बलौदाबाजार हिंसा मामले में विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

बलौदाबाजार हिंसा मामले में जेल में बंद भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। 17 अगस्त 2024 से रायपुर जेल में बंद यादव के समर्थकों में इस फैसले के बाद खुशी की लहर है। उनकी रिहाई संभवतः कल शाम तक हो सकती है।






जमानत के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे न्याय की जीत बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा, "सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी षड्यंत्र में जेल में बंद विधायक देवेंद्र यादव को जमानत दे दी है। यह सत्य की जीत और सरकारी षड्यंत्र की हार है। आने वाले समय में यह साबित हो जाएगा कि सरकार ने उन्हें गलत तरीके से महीनों जेल में रखा।"

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने भी विधायक देवेंद्र यादव को बधाई देते हुए कहा, "यह मामला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित था। सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के कारण देवेंद्र यादव को फंसाया, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई। देवेंद्र यादव जनता के हित में लगातार लड़ते रहे हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे।"

क्या था पूरा मामला?

10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में सतनामी समाज के धरना प्रदर्शन के बाद हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। यह विरोध प्रदर्शन 15-16 मई की रात महकोनी के अमरगुफा में स्थित जैतखाम को तोड़े जाने की घटना के बाद हुआ था। इस प्रदर्शन में देशभर से सतनाम पंथ के अनुयायी शामिल हुए थे। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाई, जिससे प्रशासनिक भवनों को भारी नुकसान हुआ।


इस घटना में बलौदाबाजार कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, तहसील कार्यालय समेत कई सरकारी दफ्तरों में आगजनी हुई। लगभग 200 वाहन जलकर खाक हो गए, जबकि एसपी कार्यालय पूरी तरह जल गया था। अनुमान के मुताबिक, इस हिंसा से कुल 12 करोड़ 53 लाख रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।


अब तक की कार्रवाई


पुलिस ने इस मामले में 187 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कुछ को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट से नारायण मिरि  को जमानत मिली थी, फिर हाईकोर्ट से कुछ अन्य आरोपियों को राहत मिली। अब सुप्रीम कोर्ट से विधायक देवेंद्र यादव को भी जमानत मिल गई है।


कांग्रेस इस घटना को लेकर लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर अपने नेताओं को बचाने और राजनीतिक बदले की भावना से कांग्रेस नेताओं को फंसाने का आरोप लगाया था।


इस मामले की जांच के लिए जस्टिस सीबी बाजपेई की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसका कार्यकाल हाल ही में चार महीने के लिए बढ़ाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए और उन असली दोषियों को सजा दिलानी चाहिए जिन्होंने हिंसा भड़काई थी।


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