एनटीपीसी के प्लांट सल्फर डाई ऑक्साइड उगल रहे, पीढ़ी बर्बाद करने की साजिश

सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी को प्लांट से सल्फर डाई ऑक्साइड रोकने प्लांट में एफजीडी लगाने कहा है।

शीर्ष कोर्ट ने रेलवे और एनटीपीसी को एक माह में ढंककर कोयला परिवहन करने कहा है।



नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेट (एनटीपीसी) के बिलासपुर सीपत प्लांट से सल्फर डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है। इससे होने वाले नुकसान और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। शीर्ष कोर्ट में एनटीपीसी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने याचिका को निराकृत करते हुए रेलवे और एनटीपीसी को एक माह में कोयला ढंककर लाने की व्यवस्था करने के साथ प्लांट से निकलने वाले जहरीले सल्फर डाई ऑक्साइड को फैलने से रोकने के लिए फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) लगाने कहा है। 

बिलासपुर की रश्मि सिंह, स्व. रमाशंकर गुरुद्वारा व देव कुमार कनेरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें एनटीपीसी के सीपत प्लांट से निकलने वाले सल्फर डाई ऑक्साइड, खुले में कोयला लाने, जल, वायु प्रदूषण व राखड़ के फैलने को चुनौती दी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 2014 में मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल( एनजीटी) को सौंप दिया था। वहीं एनजीटी उसमें 27 फरवरी 2020 को पाया कि एनटीपीसी प्लांट से प्रदूषण को रोकने के लिए पर्यावरण शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने जल प्रदूषण, पानी रिसाव और राखड़ की व्यवस्था पर कमेटी बनाने कहा था। साथ ही सुधार के लिए कमेटी के निर्णय पर फैसला लेने कहा था। एनजीटी ने कोयला का परिवहन कोरबा से एनटीपीसी तक ढंककर करने और बिलासपुर से नजदीकी होने के कारण घनी बसाहट को सल्फर डाइऑक्साइड से बचाने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड को संग्रहित कर के पर्यावरण में जाने से रोकने के लिए कहा था। इसमें एनजीटी ने एफजीडी 6 माह में लगाने का आदेश दिया था। ऐसा नहीं करने पर कड़े कदम उठाने की चेतवनी दी थी। एनटीपीसी ने कमेटी बनाने वाले हिस्से पर काम शुरू कर दिया, लेकिन ढंक कर कोयला परिवहन करने और एफजीडी लगाने वाले हिस्से को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसमें एनटीपीसी ने कहा कि एफजीडी लगाने के लिए तैयार हैं, लेकिन समय लगेगा क्योंकि बाकी निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं। सुनवाई के दौरान पूर्व के एक याचिकाकर्ता की मृत्यु हो गई । वहीं दो याचिकाकर्ता रश्मि सिंह व देव कुमार कनेरी ने सुप्रीम कोर्ट में एनटीपीसी का नियत खराब होने की बात कही। कोर्ट में कहा कि एनटीपीसी कोयला ढंकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था आज तक नहीं कर पाया है, तो इन्हें मशीन लगाने के लिए समय की छूट देने पर यह नहीं लगाएंगे। शीर्ष कोर्ट में एनटीपीसी के तरफ से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता और रश्मि सिंह व देव कुमार कनेरी के तरफ से सौरव शर्मा व ऋत्विक दत्ता ने पक्ष रखा। कोर्ट ने रेलवे और एनटीपीसी को मिलकर एक माह में कोयला परिवहन ढंककर  सुनिश्चित करेंगे। कोर्ट ने एफजीडी लगाने पर निर्देश दिया कि जो प्रोसेस करेंगे वह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के गाइडलाइन के हिसाब से करेंगे। यूनिट नंबर 3,4,5 जो 500 मेगा वाट का है उसमें 31 दिसंबर 2021 तक एफजीडी लगाया जाएगा। यूनिट 1 और 2 जो 660 मेगा वाट के हैं उसमें 31 दिसंबर 2022 तक एफजीडी लगाना है। कोर्ट ने समय पर काम हो इसके लिए प्रत्येक तीन माह में एनजीटी के सामने प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा है। मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मलहोत्रा, जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच में हुई। 


सल्फर डाई ऑक्साइड का नुकसान

सल्फर डाई ऑक्साइड से पर्यावरण को नुकसान होता है। पर्यावरण प्रदूषण से पैदावार में कमी होती है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए घातक है इसके बावजूद सरकारी कंपनियां ही नियमों का पालन नहीं कर रही। थर्मल प्लांट के मामले में सीपत का प्लांट देश का सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट में एक है। यहां व्यापक व्यवस्था नहीं होनर से छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी अंचल की पीढ़ी को सल्फर डाइऑक्साइड नष्ट कर देगा।

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