भाट चारण की प्रथा बहुत ही रोचक और रोमांचक है
भारत
में भाट चारण की बात अक्सर
उठते रहती है। फला राजनीतिक
व्यक्ति का फला चैनल भाट चारण
कर रहा है। इस मामले में सबसे
अच्छी व्यवस्था अगर देखा जाए
तो यही वे भाट लोग हैं जिनकी
वजह से आज इतिहास बचा हुआ है।
हालांकि यह अक्सर विजेता पक्ष
के तरफ से लिखी जाती है। जिसमें
जितने वाला कितना भी कलुषि
पुरुष क्यों न हो उसका बहुत
अच्छे से बखान किया जाता है।
इसकी शुरूआत कब कहां से हुई
इसकी आज तक किसी ने खोज नहीं
किया। लेकिन हां पृथ्वीराज
चौहान के मोहम्मद गौरी से
युद्ध के समय बंदी चौहान के
लिए जो भाट चारण किया गया मत
चूको चौहान… वह अल्टिमेट था।
मने कि एकदम फिट बैठ गया। जबकि
चौहान को गौरी ने जो स्थिति
की थी वह रासो की कहानी में
पढ़ा जा सकता है। दोनों आंखे
फोड़ दी और न जाने क्या क्या
किया। इसी तरह महाभारत के
युद्ध में भी हुआ… कौरव और
पांडो के बीच चले युद्ध के बाद
जो कथा निकली की पांडो सब कुछ
हारकर कौरवों से मात्र पांच
ग्राम मांग रहे थ। विशेषज्ञों
का कहना है इस विषय में की वे
मात्र पांच गांव मांग रहे थे…
लेकिन वे पांच गांव कौन से थे
जिसके कारण युद्ध हुआ। आज के
समय में वह पांच गांव देश की
राजधानी बन चुकी है। लेकिन
पांडवों का बखान जीत के कारण
हो गया। अकबर हो या सिंकदर सभी
के समय ऐसे ही भाट लोगों ने
लेख लिखकर इतिहास को जिंदा
बनाया और इन सभी लोगों को महान
बनाते चले गए। वह अब भी जारी
है..
अकेले
मोदी के बारे में 100
से
ज्यादा किताबें लिखी जा चुकी
हैं… यही हाल मनमोहन सिंह और
सोनिया गांधी के बारे में भी
लागू होता है। आजादी के बाद
जिसकी भाट चारण व्यवस्था अच्छी
रही उसके बारे में अच्छा अच्छा
लिखा गया। जिसकी व्यवस्था
खराब रही वह जान देने के बाद
भी फेल हो गया। बतौर उदाहरण
भगत सिंह,
चंद्रशेखर
आजात,
सुखदेव,
लाला
लाजपत राय,
मंगल
पांडेय,
महारानी
लक्ष्मी बाई को ही ले लें।
इनके बारे में पूरे देश के
इतिहास में गलत पढ़ाया गया।
जबकि महात्मा गांधी अकेले
देश के सबसे महान व्यक्ति थे।
पं.
नेहरू
अकेले ऐसे सज्जन थे जो अंग्रेजों
के पीछू में डंडा मारकर बोला
देश छोड़कर चले जाओ। ऐसे ही कई
और लोग हैं जिनको देश नहीं जान
पाया कि उनकी आजादी में योगदान
कितना है। वह भाट चारण की प्रथा
नेहरू और गांधी के पास अच्छे
किस्म के भाट थे जिन्होंने
इतिहास में इनके नाम से लिखा
जबकि बाकी आजादी के दिवानों
के पास ऐसे पेड इंप्लाई नहीं
थे। कहने का आशय मेरा यह है कि
वर्तमान राजनीति में भाट चारण
की प्रथा बनी हुई है क्योंकि
भारतीय राजनीति में यह शुरू
से है। जिसकी भूमिका मीडिया
के लोग अच्छे से निभा रहे हैं।
यह छोटे स्तर की बात हो या बड़े
स्तर की हर जगह भाट चारण की
व्यवस्था जारी है। जय हो भाट
महराज की...
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