बढ़ते अपराध पर पुलिस का नियंत्रण नहीं

 एक समय था जब बिलासपुर रहने के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले शहरों में से एक हुआ करता था। लेकिन अब न तो शहर रहने लायक है, न शहर की सड़क चलने लायक, अपराध, नशाखोरी का गढ़ बनता जा रहा है छत्तीसगढ़। लाॅ एंड आर्डर नहीं सुधर रहा, आईजी बीएन मीणा सबसे सख्त एएसपी और एसपी रहे हैं, अब उनके आईजी बनने से पहले जैसी ही उम्मीद है कि वे अपराधियों पर लगाम लगाने में सफल रहेंगे। जिस तरह दिनदहाड़े गोली चल रही है, एसएसपी हत्या के चंद घंटे में मरने वाले के ही अपराध की जानकारी दे रही हैं, जैसे पुलिस मान रही हो कि ठीक हत्या हुआ। इसके बाद भी‌ लगातार हत्याएं हो रही हैं उससे ऐसा लगने लगा है जैसे कानून का भय खत्म हो रहा है। आज एक नया निर्देश एसएसपी ने मीडिया के लिए जारी की हैं, उनके मुताबिक मीडिया काम करे, पुलिस मीडिया के अनुसार कब काम की है जो‌ मीडिया से उम्मीद करती है मीडिया उनके अनुसार काम करे। अब तो लगनर लगा है कि पुलिस ही अपराधियों के साथ मिलकर घटनाओं को‌अंजाम दे रही है। क्योंकि पुलिस द्वारा अपरिपक्व हरकत किया जा रहा है।  पुलिस की गश्ती कम होने के साथ ही कोर्ट से अपराधियों को सजा देने और जमानत में छोड़ने का जो क्रम शुरू हुआ है वह दुखद है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पिछले कुछ आदेशों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि न सिर्फ पुलिस बल्कि न्यायालय भी अब सिर्फ और सिर्फ अपराधियों के लिए काम कर रहे हैं। पीड़ित पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। डिफेंस लायर की नियुक्ति हो या, जेल में बंद अपराधियों को छोड़ने के लिए अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाएं हाल के दिनों में व्यवस्था सिर्फ अपराधियों के पक्ष पर आधारित हो गयी हैं। पीड़ित पक्ष के पैरवी के लिए मिलने वाले पैनल लायर को पाने के लिए जिस तरह से पापड़ बेलना पड़ता है वह अलग ही तरह की व्यवस्था बन चुकी है। न्यायिक भ्रष्टाचार चरम पर है, कोर्ट बाबू से लेकर जज तक पर धन लेकर राहत देने के मामले उजागर होते रहे हैं। छत्तीसगढ़ में हाईकोर्ट के जज के ऊपर नान घोटाला सहित कयी मामले में रिश्वत लिए जाने की शिकायत सुप्रीम कोर्ट से होने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई न होना न्यायिक भ्रष्टाचार का ताजा उदाहरण है। न्यायाधीश नियम कानून से बाहर जाकर काम‌ कर रहे हैं। पुलिस कोई काम नहीं कर रही ऐसे में अपराध बढ़ता जा रहा है, और लोग भयभीत हैं। थानों में मामला निपटाने का प्रयास पुलिस कर रही है,अपराधी की थानेदारों के साथ इस कदर सेटिंग है कि उनके खिलाफ‌ नये मामले दर्ज नहीं हो रहे हैं। ऐसे में अपराध का बढ़ना लाजमी है।

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