सरकार नहीं निभा पा रही जिम्मेदारी
इसी ठंड के महीने की बात थी 2014 में बिलासपुर में नया नया आया था, कुछ माह ही बीते थे, रायपुर में तीन साल रहने के बाद यहां मौका मिला था, चुनौती थी सबकुछ समझने की। अब तब अखबारों से रिपोर्टर की खबर टाइप करने के लिए लगाए गये कंप्यूटर टाइपिस्ट हटा दिए गये थे। ऐसे में लंबी लंबी खबर लिखने पर हर दिन समझाइश दी जाती और कभी कभार सीनियर से डांट भी पड़ती थी। हालांकि वक्त का पहिया चलता जा रहा था, मुद्दे की बात यह है कि ऐसे ही ठंड के समय में कानन पेंडारी के पास कैंसर के इलाज के लिए एक परिवार द्वारा दान की गयी जमीन और अस्पताल में महिला नसबंदी शिविर लगाई गयी। जहां बड़ी संख्या में आस-पास की महिलाओं की नसबंदी की गयी। साथ ही कयी दवाइयों के साथ जहरीली सीप्रोसिन 500 दवा भी विपरीत कर दी गयी। यह दवाइयां सरकार ने सप्लाई की गयी थी। इसे खाने के बाद एक एक कर महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी और फिर एक के बाद एक महिलाओं की मौत होने लगी। इस घटना के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य का सच सामने आया और मीडिया के माध्यम से एक के बाद एक पोल खुलता चला गया। इसके कयी साल बाद सिम्स में एक घटना घटी जिसमें पता चला कि बिजली के लिए लगे सर्किट के पास ही डीजल रखा जाता था, जिसके कारण सर्किट से निकली चिंगारी ने असपताल में भर्ती कयी नवदीपों को बुझा दिया। हाल ही में अंबिकापुर मेडीकल कालेज कम अस्पताल में भी इसी तरह की घटना हुई, यहां भी नवजातों की जान चली गयी। इन तमाम घटनाओं से पहले भी कयी घटनाएं हुई हैं इसके बाद भी इन घटनाओं से सबक नहीं लिया गया। सरकार बदलती रहती है,भाजपा को कभी जीत मिलेगी तो कभी कांग्रेस को कभी आम आदमी पार्टी भी सत्ता में आ सकती है। नहीं बदलती तो प्रशासनिक व्यवस्था और विभाग, कर्मचारी और उस व्यवस्था के अंग। वह वैसे ही काम करते रहते हैं। कभी कभार तबादला कर दिया तो भी जो आता है वह भी वैसा ही आता है। प्रशासनिक कसावट नहीं होने, डाॅक्टर और मेडिकल लाइन के कर्मचारियों के लिए कोई सही कानून नहीं होने और ऐसी घटना के बाद सही जांच नहीं होने, अपने लोगों को बचाने के लिए प्रयास करने के कारण उनकामनोबल बढ़ा रहता है। वे हर बारकांड करने के लिए विचलित रहते हैं। जबकि होना यह चाहिए कीघटन हुई उसका निष्पक्ष जांच कराया जाए और दोषी जो भी हो उसे तत्काल ऐसी सजा दी जाए की मिसाल बने। डाक्टर की गलती है तो आजीवन लाइसेंस रद्द कर दो, नर्स और स्टाफ की गलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करें।
इन गलतियों के बीच में विधायक और मंत्री को भी याद रखा जाए। क्योंकि उनकी भी बराबर की गलती है। चाहे बिलासपुर में हुआ नसबंदी कांड हो यार सिम्स और अंबिकापुर के अस्पताल में हुआ हादसा। सभी के लिए सरकार जिम्मेदार है, अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अपडेट करने से पहले वहां की व्यवस्था को देखना चाहिए। सरकार के उटपटांग निर्णय ने इन घटनाओं को अंजाम दिया है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की रक्षा करे, लेकिन क्या सरकारें अपनी जिम्मेदारी निभा पा रही हैं, क्या वह जनता के जान की रक्षा कर पा रही हैं। एक बात और निकल कर आ रही है कि स्वास्थ्य मंत्री के जिले में ही हमेशा घटना होती है। नसबंदी कांड के समय स्वास्थ्य विभाग अमर अग्रवाल के पास था और अब टीएस सिंहदेव के पास, क्या यह नियोजित घटना है क्योंकि डाॅ. रमन की सरकार में अमर अग्रवाल को पसंद नहीं किया जाता था और अब भूपेश की सरकार में टीएस सिंहदेव को पसंद नहीं किया जा रहा है।
यह तय स्वास्थ्य मंत्री को करना होगा कि इस घटना के बाद वह क्या एक्शन लेते हैं आम जनता न्याय की नजर से उनकी ओर देख रही है।
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