विधायक देवेंद्र यादव के मामले में कोर्ट का आया यह आदेश

भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के मामले में आज कोर्ट में सुनवाई हुई। आज ही उनकी न्यायिक हिरासत खत्म हुई थी। न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में पेश किया गया जहां कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत पर सुनवाई करते हुए निर्णय दिया। 

बलौदा बाजार हिंसा में आरोपी बनाए गए भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। 17 अगस्त को हुई गिरफ्तारी के बाद से उनको रायपुर सेंट्रल जेल में बंद करके रखा गया है। अब तक हर सुनवाई में उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ती रही है। अब एक बार फिर आज सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 7 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत बढ़ाते हुए 9 सितंबर तक चालान प्रस्तुत करने के लिए पुलिस को समय दिया है।

ऐसे समझिए घटना क्रम को 
10 जून को बलौदा बाजार में सतनाम पंथ का प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव मौजूद थे। इस पर उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर 17 अगस्त को भिलाई नगर से विधायक को गिरफ्तार की थी। न्यायालय ने उनको 3 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दी। वहीं 20 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई, जिसमें 7 दिनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई, 27 अगस्त को सुनवाई में 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई थी। आज हुई सुनवाई में 9 सितंबर तक की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई।

आज यह हुआ
बलौदा बाजार सीजेएम अजय कुमार खाखा की अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई। जहां देवेंद्र यादव के अधिवक्ता अनादि शंकर मिश्रा ने विधायक के तरफ से आपत्ति की गई कि 13 प्रकरणों में से 12 प्रकरणों में चालान प्रस्तुत कर दी गई है। इस एक प्रकरण में राजनैतिक द्वेष के कारण इस मामले में देरी की जा रही है। पुलिस के पास विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं है, विलंब करके मात्र उनके खिलाफ साक्ष्य को गढ़ा जा रहा है। न्यायालय द्वारा अपने आदेश में प्रकरण में पुलिस को जल्द से जल्द विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 

यह है मामला 
15-16 मई को सतनाम पंथ के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक गिरौदपुरी धाम से लगे ग्राम महकोनी के अमर गुफा के तीन जैतखाम और मंदिर के गेट को काटकर गिरा दिया था। मामले में पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार की। समाज के लोगों को आरोपियों के ऐसा करने पर विश्वास नहीं हुआ। इस पर समाज सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू की। प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने 8 जून को न्यायिक जांच आयोग गठित करने की घोषणा की। वहीं 10 जून को बलौदा बाजार में प्रदर्शन हुआ और फिर आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की घटना हुई। 

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