भारत के राजनीति में योगासन जरूरी है
21 जून को पूरे देश में योग दिवस बड़ी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस
दौरान राजनैतिक लोगों से लेकर सामान्य टूटपूंजिए कर्मचारी तक चेहरे पर
लालिमा लाने योग अभ्यास करते दिखे। चाहे वह स्कूल का बरामदा हो या बड़ा
स्टेडियम हर जगह लोग योग अभ्यास करते दिखे। ऐसे में राजनीति में योगासन किस
तरह का चल रहा है इस पर भी बात जरूरी है।
जब बात शुरू कर ही रहे है तो इसकी शुरूआत सुप्तासन से शुरू करते हैं यह दो लेवल पर किया जाने वाला आसन है। पहला चुनाव जीतने के बाद करते हैं। इस क्रम में राजनेताओं का पहला काम अपने ही घोषणा-पत्र को गोरसी की आग में धरकर फूंक देना होता है। दूसरा चुनाव हारने के बाद होता है। ये आसन ठीक उसी वक़्त शुरू होता है जैसे ही राजनेता ‘हम हार के कारणों की समीक्षा करेंगे’ कहते हैं। इसके बाद यह आसन शुरू हो जाता है। फिर पांच साल बाद आता है वोट नमस्कारम कुछ नेता सूर्य नमस्कार की तरह ही पांच साल में एक बार वोटरों को नमस्कार करने निकलते हैं।आसन नहीं कई आसनों का मेल है,जिसमें हाथ जोड़ना, हाथ हिलाना, झुकना, बे-बात भावुक हो जाना, रोने लगना, अपने पिता, दादी के मरने की बात करना, पैरों पर लोट जाना तक शामिल है। एक बार ये आसन अच्छे से कर लिए जाएं फिर वोटर्स को दूर से नमस्कार किया जा सकता है। ये आसन परिवारजनों की मदद से भी किया जा सकता है। इस आसन को करने के लिए भारतीय जलवायु के लिहाज से यूनिफॉर्म निर्धारित होती है, कुर्ते और साड़ी सबसे ज्यादा प्रचलित और सुविधाजनक माने जाते हैं। इसके अलावा भक्तासन भी एक आसन है इसमें अंधभक्ति जरूरी होती है। इसके लिए राजनेताओं के भक्त आंख बंद करते हैं, सांस के साथ लॉजिक को छोड़ते। इसे करने का आसान तरीका है ढेर सा कलुष अंदर भरिए। दुनियादारी को चूल्हे में झोंक कर जपना शुरू कीजिए। जपना क्या है सब जानते हैं। अच्छे दिन आने वाले हैं’, तुमको सब बुराई केजरीवाल में ही दिखती हैं, प्रियंका दीदी को वापस लाओ, 60 साल में क्या किया? कांग्रेस मुक्त भारत, चौरासी में कहां थे?, साठ साल के गड्ढे भर रहे हैं’, ‘देशद्रोही’, तकलीफ है तो पाकिस्तान चले जाओ। बकासन भी एक महत्वपूर्ण आसन है इसमें कुछ खास राजनितिज्ञ माहिर होते हैं। उनके मुंह में जो चला आता है वह उसे उगल देते हैं। इससे उनका पेट दर्द नहीं होता। इसे करने के लिए सबसे पहले मुंह को माइक के पास ले जाइए। होंठों को फैलाइए जीभ को चलाइए और कुछ भी कह दीजिए। उल्टे-सीधे बयानों के जरिए किया जाने वाला ये आसन पिछले कुछ सालों में खूब प्रचलित हुआ है। इसके फायदे भी तत्काल नजर आते हैं, सस्ती लोकप्रियता जुटाने के लिए ये सबसे कारगर आसन है। सबसे आसान आसानों में विरोधासन आता है। इसमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती। चूपचाप किसी भी चौराहा जहां लोगों का आना जाना हो वहां पर आसन लगाकर बैठ जाइए, लेट जाइए यहां तक की टेंट पंडाल लगाकर सो जाइए। अमूमन यह आसन अपोजीशन के लोग करते नजर आते हैं, लेकिन कई बार सत्तापक्ष के लोग भी इसकी मुद्राएं दोहराते दिख जाते हैं। विरोध आसन के दो प्रचलित रूप हैं। सदन में किया जाने वाला बहिर्गमन और सड़क पर धरना प्रदर्शन। जिस तरह कई आसन करके कैलोरी बर्न होती है इस आसन से जनता के पैसे बर्न होते हैं। सबसे खतरनाक आसनों में चमचासन आता है। यह आसन अक्सर किसी बड़े के पीछे-पीछे होकर ही किया जाता है। ये आसन शरीर को हल्का करता है, स्वभाव में हल्कापन लाता है और चमचे के स्तर को ऊपर ले जाता है। इस आसन में निखट्टूपन अनिवार्य है, साथ ही शरीर को ऐसी स्थिति में ले जाना होता है, जहां से आप अपने बड़के नेता का नाम आसानी से डुबा सकें। फिर आता है निंदासन यह किसी भी बड़ी घटना के बाद किया जाने वाला आसान है इसमें कुछ शब्द बहुत सधे हुए अंदाज में कहा जाता है। खासकर घटना की कड़ी आलोचना, कड़ी निंदा आदि कहा जाता है। गठबंधनासन भी राजनीति में महत्वपूर्ण आसन हो चुका है। यह आसन स्वस्थ लोगों के लिए होता है, ये खुद में संम्पूर्णता लिए होता है। जनरली यह आसन बहुत कुछ बिगड़ चुकने के बाद भी किया जाता है। चूंकि ये विशुद्ध योग है, इसलिए इसमें कई लोगों का जुड़ना अपरिहार्य है फिर भले वो हाथ में साइकिल हो या लालटेन को साइकल पर लटकाया गया हो। ना-कुकरासन आसन आकर्षण को केंद्र में लाने के लिए किया जाता है। यह आसन किसी भी बात पर किया जा सकता है। खासकर धार्मिक और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर यह आशन को विशेषता प्राप्त है। यह सामने वाले का राजनैतिक व्यक्ति का मुंह देखकर किया जाता है। इस आसन के करने से वजन घटता और भाव बढ़ता है। इससे फायदा तब मिलता है जब इसे बार-बार किया जाए, और फायदा तभी है जब कोई विवाद भड़काए।
जब बात शुरू कर ही रहे है तो इसकी शुरूआत सुप्तासन से शुरू करते हैं यह दो लेवल पर किया जाने वाला आसन है। पहला चुनाव जीतने के बाद करते हैं। इस क्रम में राजनेताओं का पहला काम अपने ही घोषणा-पत्र को गोरसी की आग में धरकर फूंक देना होता है। दूसरा चुनाव हारने के बाद होता है। ये आसन ठीक उसी वक़्त शुरू होता है जैसे ही राजनेता ‘हम हार के कारणों की समीक्षा करेंगे’ कहते हैं। इसके बाद यह आसन शुरू हो जाता है। फिर पांच साल बाद आता है वोट नमस्कारम कुछ नेता सूर्य नमस्कार की तरह ही पांच साल में एक बार वोटरों को नमस्कार करने निकलते हैं।आसन नहीं कई आसनों का मेल है,जिसमें हाथ जोड़ना, हाथ हिलाना, झुकना, बे-बात भावुक हो जाना, रोने लगना, अपने पिता, दादी के मरने की बात करना, पैरों पर लोट जाना तक शामिल है। एक बार ये आसन अच्छे से कर लिए जाएं फिर वोटर्स को दूर से नमस्कार किया जा सकता है। ये आसन परिवारजनों की मदद से भी किया जा सकता है। इस आसन को करने के लिए भारतीय जलवायु के लिहाज से यूनिफॉर्म निर्धारित होती है, कुर्ते और साड़ी सबसे ज्यादा प्रचलित और सुविधाजनक माने जाते हैं। इसके अलावा भक्तासन भी एक आसन है इसमें अंधभक्ति जरूरी होती है। इसके लिए राजनेताओं के भक्त आंख बंद करते हैं, सांस के साथ लॉजिक को छोड़ते। इसे करने का आसान तरीका है ढेर सा कलुष अंदर भरिए। दुनियादारी को चूल्हे में झोंक कर जपना शुरू कीजिए। जपना क्या है सब जानते हैं। अच्छे दिन आने वाले हैं’, तुमको सब बुराई केजरीवाल में ही दिखती हैं, प्रियंका दीदी को वापस लाओ, 60 साल में क्या किया? कांग्रेस मुक्त भारत, चौरासी में कहां थे?, साठ साल के गड्ढे भर रहे हैं’, ‘देशद्रोही’, तकलीफ है तो पाकिस्तान चले जाओ। बकासन भी एक महत्वपूर्ण आसन है इसमें कुछ खास राजनितिज्ञ माहिर होते हैं। उनके मुंह में जो चला आता है वह उसे उगल देते हैं। इससे उनका पेट दर्द नहीं होता। इसे करने के लिए सबसे पहले मुंह को माइक के पास ले जाइए। होंठों को फैलाइए जीभ को चलाइए और कुछ भी कह दीजिए। उल्टे-सीधे बयानों के जरिए किया जाने वाला ये आसन पिछले कुछ सालों में खूब प्रचलित हुआ है। इसके फायदे भी तत्काल नजर आते हैं, सस्ती लोकप्रियता जुटाने के लिए ये सबसे कारगर आसन है। सबसे आसान आसानों में विरोधासन आता है। इसमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती। चूपचाप किसी भी चौराहा जहां लोगों का आना जाना हो वहां पर आसन लगाकर बैठ जाइए, लेट जाइए यहां तक की टेंट पंडाल लगाकर सो जाइए। अमूमन यह आसन अपोजीशन के लोग करते नजर आते हैं, लेकिन कई बार सत्तापक्ष के लोग भी इसकी मुद्राएं दोहराते दिख जाते हैं। विरोध आसन के दो प्रचलित रूप हैं। सदन में किया जाने वाला बहिर्गमन और सड़क पर धरना प्रदर्शन। जिस तरह कई आसन करके कैलोरी बर्न होती है इस आसन से जनता के पैसे बर्न होते हैं। सबसे खतरनाक आसनों में चमचासन आता है। यह आसन अक्सर किसी बड़े के पीछे-पीछे होकर ही किया जाता है। ये आसन शरीर को हल्का करता है, स्वभाव में हल्कापन लाता है और चमचे के स्तर को ऊपर ले जाता है। इस आसन में निखट्टूपन अनिवार्य है, साथ ही शरीर को ऐसी स्थिति में ले जाना होता है, जहां से आप अपने बड़के नेता का नाम आसानी से डुबा सकें। फिर आता है निंदासन यह किसी भी बड़ी घटना के बाद किया जाने वाला आसान है इसमें कुछ शब्द बहुत सधे हुए अंदाज में कहा जाता है। खासकर घटना की कड़ी आलोचना, कड़ी निंदा आदि कहा जाता है। गठबंधनासन भी राजनीति में महत्वपूर्ण आसन हो चुका है। यह आसन स्वस्थ लोगों के लिए होता है, ये खुद में संम्पूर्णता लिए होता है। जनरली यह आसन बहुत कुछ बिगड़ चुकने के बाद भी किया जाता है। चूंकि ये विशुद्ध योग है, इसलिए इसमें कई लोगों का जुड़ना अपरिहार्य है फिर भले वो हाथ में साइकिल हो या लालटेन को साइकल पर लटकाया गया हो। ना-कुकरासन आसन आकर्षण को केंद्र में लाने के लिए किया जाता है। यह आसन किसी भी बात पर किया जा सकता है। खासकर धार्मिक और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर यह आशन को विशेषता प्राप्त है। यह सामने वाले का राजनैतिक व्यक्ति का मुंह देखकर किया जाता है। इस आसन के करने से वजन घटता और भाव बढ़ता है। इससे फायदा तब मिलता है जब इसे बार-बार किया जाए, और फायदा तभी है जब कोई विवाद भड़काए।
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