भारतीय विधि के परिषद द्वारा आयोजित होने वाली अखिल भारतीय बार परीक्षाएं (AIBE-XIX) की तारीख की घोषणा हो चुकी है। यह परीक्षा वकील बनने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए बर काउंसिल ने नोटिफिकेशन जारी कर सिलसिलेवार तारीखों की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ के उम्मीदवार रायपुर और बिलासपुर में एग्जाम दे सकते हैं। भारतीय विधिज्ञ परिषद (BAR COUNCIL OF INDIA) के तरफ से 3 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन में ऐसे उम्मीदवारों को अपील की गई है जो वकालत की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और अब वकील बनकर प्रेक्टिस करना चाहते हैं। बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने अपने नोटिफिकेशन में लिखा है कि ऐसे उम्मीदवार एआईबीई - XIX की परीक्षा के तारीख 24 नवंबर 2024 को तय की गई है। इसके लिए कैंडिडेट ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 3 सितंबर से कर सकते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ ही ऑनलाइन पेमेंट भी करना होगा 25 अक्टूबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है जबकि पेमेंट की अंतिम तारीख 28 अक्टूबर तय की गई है। वही फार्म में हुई गलतियों को सुधारने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर तय है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि एडमिट कार्ड 18 नवंबर तक ज...
दीपेंद्र की कलम से... क्या है? क्यों है, क्या हुआ था? कैसे हुआ था? और आने वाले समय में उससे क्या उम्मीदें होती। इन सारे सवालों के जवाब इतिहास से हीं मिलते हैं। यह इतिहास हमें कहां से मिलता है या तो दादा दादी की कहानियों में या फिर पुस्तकों में। अब एकल परिवारवाद जोरों पर है तो कोई भी अब अपने मां बाप के साथ नहीं रहता। जब वह साथ नहीं रहता तो बच्चे अपने दादा दादी से दूर होंगे। इतिहास तो बच्चों को पता नहीं चलेगा। बच्चे कैसे जाने की इतिहास क्या है। इसके लिए पुस्तक है जो बताती हैं कि इतिहास क्या है? वर्तमान में जो हम देख रहे हैं वह इतिहास की देन है और जो वर्तमान है वह भविष्य है। अब ऐ पुस्तकें कहां मिलेंगी जिससे इतिहास की जानकारी हो तो फिर याद आता है कि पुस्तकों को संग्रह किया जाता रहा है पुराने समय से यह प्रक्रिया चलती आ रही है। राजा रानी सभी की कहानियां और इतिहास इसी से तो पता चलता है कि कौन सा राजा कैसा था और वह अपनी रानी और प्रजा के साथ कैसे रहता था। जानकारी देने वाली यह पुरानी पुस्तकें मिलेगी कहा से जब यह बात याद आती है तो हम संग्रहालय की तरफ रूख करते हैं कि पुस्तक वहां ...
लाल-पीली मिट्टी राज्य के लगभग 55% भाग पर इस प्रकार की मिट्टी का विस्तार है। यह छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक भू-भाग में पाई जाने वाली मिट्टी है। लाल-पीली मिट्टी का निर्माण मुख्यतः गोंडवाना चट्टानों से हुआ है। इसमें पी-एच. मान 5.5% से 8.5% तक होता है। इसमें धान, ज्वार, बाजारा, एवं दालों की खेती की जा सकती है। लाल रेतीली मिट्टी छत्तीसगढ़ में लाल रेतीली मिट्टी का क्षेत्र के अनुसार विस्तार दूसरे क्रम में है, जो प्रदेश के लगभग 30% क्षेत्र में मिलती है। इस मिट्टी के रवे महीन एवं रेतीले होते है। इसकी उर्वरता कम होती है। रेत की अधिकता के कारण इस मिट्टी में जल रोकने की क्षमता कम होती है। इस मिट्टी में मोटे अनाज जैसे- कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, आलू आदि की खेती की जा सकती है। लाल दोमट मिट्टी यह मिट्टी राज्य के लगभग 10 भाग में पाई जाती है। क्ले युक्त इस मिट्टी में लौह युक्त शैलों का अंश अधिक होने से इनका रंग ईंठ के समान लाल होता है। इसका पी-एच. मान 6.6% तक होता है। इस मिट्टी में आर्द्रता ग्रहण करने की शक्ति बहुत कम होने के कारण सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। यह मिट्टी धान एवं मोटे...
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