किसके खाई खोदने से साजिश के शिकार हुए बापू और चाचा नेहरू कि दोनों के बीच बढ़ गई दूरी

देश की आजादी में महती भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी और आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री और बच्चों के चाचा कहे जाने वाले चाचा नेहरू के बीच दूरी बढ़ाने की गहरी साजिश बिलासपुर में रची गई। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि बापू यहां आए तो थे, लेकिन चच्चा कभी आए नहीं तो फिर किसने खोदी होगी उनके बीच खाई। हम बता रहे हैं न सबर तो रखिए। अब मने कि आप फिर सोच रहे होंगे हैं कि दोनों के इस दुनिया को छोड़े हाफ सेंचुर बोले तो 50 साल से ज्यादा हो गए अब काहे गड़े मुर्दे उखाड़ रहे हो भाई। तो दोनों के दोनों परिचय से इसका खुलासा करता हूं कि साजिश कैसे रची गई। हालांकि दोनों अब परिचय के मोहताज नहीं हैं फिर भी हम परिचय से ही इस साजिश और दोनों के बीच खोदी गई खाई और बचे हुए गड्‌ढे की बात करेंगे। तो परिचय की शुरूआत बापू मकबल महात्मा गांधी वही अपने राष्ट्रपिता जिनपर कथित रुप से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपमान जनक टिप्पणी करते हुए चतुर बनिया बोल दिया था। वही मोहन दास करमचंद गांधी और चाचा नेहरू मकबल पं. जवाहर लाल नेहरू मने की देश के पहले प्रधानमंत्री े बारे में हम बात कर रहे हैं। अब एक को मरे 60 तो दूसरे को 50 से ज्यादा साल हो चुके हैं। और हमाई बात 8 साल पहले शुरु होती है।जदोनों के बीच खाई खोदने और गड्‌ढा छोड़ने की साजिश रची गई। जब बिलासपुर में सीवेज प्रोजेक्ट लांच हुआ। शहर की बेतरतीब खुदाई के कारण जगह-जगह गड्‌ढे अब भी देखे जा सकते हैं। इसके कारण कई लोग तो सीधे बापू और चाचा नेहरू के पास चले गए और जो बच गए अपने बापू को हस्पताल में याद कर रहे हैं। बस यह मामला यहीं से जुड़ता है। शहर के चौक में दोनों नेताओं की आदमकद मूर्ति लगी है। गांधी चौक पर महात्मा गांधी की और नेहरू चौक पर पं. नेहरू की। दोनों चौक के बीच की दूरी अब बढ़ गई है। जगह वही है पहले वाली ही, नेहरू पुतला नेहरू चौक पर और गांधी पुतला गांधी चौक पर ही है, बढ़ गई है तो दोनों जगह पर पहुंचने का समय। यह समय बढ़ने की वजह जगह-जगह खतरनाक गड्‌ढे हैं। साजीश ही है तो कहेंगे इसे भाजपा नेताओं कि जिनके कारण यह शहर बदहाल हो चुका है। इस बात का कभी खुलासा भी नहीं हुआ, लेकिन यह सच है कि दोनों के बीच गहरी खाई साजीश के तहत खोदी गई। दरअसल यह खोदी गई खाई इतनी गहरी है कि इसके गड्‌ढे आज भी गांधी चौक से नेहरू चौक के बीच बिलासपुर में देखे जा सकते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं 8 सौ करोड़ की लागत वाली सीवेज प्रोजेक्ट की जो पूरे बिलासपुर के लोगों के लिए सिर दर्द तो नहीं कहेंगे हां कमर दर्द जरूर साबित हुई है। इसी क्रम में 2017 का सबसे बड़ा काम गांधी चौक से नेहरू चौक के बीच में किया गया। दोनों चौक के बीच में गहरे गड्‌ढे खोदने और उसे पाटने के बाद भी बहसारे गड्‌ढरह गए हैंसिंपलेक्स कंपनी के सीवेज के काम ने बिलासपुर में गहरी साजिश कर बापू और पं. नेहरू चौक की दूरी बढ़ा दी। जहां लोग 10 मीनट लगते थे वहीं अब यह दूरी 20 मीनट से ज्यादा की हो गई है। न सिर्फ इस साजिश के शिकार दोनों नेता हुए हैं बल्कि इस सब को पूरे शहर की जनता झेल रही है। हालांकि साफ नजरिए से देखें तो भाजपा के नेताओं की इसे साजिश ही कहेंगे। सीधे तौर पर यह आरोप भाजपा नेताओं पर इसलिए भी लगेगा क्योंकि बिलासपुर में उन्होंने ही घटिया काम करने वाले सिंपलेक्स कंपनी को सीवेज का ठेका दिया। वह भी बापू-बापू बोलकर। 

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