कुर्ते का रंग फीका पड़ने की फरियाद फोरम से...
तेरा रंग ऐसा चढ़ गया कोई और रंग न चढ़ सके तेरा नाम सीने पे लिखा हर
कोई आके पढ़ सके है जुनून है जुनून है तेरे इश्क का यह जुनून है... यह गीत
तो आपने सुना ही होगा। जिला उपभोक्ता फोरम के एक फैसले पर यह बाखूब बैठता
है। दरअसल बिलासपुर जिला उपभोक्ता फोरम में एक फरियादी ने अपने कुर्ते का
रंग फीका पड़ने और उसी कुर्ते में से एक रंग निकलकर दूसरे रंग पर चढ़ जाने का
परिवाद दायर किया। शिकायत की सुनवाई के बाद फोरम ने मंहगे कुर्ते की कीमत वापस करने और क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
आम
आदमी अपने अधिकारों को लेकर कितना सजग हो चुका है, इसे उपभोक्ता फोरम में
आए एक फैसले से समझा जा सकता है। मामला रोचक और जागरूक करने वाला है। दरअसल
एक शख्श ने महज इतनी सी बात पर कि उसके कुर्ते का रंग फीका पड़ गया है,फोरम
का दरवाजा खटखटाया। 7 महीने की लड़ाई लड़ी और उसकी जीत हुई। फोरम के मेंबरान
ने क्षतिपूर्ति सहित दुकानदार को 4650 रुपए लौटाने का आदेश दिया है।
सरकंडा
के कपिल नगर की रहने वाली करिश्मा चंद्रा ने अग्रसेन चौक स्थित अंदाज नामक
कपड़े की दुकान से 29 अक्टूबर 2015 को 1650 में एक कुर्ता खरीदा। यह कुर्ता
दो रंग नारंगी और सफेद था। इस्तेमाल के बाद महिला ने पहली धुलाई की तो
नारंगी कलर का रंग उतरकर सफेद रंग पर चढ़ गया। इससे महिला को हैरानी हुई, वह
इसकी शिकायत लेकर दुकानदार के पास पहुंची। दुकानदार ने इसे वापस लेने से
इंकार कर दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि रसीद में ड्रायक्लीन कराना था,
लेकिन आवेदिका ने इसका पालन नहीं किया है। दुकानदार के इस व्यवहार से
व्यथित महिला उपभोक्ता ने फोरम के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर दी। रसीद
प्रस्तुत कर इसमें प्रिंटेट प्रोफार्मा में ड्राइक्लीन ऑनली लिखा होना
बताया गया, जो सभी ग्राहक को दिया जाता है। साथ ही तर्क दिया गया कि जरूरी
नहीं कि दुकानदार जितने भी कपड़े बेचता है सभी में ड्राइक्लीन आवश्यक हों।
इस रसीद में कुर्ता धुलाई से मनाही का स्पष्ट नहीं था। फोरम ने सुनवाई के
बाद मामला अनुचित व्यवसायिक व्यवहार का पाया। दुकानदार को आदेश दिया कि वह
15 दिन में कुर्ते की कीमत 1650 रुपए, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 2
हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 1 हजार रुपए देगा।
आम आदमी अपने अधिकारों को लेकर कितना सजग हो चुका है, इसे उपभोक्ता फोरम में आए एक फैसले से समझा जा सकता है। मामला रोचक और जागरूक करने वाला है। दरअसल एक शख्श ने महज इतनी सी बात पर कि उसके कुर्ते का रंग फीका पड़ गया है,फोरम का दरवाजा खटखटाया। 7 महीने की लड़ाई लड़ी और उसकी जीत हुई। फोरम के मेंबरान ने क्षतिपूर्ति सहित दुकानदार को 4650 रुपए लौटाने का आदेश दिया है।
सरकंडा के कपिल नगर की रहने वाली करिश्मा चंद्रा ने अग्रसेन चौक स्थित अंदाज नामक कपड़े की दुकान से 29 अक्टूबर 2015 को 1650 में एक कुर्ता खरीदा। यह कुर्ता दो रंग नारंगी और सफेद था। इस्तेमाल के बाद महिला ने पहली धुलाई की तो नारंगी कलर का रंग उतरकर सफेद रंग पर चढ़ गया। इससे महिला को हैरानी हुई, वह इसकी शिकायत लेकर दुकानदार के पास पहुंची। दुकानदार ने इसे वापस लेने से इंकार कर दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि रसीद में ड्रायक्लीन कराना था, लेकिन आवेदिका ने इसका पालन नहीं किया है। दुकानदार के इस व्यवहार से व्यथित महिला उपभोक्ता ने फोरम के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर दी। रसीद प्रस्तुत कर इसमें प्रिंटेट प्रोफार्मा में ड्राइक्लीन ऑनली लिखा होना बताया गया, जो सभी ग्राहक को दिया जाता है। साथ ही तर्क दिया गया कि जरूरी नहीं कि दुकानदार जितने भी कपड़े बेचता है सभी में ड्राइक्लीन आवश्यक हों। इस रसीद में कुर्ता धुलाई से मनाही का स्पष्ट नहीं था। फोरम ने सुनवाई के बाद मामला अनुचित व्यवसायिक व्यवहार का पाया। दुकानदार को आदेश दिया कि वह 15 दिन में कुर्ते की कीमत 1650 रुपए, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 2 हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 1 हजार रुपए देगा।
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