Unity Utsav-One Voice, One Nation: पूर्वोत्तर भारत की समृद्धि और शांति की नई पहचान

Unity Utsav-One Voice, One Nation: पूर्वोत्तर भारत की समृद्धि और शांति की नई पहचान

नई दिल्ली में असम राइफल्स द्वारा आयोजित 'Unity Utsav-One Voice, One Nation' का आयोजन भव्य रूप से किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर असम राइफल्स के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। इस समारोह ने पूर्वोत्तर की एकता, सांस्कृतिक विविधता और विकास की दिशा में किए गए प्रयासों को उजागर किया।




नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी और विकास

कई दशकों तक पूर्वोत्तर भारत और दिल्ली के बीच भौगोलिक और भावनात्मक दूरी बनी रही। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस दूरी को कम करने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। 2027 तक नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्य रेल और हवाई कनेक्टिविटी से दिल्ली से सीधे जुड़ जाएंगे। इस पहल से न केवल आवागमन में सुविधा होगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन से तकनीक तक – नए अवसर

मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए हर क्षेत्र में अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। पर्यटन, तकनीक, खेल, अंतरिक्ष, कृषि, उद्यमिता और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा किए गए हैं। इन पहलों ने पूर्वोत्तर को न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध किया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से भी जोड़ा है।

शांति स्थापना की दिशा में बड़ा कदम

पिछले वर्षों में नॉर्थ ईस्ट में हिंसा की घटनाओं में 70% और नागरिकों की मृत्यु दर में 85% की कमी आई है। यह स्पष्ट संकेत है कि अब यह क्षेत्र शांति और विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। 2014 से अब तक 10,500 से अधिक उग्रवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और 2019 से 2024 के बीच 12 शांति समझौते किए गए हैं। यह दर्शाता है कि पूर्वोत्तर में अब स्थिरता और विश्वास का माहौल बन रहा है।

पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक समृद्धि

पूर्वोत्तर भारत में 220 से अधिक जातीय समूह, 160 से अधिक जनजातियां, 200 से अधिक भाषाएं और बोलियां, 50 से अधिक अनोखे उत्सव, 30 पारंपरिक नृत्य और 100 से अधिक विशिष्ट व्यंजन मौजूद हैं। यह क्षेत्र भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनमोल खजाना है। यूनिटी उत्सव के माध्यम से इन सभी विशेषताओं को दिल्ली में प्रदर्शित किया गया, जिससे पूरे भारत को इसकी समृद्ध परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला।

असम राइफल्स – पूर्वोत्तर का सच्चा मित्र

असम राइफल्स को पूर्वोत्तर का सबसे विश्वसनीय सुरक्षा बल माना जाता है। इसने दशकों से इस क्षेत्र को विभिन्न संकटों से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस आयोजन के माध्यम से असम राइफल्स ने पूर्वोत्तर की एकता और सांस्कृतिक ताकत को पूरे देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

खेलों में पूर्वोत्तर की भूमिका

पूर्वोत्तर भारत हमेशा से खेल प्रतिभाओं का केंद्र रहा है। इस आयोजन में खेल स्पर्धाओं में 212 टीमों और 1500 छात्रों ने भाग लिया, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 150 से अधिक छात्रों ने अपनी प्रस्तुति दी। अधिकतर इनाम मणिपुर के खिलाड़ियों के हिस्से में आए, जो इस क्षेत्र में खेलों की लोकप्रियता को दर्शाता है। इसी कारण मणिपुर में भारत की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित की गई है। 2036 के ओलंपिक में भारत का लक्ष्य टॉप 10 में शामिल होना है, और इसमें पूर्वोत्तर की भूमिका अहम होगी।

पूर्वोत्तर – भारत की आत्मा

भारत के बिना पूर्वोत्तर अधूरा है और पूर्वोत्तर के बिना भारत। यह क्षेत्र न केवल अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी भागीदारी देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र को 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में परिभाषित किया है, जो इसकी आर्थिक और सामाजिक समृद्धि को दर्शाता है।

शांति और विकास की नई राह

पूर्वोत्तर भारत अब केवल शांति ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि की ओर भी बढ़ रहा है। हिंसा में कमी, कनेक्टिविटी में सुधार और नए अवसरों के सृजन से यह क्षेत्र भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अब समय आ गया है कि भारत के अन्य राज्य भी इस क्षेत्र को अपने विकास का अभिन्न अंग मानें और इसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त करें।


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