छत्तीसगढ़ का यह जिला भी आया फ्लोरोसिस की चपेट में, रोकथाम के लिए हो रहे ऐसे प्रयास
पेय जल स्रोतों में फ्लोराइड की अधिकता से होने वाले फ्लोरोसिस रोग के रोकथाम की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर राज्य शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी और स्वास्थ्य काम शुरू कर दिए हैं। जिससे जिले में फ्लोराइड के क्षेत्रों की पहचान कर उससे संबंधित उपाय किए जा सकें।
कलेक्टर दीपक सोनी ने दोनों ही विभागों को निर्देश दिए हैं कि भारतीय मानक ब्यूरो के नियमानुसार फ्लोराइड की वांछनीय मात्रा 1 पीपीएम (1 मिलीग्राम प्रति लीटर) निर्धारित है। एफटी के परीक्षण में यदि ग्रामीण क्षेत्रों के पेयजल स्रोतों में यह 1.5 मिग्रा प्रति लीटर स्वीकार्यता सीमा से अधिक है तो ऐसे क्षेत्र के सभी पेयजल स्रोतों का पुष्टिकारक परीक्षण किया जाए। परिणाम सकारात्मक आने पर इन स्रोतों को कैप से बन्द कर लाल रंग की दो पट्टियां बनवा कर, पेयजल उपयोग नहीं करने की जानकारी डिस्प्ले करें। उन्होंने हर गांव के पेयजल स्रोतों की जांच के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग संबंधित गांव में सेहत को लेकर आवश्यक प्रचार-प्रसार, जांच कैम्प का आयोजन करें। आवश्यकता का आंकलन कर के गांव में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट भी लगाया जाए।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने बताया कि,फ्लोरोसिस एक सार्वजनिक लोक स्वास्थ्य समस्या है जो लंबे समय तक पीने के पानी ,खाद्य उत्पादों और औद्योगिक उत्सर्जन से ज्यादा मात्रा में फ्लोराइड शरीर में जाने पर होता है। इसके कुप्रभाव से हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं तथा दाँत भी विकृत होते हैं। ज्यादातर मामलों में इसके पीछे अधिक फ्लोराइड युक्त पेयजल कारण होता है।
फ्लोराइड की अधिकता से होने वाली बीमारी
घुटनों के आसपास सूजन, झुकने या बैठने में परेशानी, जोड़ों में दर्द,दांतों में अधिक पीलापन, हाथ और पैर का आगे या पीछे की ओर मुड़ जाना, पेट भारी रहना फ्लोरोसिस के कुछ मुख्य लक्षण हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसके लिए जागरुकता की गतिविधि संचालित की जा रही हैं। साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के हिसाब से आवश्यक जांच, दवाइयां और परामर्श भी दिया जा रहा है।
फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू
फ्लोरोसिस जांच के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम-चिरायु के साथ-साथ दंत चिकित्सकों को फ्लोरोसिस की पहचान के लिए निर्देशित किया गया है। वर्तमान में राज्य बजट से प्रदेश के बलौदाबाजार- भाटपारा, गरियाबंद, सूरजपुर,सरगुजा, बलरामपुर, धमतरी, बस्तर में फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम चल रहा है। जबकि केंद्र के सहयोग से अतिरिक्त 7 जिलों में राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम जारी है।
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