गले तक गंदगी में डूबा शहर स्मार्ट बन गया

स्मार्ट सिटी बनाने की योजना मोदी को जिसने भी दी होगी बड़ी तारीफ करने की बात है। हमारे शहर को भी 1000 करोड़ रुपए मिलेंगे स्मार्ट सिटी बनाने के खातीर। मने कहने का मतलब है कि पहले से सीवेज का काम पिछले 8 साल से जारी है। इसमें अब तक 8 सौ करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं। जबकि प्रोजेक्ट 300 करोड़ रुपए मात्र का था। तो स्मार्ट सिटी बनाने का जो प्रोजेक्ट सरकार ने बिलासपुर को दिया है तो मान लिया जाए कि यह तीन गुना यानी कि मात्र 3000 करोड़ रुपए खर्च किे जाना चाहिए। वैसे यह राशि विधानसभा चुनाव 2018 से ठीक पहले बिलासपुर को मिल जाएगी। मने की चुनाव का खर्च निकल जाएगा। इससे फिर जो जितेगा वह सिटी और अपने आपको स्मार्ट बनाएगा। दूसरी बात यह है कि अरपा को सुधारने के लिए भी एक प्रोजेक्ट आया है। इसमें 2100 करोड़ रुपए खर्च होने है। बोले तो अरपा में पानी लाना है इसे टेम्स नदी बनाना है तो इतना खर्च तो करना ही पड़ेगा। मेरे खयाल से यह काम बड़ा है तो समय थोड़ा ज्यादा लगेगा क्योंकि नदी की लंबाई जानकार 91 किमी बता रहे हैं। इस लिहाज से इसको सुधारने में कुछ समय और प्रोजेक्ट की राशि लगभग बढ़ भी सकती है। इसके बनने से बिलासपुर स्मार्ट बन जाएगा यह दूर की कौड़ी है वर्तमान में स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल चुका है ऐसे समय में जबकि बिलासपुर गले तक गंदगी मे डूबा हुआ है। लिहाजा 1000 करोड़ का कुछ हिस्सा तो बिलासपुर को खर्च करना ही पड़ा होगा। अब यह राशि भले आने के बाद सीधे चुनाव में शासन खर्च कर दे। लेकिन छत्तीसगढ़ का तीसरा शहर बिलासपुर स्मार्ट सिटी के दायरे में आ चुका है। गंदगी के मामले में हालांकि अंबिकापुर को भी बहुत सारे एवार्ड मिल चुके हैं लेकिन यह पहला मौका है कि कुड़े करकट और कबाड़ से भरा शहर भी स्मार्ट घोषित हो गया है। अगर स्मार्ट होने की यही परिभाषा है तो सलाम है मोदी के इस प्रोजेक्ट को। 

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