अब आजादी की लड़ाई फिर से शुरू करनी होगी

कई सौ साल तक भारत के लोग गुलाम रहे इस गुलामी से अब भी हम आजाद नहीं है। न बोलने की आजादी है न लिखने की और न जीने की। हम जी रहे हैं किस लिए पता नहीं देश है क्या किस लिए पता नहीं। देश कुछ लोग चला रहे हैं। वह भी सिर्फ कुछ हजार लोग 125 करोड़ से अधिक आबादी के तकदीर का फैसला कर रहे हैं। यह तो अंग्रेज और मुगलों से भी भयानक है। भयानक ही नहीं पूरे देश को नपुंसक बनाने वाले कानून व्यवस्था और संविंधान के कारण यह सब हो रहा है। जी हां इस ओर कभी किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया। जब सब आजाद है तो सब देश के विकास में हिस्सा क्यों नहीं बनते। जिम्मेदारी सबके पास होनी चाहिए। गुलामी क्यों भूखे कोई क्यों मर रहा है किसी का एहसान नहीं चाहिए। सबको अधिकार मिले।

यह अधूरा लेख है.... मैं अपने अधूरे विचार नहीं छोड़ता फिर लिखुंगा इस ब्लॉक को आपके लिए...

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