कॉमन वेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा

कॉमन वेल्थ गेम्स (cwg) में इस बार भारत का प्रदर्शन अच्छा है। हमारे खिलाड़ी लगातार जीत रहे हैं। उससे भी अच्छा यह है कि वर्तमान में हमरा हर खेल पर पर्दर्शन बेहतर रहा है। हम कुछ खेलों में हारे भी हैं पर निराश होने की जरुरत नहीं है। खेलने वाले ही हारते है।  इस बार अब तक स्वर्ण, रजत और कास्य हमने खुब जीता और अच्छे प्रदर्शन से देश के लोगों का दिल भी। हमारे खिलाड़ी कई खेलों में भाग ले रहे हैं कई के खिलाड़ी अब तक हमारे देश में तैयार नहीं हो पाए है कि वे कॉमन वेल्थ गेम्स में खेल सके। सरकार  हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि ऐसे खिलाड़ियों का मान बढ़ाए और उन्हें प्रोत्साहित करें ताकि वे भी देश के लिए खेल सके। सिर्फ देश के लिए खेल न सके बल्कि देश का नाम रोशन करें और उनका बेहतर प्रदर्शन देखकर दूसरे खिलाड़ी और उनके मां बाप भी इसपर ध्यान दे सकेंगे और प्रोत्साहित होंगे। एक बात हम सभ को बचपन से सुनने को मिलता है पड़ोगे लिखोगे होगे नवाब खेलोगे कूदोगे होगे खराब। लेकिन अब यह अवधारना खत्म हो रही है न सिर्फ खत्म हो रही है बल्कि बहुत तेजी से लोग समझ रहे हैं कि अपने बच्चे की प्रतिभा को निखारें यह खेल हो आवश्यक नहीं नाच, गान के अलावा मिमेकरी, लेखन और कई क्षेत्र में अपने बच्चे को भेज रहे हैं, और भेजना भी चाहिए। हम कुछ ऐसे लोगों को भी हमेशा पड़ते है सुनते जो हटकर काम किया है। खास कर चेतन भगत और युवा कवि कुमार विश्वास ये लोग ऐसे है जिनका क्षेत्र इंजिनियरिंग या फिर मैनेजमेंट रहा है पर आज अच्छे लेखक हैं, कवि हैं। इसी तरह कई और उदाहरण हमारे पास मिल जाएंगे जो दूसरे क्षेत्र में थे उनकी योग्यता कहीं और थी रुक्षान कहीं और था उन्होंने चैलेंज लिया और अपना नाम कमाया। हमारे देश में खेल को हमेशा से उपेक्षित किया जाता रहा है। बच्चे आज खेलने के बजाय टीवी पर कार्टून देखने में ज्यादा समय बीता रहे है जो आने वाले समय में घातक होगा। जिस उम्र में उन्हें जो काम करना चाहिए  वे कर नहीं रहे। कार्टून देखना चाहिए पर खेलने से बच्चों के शरीर का विकास होता है। आज भारत में कई सौ करोड़ का मार्केट है कार्टून और एनिमेशन का ।

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