नियम बनाने वालों ने खुद के लिए बना लिया कानून स्मोकिंग करना जरूरी है इनके लिए
पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग बैन है। एक्ट के सेक्शन 3(1) के तहत दी गई
पब्लिक प्लेस की डेफिनेशन को प्रोहीबिशन ऑफ स्मोकिंग इन पब्लिक प्लेस रूल्स
2008 (2008 रूल्स) के रूल 2 (डी) के साथ पढ़ने पर डेफिनेशन में वर्क प्लेस
भी शामिल होता है और इस तरह संसद भी एक्ट के अंतर्गत पब्लिक प्लेस के
दायरे में आता है।’
संसद में सांसदों के लिए तय किए गए एक स्मोकिंग एरिया ने एंटी टोबेको एक्टिविस्ट को नाराज कर दिया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, तंबाकू विरोधी एक हेल्थ इंस्टीट्यूट ने लोकसभा स्पीकर को लेटर लिखकर इस फैसले को गलत बताया है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि एंटी टोबेको एक्ट के तहत तय की गई पब्लिक प्लेस की डेफिनेशन में संसद भी आती है और संसद परिसर में सांसदों को स्मोकिंग की इजाजत देना रूल्स के खिलाफ है।
लेटर में दिया गया कानूनों का हवाला
सुमित्रा महाजन को लिखे गए इस लेटर में सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोड्क्ट एक्ट 2003 (Cigarettes and other Tobacco Products Act 2003) का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘एक्ट के सेक्शन-4 के मुताबिक अक्टूबर 2008 से सभी पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग बैन है। एक्ट के सेक्शन 3(1) के तहत दी गई पब्लिक प्लेस की डेफिनेशन को प्रोहीबिशन ऑफ स्मोकिंग इन पब्लिक प्लेस रूल्स 2008 (2008 रूल्स) के रूल 2 (डी) के साथ पढ़ने पर डेफिनेशन में वर्क प्लेस भी शामिल होता है और इस तरह संसद भी एक्ट के अंतर्गत पब्लिक प्लेस के दायरे में आता है।’
सांसदों ने की थी स्मोकिंग एरिया की मांग
बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, भाजपा सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू और सीपीएम सांसद सीताराम येचुरी ने लोकसभा स्पीकर से कई बार स्मोकिंग जोन मुहैया कराने की मांग की थी। इन सांसदों की इच्छा तब पूरी हो गई जब सेंट्रल हॉल में वेटिंग लॉन्ज को अनऑफिशियली सांसदों के स्मोकिंग एरिया के रूप में तय कर दिया गया।
एंटी टोबेको एक्टिविस्ट क्या कहते हैं
संसद अपने मैदान सहित एक नो स्मोकिंग जोन है लेकिन सांसदों के लिए विशेष रूप से व्यवस्था की गई है। होम और फाइनेंस मिनिस्ट्री के ऑफिस वाले नॉर्थ ब्लॉक में भी स्मोकिंग के लिए एक एरिया तय किया गया है। हॉवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के विजिटिंग साइंटिस्ट और Healis Sekhsaria Institute के डायरेक्टर डॉक्टर पी.सी.गुप्ता का कहना है कि जिस संसद ने कानून पास किया वही संसद इसको तोड़ रही है। गुप्ता ही इस मामले को स्पीकर सुमित्रा महाजन तक लेकर गए हैं। गुप्ता ने कहा, ‘देश के लिए यह एक बहुत गलत मिसाल है, संसद अगर अपने कानून की इज्जत नहीं कर सकती तो फिर और कौन करेगा। कानून बहुत साफ है कि किस जगह एक स्मोकिंग एरिया होना चाहिए और सभी पब्लिक प्लेस स्मोक फ्री होने चाहिए, संसद हर हिसाब से एक पब्लिक प्लेस है।’ गुप्ता ने कहा कि यह पूरी तरह से एक कानूनी मामला है क्योंकि यह कानून के उल्लंघन से संबंधित है, वही लोग कानून का उल्लंघन कर रहे हैं जिन्होंने इसे बनाया। कानून के मुताबिक ऐसे होटल जिनमें 30 या उससे ज्यादा कमरे हों या फिर रेस्टोरेंट्स जिनकी सिटिंग कैपेसिटी 30 से ज्यादा की हो और एयरपोर्ट में ही स्मोकिंग एरिया हो सकता है।
संसद में सांसदों के लिए तय किए गए एक स्मोकिंग एरिया ने एंटी टोबेको एक्टिविस्ट को नाराज कर दिया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, तंबाकू विरोधी एक हेल्थ इंस्टीट्यूट ने लोकसभा स्पीकर को लेटर लिखकर इस फैसले को गलत बताया है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि एंटी टोबेको एक्ट के तहत तय की गई पब्लिक प्लेस की डेफिनेशन में संसद भी आती है और संसद परिसर में सांसदों को स्मोकिंग की इजाजत देना रूल्स के खिलाफ है।
लेटर में दिया गया कानूनों का हवाला
सुमित्रा महाजन को लिखे गए इस लेटर में सिगरेट एंड अदर टोबेको प्रोड्क्ट एक्ट 2003 (Cigarettes and other Tobacco Products Act 2003) का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘एक्ट के सेक्शन-4 के मुताबिक अक्टूबर 2008 से सभी पब्लिक प्लेस में स्मोकिंग बैन है। एक्ट के सेक्शन 3(1) के तहत दी गई पब्लिक प्लेस की डेफिनेशन को प्रोहीबिशन ऑफ स्मोकिंग इन पब्लिक प्लेस रूल्स 2008 (2008 रूल्स) के रूल 2 (डी) के साथ पढ़ने पर डेफिनेशन में वर्क प्लेस भी शामिल होता है और इस तरह संसद भी एक्ट के अंतर्गत पब्लिक प्लेस के दायरे में आता है।’
सांसदों ने की थी स्मोकिंग एरिया की मांग
बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, भाजपा सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू और सीपीएम सांसद सीताराम येचुरी ने लोकसभा स्पीकर से कई बार स्मोकिंग जोन मुहैया कराने की मांग की थी। इन सांसदों की इच्छा तब पूरी हो गई जब सेंट्रल हॉल में वेटिंग लॉन्ज को अनऑफिशियली सांसदों के स्मोकिंग एरिया के रूप में तय कर दिया गया।
एंटी टोबेको एक्टिविस्ट क्या कहते हैं
संसद अपने मैदान सहित एक नो स्मोकिंग जोन है लेकिन सांसदों के लिए विशेष रूप से व्यवस्था की गई है। होम और फाइनेंस मिनिस्ट्री के ऑफिस वाले नॉर्थ ब्लॉक में भी स्मोकिंग के लिए एक एरिया तय किया गया है। हॉवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के विजिटिंग साइंटिस्ट और Healis Sekhsaria Institute के डायरेक्टर डॉक्टर पी.सी.गुप्ता का कहना है कि जिस संसद ने कानून पास किया वही संसद इसको तोड़ रही है। गुप्ता ही इस मामले को स्पीकर सुमित्रा महाजन तक लेकर गए हैं। गुप्ता ने कहा, ‘देश के लिए यह एक बहुत गलत मिसाल है, संसद अगर अपने कानून की इज्जत नहीं कर सकती तो फिर और कौन करेगा। कानून बहुत साफ है कि किस जगह एक स्मोकिंग एरिया होना चाहिए और सभी पब्लिक प्लेस स्मोक फ्री होने चाहिए, संसद हर हिसाब से एक पब्लिक प्लेस है।’ गुप्ता ने कहा कि यह पूरी तरह से एक कानूनी मामला है क्योंकि यह कानून के उल्लंघन से संबंधित है, वही लोग कानून का उल्लंघन कर रहे हैं जिन्होंने इसे बनाया। कानून के मुताबिक ऐसे होटल जिनमें 30 या उससे ज्यादा कमरे हों या फिर रेस्टोरेंट्स जिनकी सिटिंग कैपेसिटी 30 से ज्यादा की हो और एयरपोर्ट में ही स्मोकिंग एरिया हो सकता है।
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