धान उठाव में सुस्ती: 80% से कम उठाव करने वाले मिलरों पर पेनाल्टी

धान खरीदी के बाद जिले में धान उठाव को लेकर लापरवाही सामने आई है। बलौदा बाजार में ऐसे 19 राइस मिलर्स पर पेनाल्टी लगाई गई है, जिन्होंने जारी डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) में 80% से कम उठाव किया। कलेक्टर दीपक सोनी ने इसे गंभीरता से लेते हुए मिलरों और परिवहनकर्ताओं को समय-सीमा में दायित्व पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।


उठाव में देरी पर प्रशासन सख्त

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद उपार्जन केंद्रों से धान उठाने के लिए मिलर्स को डीओ जारी किया गया था। इसके बावजूद, कुछ मिलर्स समय पर धान नहीं उठा रहे हैं, जिससे उपार्जन केंद्रों में धान भंडारण की समस्या बढ़ रही है। कलेक्टर ने इस लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए 19 मिलरों के खिलाफ पेनाल्टी का फैसला किया है।

धान उठाव की स्थिति

बलौदा बाजार जिले में कुल 855396.64 मेट्रिक टन धान उपार्जित हुआ है। अब तक 323579 मेट्रिक टन परिवहनकर्ताओं ने और 412618 मेट्रिक टन मिलर्स ने उठाया है। लेकिन 119199 मेट्रिक टन धान अभी भी उपार्जन केंद्रों में पड़ा हुआ है।

मिलर्स को 392862 मेट्रिक टन धान के लिए डीओ जारी हुआ था, लेकिन अब तक 338060 मेट्रिक टन ही उठाया गया है। इससे 54902 मेट्रिक टन धान का उठाव शेष है, जिसमें से 19 मिलरों का उठाव 80% से कम है।

क्यों अहम है समय पर उठाव?

समय पर धान उठाव न होने से कई समस्याएं खड़ी होती हैं:

  1. भंडारण संकट: उपार्जन केंद्रों में धान जमा होने से नए सीजन की खरीदी प्रभावित हो सकती है।
  2. गुणवत्ता का नुकसान: लंबे समय तक खुले में रखे धान की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  3. सरकारी नीति में बाधा: सरकार द्वारा तय समय-सीमा में मिलर्स का धान उठाना अनिवार्य होता है।

कलेक्टर की चेतावनी

कलेक्टर दीपक सोनी ने स्पष्ट किया है कि यदि मिलर्स और परिवहनकर्ता जल्द उठाव नहीं करते, तो आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब धान उठाव की मॉनिटरिंग तेज करेगा ताकि खरीदी व्यवस्था सुचारू रूप से चले।

निष्कर्ष

धान उठाव में सुस्ती दिखाने वाले मिलर्स के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। यह न केवल धान की गुणवत्ता और किसानों के हित में है, बल्कि सरकार की नीतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए भी जरूरी है। मिलर्स को समय पर उठाव सुनिश्चित कर सहयोग करना चाहिए, ताकि आगे किसी कठोर कार्रवाई की जरूरत न पड़े।

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