प्राचार्य के भाषण का डर

 प्राचार्य के हाथ में माइक देखकर प्रोफेसर डाल लेते हैं कान में रूई यह पढ़कर आश्चर्य में मत पड़िए यह हकीकत बिलासपुर में एक कॉलेज की प्राचार्य के भाषण का है। वैसे तो बिलासपुर में सौ से ज्यादा कॉलेज हैं लेकिन इस काॅलेज की बात ही कुछ अलग है। यहां के छात्र से लेकर प्रोफेसर तक में भाषण को लेकर दहशत महसूस किया गया है। कोई छात्र हो या प्रोफेसर मैडम का भाषण शुरू होने वाला है इतना सुनकर ही भयभीत हो जाते हैं यह भय इतना है कि वे इस बारे में बात तक नहीं करते। भय का माहौल ऐसा है कि मैडम प्राचार्य के हाथ में माइक देखकर ही प्रोफेसर कान में रूई डाल लेते हैं। वहीं प्राचार्य मैडम एक बार भाषण देना शुरू कर दीं तो फिर किसी की मजाल नहीं है कि उन्हें कोई टोक दे। भाषण देने से रोक ले ऐसा हिम्मत किसी में नहीं है। इतना ही नहीं कॉलेज में कोई कार्यक्रम होने वाला है इस बात की जानकारी होने और प्राचार्य का भाषण होगा इतनी सी जानकारी मात्र से कॉलेज के प्रोफेसर अपने जेब में रुई डालकर लाते हैं और भाषण के समय कान से खून न निकल जाए इससे पहले ही वे अपने कान में डाल लेते हैं। इतना ही नहीं बच्चे कार्यक्रम छोड़कर गायब हो जाते हैं। शहर के ऐसे ही कॉलेज में यह नजारा देखने और पूरे कार्यक्रम को महसूस करने के बाद भटकती आत्मा की आत्म कथा जो  कुछ इस प्रकार से है- 


अतिथि आने से मना करने लगे हैं: 

आयोजकों का कहना है कि प्राचार्य के कहने से तो कोई आता नहीं है। आयोजन समिति और कॉलेज के चेयरमैन ही सभी अतिथियों को बुलाते हैं ऐसे में मैडम के भाषण से अतिथि अब कॉलेज के कार्यक्रम में आने से मना करने लगे हैं। इतना ही नहीं मैडम के भाषण से कार्यक्रम की गरिमा भी अब कम होने लगी है। मैडम समझने का नाम नहीं ले रही हैं, खुद को विषय विशेषज्ञ घोषित कर चुकी प्राचार्य मैडम कई बड़े कार्यक्रम को भी फीका कर चुकी हैं। जानकारों के मुताबिक कॉलेज में बड़े कवियों को घंटे के आधार पर पैसा देकर कार्यक्रम के लिए बुलाया गया था, जिसमें आधा से अधिक समय मैडम ने भाषण देने में ही खत्म कर दिया। इस पर कवि मंच से ही बोल दिए थे। 


कुलपति का निर्देश होता है मेरे से पहले मत कराओ मेडम का भाषण: 

कॉलेज जिस विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है वहां के कुलपति कार्यक्रम में आने से डरने लगे हैं। डर की वजह प्राचार्य मैडम का भाषण मात्र है। आयोजन समिति से जुड़े लोग बताते हैं कि कुलपति को जब भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाते हैं तो उनका साफ कहना रहता है कि पहले मेरा भाषण होगा, मेरे से पहले अगर प्राचार्य मैडम को भाषण दिलवो तो मैं नहीं आउंगा। यहां तक का निर्देश रहता है कि उनके पहले मैडम का भाषण मत कराओ। 


चेयरमेन का उद्बोधन हो जाता है छोटा : किसी भी कार्यक्रम में जब मैडम भाषण दे देती हैं तो कॉलेज के चेयरमेन का उद्बोधन बिल्कुल छोटा और संक्षिप्त होता है। कई बार तो वे अपनी बात को भी नहीं कहते और सीधे अतिथियों को ही भाषण देने के लिए बुला लेते हैं। 


परेशान हो जाते हैं अतिथि: प्राचार्य के भाषण से अतिथि भी परेशान होने लगे हैं। मैडम जब भी किसी कार्यक्रम में भाषण देना शुरू कर देती हैं तो वह भाषण कम से कम 45 मिनट का होता है। ऐसे में मैडम के भाषण से अतिथि भी परेशान होकर इधर उधर देखने लगते हैं। सामने बैठे बच्चे और प्रोफेसर उघंने लगेते हैं। पत्रकार सोने लगते हैं, छात्रों को भी नींद आने लगती है। 


छात्र कार्यक्रम छोड़कर भाग जाते है:

कार्यक्रम के दौरान देखने को यह भी मिला की प्राचार्य के भाषण शुरू करते ही छात्र कार्यक्रम छोड़कर बाहर भाज जाते हैं, वे कार्यक्रम में मैडम के भाषण के खत्म होने के बाद ही लौटते हैं। 


प्राचार्य देती हैं धमकी कोई भाषण देने से रोका तो खा जाउंगी नौकरी:

एक प्रोफेसर ने बताया कि मैडम धमकी देती हैं कि अगर उनके भाषण के बीच में कोई रोक-टोक करने की कोशिश की तो उसकी नौकरी खा जाउंगी। यही डर प्रोफेसरों को मजबूर किए हुए हैं। कुछ प्रोफेसरों का कहना है कि एक राजनैतिक पार्टी विशेष से वास्ता रखने के कारण मैडम अपने पति से भाषण देने की कला सीख ली हैं।


ताली बजाने का मतलब भाषण खत्म करना होता है: किसी भी कार्यक्रम में अगर वक्ता के भाषण के दौरान श्रोता और दर्शक अनायास ही ताली बजाए तो इसका मतलब होता है कि भाषण खत्म कर दिया जाए, लेकिन प्राचार्य मैडम के मामले में इसके उलट होता है। वे छात्रों द्वारा अनायास बजाए जाने वाली लातियों को वे अपने भाषण के बहुत अच्छा होने और लोगों द्वारा पसंद किए जाना व उपलब्धि समझ लेती हैं। 


कम से कम 45 मिनट की क्लास की तरह देती हैं उद्बोधन: कार्यक्रम में शामिल प्रोफेसरों का कहना है कि मैडम हर कार्यक्रम में इतना ही भाषण देती हैं। उनका भाषण कम से कम 45 मिनट का होता है। वह एक बार शुरू हो गई तो भाषण अपने कॉलेज से शुरू होकर बिलासपुर, यहां से राज्य और फिर राष्ट्रीय मुद्दे इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्दे और फिर दूसरे अन्य मुद्दे से भाषण को रामायण से जोड़ती हैं जो महाभारत के बारे में बताते हुए समाप्त होता है। 


शुगर और बीपी बढ़ जाता है: एक प्राध्यापक ने यह भी बताया कि मैडम का शुगर लेबल बहुत ज्यादा है, बीपी की भी शायद मरीज हैं। ऐसे में वह भाषण देकर अपना शुगर और बीपी को कम करते रहती हैं। एक प्राध्यापक ने तो यह भी बताया कि कॉलेज में कम से कम साल में 65 कार्यक्रम करते हैं। हर कार्यक्रम में प्राचार्य मैडम इतना ही लंबा भाषण देती हैं। इतना ही नहीं वे भाषण देने वाले अतिथियों के द्वारा दी जाने वाली जानकारी को नोट करके रखती हैं, जिसे अगले भाषण में बताती हैं। एक प्राध्यापक ने तो यह भी कहा कि वे लंबा भाषण देने के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोगों द्वारा बाइट लिए जाने पर उन्हें लंबा बाइट भी दे देती हैं, कुछ पत्रकार तो उनसे बाइट तक लेना बंद कर दिए हैं। क्योंकि बहुत ज्यादा देर तक माइक पकड़े-पकड़े उनके हाथों में दर्द होने लगता है। 

जय जोहार

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