साहब आपका ध्यान कहां है न्यायालयों में लाखों केस लंबित हैं
न्यायालयों में लाखों केस लंबित हैं।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में ही हजारों लोग अवमानना की याचिका दायर किए हुए हैं। ये सब के सब महत्वपूर्ण मामले हैं, जिनपर सुनवाई होनी बहुत जरुरी है। क्योंकि एक बार कोर्ट ने आदेश दे दिया तो उसका पालन समय पर होगा तभी न्याय है। और तभी न्याय होगा।
इसके विपरीत हालिया घटना क्रम पर नजर डालें तो…
एक वकील प्रशांत भूषण
तीन जज जस्टिस अरुण मिश्र, जस्टिस बीआर गावी और जस्टिस कृष्णा मुरारी।
एक ट्वीट
मुद्दा शीर्ष न्यायालय में भ्रष्टाचार का।
पहले माफी का दौर और फिर
एक रुपए की सजा।
अब इससे आगे बढ़ते हैं।
जस्टिस के नाम वेतन
जस्टिस अरुण मिश्र 2.50 लाख (भत्ता अलग)
जस्टिस बीआर गावी 2.50 लाख (भत्ता अलग)
जस्टिस कृष्णा मुरारी 2.50 लाख (भत्ता अलग)
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। बिजली का खर्च, कंप्यूटर व दूसरे उपकरणों पर खर्च।
इनके द्वारा इस केस के अलावा एक दिन में सुने गये मामलों की संख्या। एक केस पर दिया गया समय। केस चला कितने दिन तक! उस हिसाब से जोड़े तो लाखों रुपए जो देश की जनता से लिया गया टैक्स है और उससे जुटाई गयी संसाधन का उपयोग किया गया। इस संसाधन का दुरुपयोग हुआ या सदुपयोग। यही आपको तय करना है मेरे देश वासियों। अगर बोलेंगे सदुपयोग तो सजा एक रुपए की सजा से क्या किया गया संसाधनों का उयोग और जनता के टैक्स के साथ न्याय हुआ?
सजा उतना तो देना था जितने से खर्च हुए संसाधन की भरपाई हो सके। और अगर दुरुपयोग हुआ तो…? फिर भरपाई किससे हो। फिर जनता से टैक्स वसूली की जाए। या इस नियत से काम किया जाए कि यह जज है भगवान थोड़ी हैं। लेकिन जज से वसूली नहीं हो सकती। संसाधन के दुरुपयोग के मामले में उनके वेतन से वसूली की जानी चाहिए क्योंकि हैं तो सरकारी पद पर। महाभियोग लगना चाहिए। ऐसे संसाधन का दुरुपयोग करने वाले जजों पर और बर्खास्त करना चाहिए जनता के टैक्स का दुरुपयोग करने वालों को। क्या कभी ऐसा संभव हो पाएगा मेरे देश में? या जिंदगी भर हम टैक्स देते रहेंगे हुक्मरान और न्यायालयों में बैठे न्यायाधीश उसका दुरुपयोग करते रहेंगे। सवाल और जवाब सब आपके पास ही है। सोचिए वक्त के साथ हम कहां हैं।
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