कोरोना के दौरान का अनुभव
मैं कोरोना संक्रमित हो गया था। अब स्वस्थय होकर घर लौट आया हूं। कोरोना संक्रमण के दौरान जो सीखा वह सामाजिक आर्थिक विकास के बारे में। समाज में अगर आप समर्थ हैं तो लोग आपको पूजते हैं। मुझे अस्पताल में दस दिन गुजारना कोई कठिन नहीं था, क्योंकि मैं पहले भी अस्पताल में रह चुका हूं। इस बार अलग यह था कि अकेले रहना था। हर बार परिवार के साथ रहता था तो लोगों से बात करने का अवसर मिलता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं था। खुद को कोरोना संक्रमण था, दूसरों को भी था। इसलिए खुद से दूसरों को और दूसरों से खुद को बचाना था। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना था। एक बात इस दौरान जो समझ आई वह यह कि कोरोना कोई बीमारी नहीं है। एक संक्रमण है, जिससे डरने की जरुरत नहीं है। तकलीफ महसूस होते ही जांच कराकर खुद के साथ समाज की रक्षा कर सकते हैं। हां यह संक्रमण जान ले रहा है, लेकिन उन्हीं का जो लापरवाही बरत लिए हैं अथवा जिन्हें पहले से कोई बीमारी है। खासकर बीपी और शुगर के मरीजों के लिए यह घातक संक्रमण है। इस संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी जरुरी है। अस्पताल में रहने के दौरान एक बात और सीखने को मिला वह है धैर्य। धैर्य अस्पताल में रखना बहुत जरुरी है क्योंकि यहां अकेले मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इसलिए अगर किसी को संक्रमण हो तो सबसे पहले उसकी जांच कराएं और फिर उसका इलाज लें। डरने के बजाय हिम्मत न हारें पूरे दिमाग से काम लें। दिमाग को व्यस्त रखने के लिए गेम खेलें, कसरत, योग, ध्यान करें। किताबें पढ़ सकते हैं।
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