊं दोस्तों की मुझमें प्राण बाकी है..........
मैं बहुत थक गया हुं मुझे कुछ नहीं कहना है मैं हार गया दुनिया से मुझे अब चुप रहना है सोच लिया इस दुनिया में करना नहीं है नाम मुझे नाम कमाने वाले अक्सर बदनाम हुआ करते हैं हां कोई मेरे सामने कोई मुझे कुछ नहीं कहेगा यह पता है पर पीठ पिछे जो मेरी तारिफ करेगा वह क्या कम होगा इसलिए मैं कुछ नही कहुंगा मुझे कुछ नहीं कहना है......