नरेंद्र मोदी गुजरात में प्रेमिका को बनाया घोड़ी, प्रेमी को उस पर बैठाकर गांव में निकाली बारात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहे जितना विदेश घुम लें और अपने राज्य गुजरात में विदेशियों को घुमा लें लेकिन गुजरात, हरियाणा, पंजाब और ऐसे ही गुर्जर राज्यों से पंचायती राज्य व्यवस्ता जो घटिया निर्णय के लिए जाने जाते हैं को नहीं खत्म कर सकते। इनके गुंडागर्दी के कारण कई परिवार खत्म हो गए लेकिन सरकार हमेशा इन तथाकथित मर्दानगी रखने वालों के सामने कठपुतली बनी रही। इनकी इतनी ताकत कहां से आई यह पता नहीं, लेकिन सरकार और न्यायालयों के मुकदर्शक रवैया और कठोर कार्रवाई नहीं करने से यह सब सहपर होता रहा। हालिया उदाहरण यह गुजरात के उदयपुर का ले लिया जाए यहां के प्यार करने एक जोड़ी और उनके परिजनों को जो सजा दी गई वह कहीं से भी माफ करने लायक नहीं है। ऐसे गांव के लोगों जो इस सजा के दौरान वहां उपस्थित रहे कड़ी से कड़ी सजा यहां तक की मौत की सजा भी दे दिया जाए तो कम होगा। ऐसे मानवता को कलंकित करने वाले लोगों की कार्रवाई पर पता नहीं मानवाधिकार के लोग कहां चले जाते हैं, जो पुलिस और अच्छे लोगों की कार्रवाई के दौरान मुंह बाएं खड़े हो जाते हैं। क्या उन्हें ऐसे मामले नहीं दिखते जिसमें किसी परिवार के लोगों को सरेआम बेइज्जती किया जाता है, मारा जाता है और उनके ऊपर अनाप-शनाप जबरिया वसुली की जाती है। ऐसे लोगों जो समाज में ऐसी कार्रवाई कर अपने आपको ऊंचा समझते हैं को हमेशा के लिए परिवार से अलग कर देना चाहिए। साथ ही ऐसे सरपंच जिनके पंचायत में वे कार्रवाई करते हैं को गांव में ही सजा देनी चाहिेए ताकि मिशाल बन सके। लेकिन न तो अभी तक ऐसी कोई कार्रवाई हुई और न ही आगे होने की उम्मीद नजर आती है। हालिया घटना क्रम इस प्रकार है कि गुजरात के उदयपुर का एक युवक और युवती को गांव वालों ने ऐसी सजा दी सुनकर आप दंग रह जाएंगे। दोनों को और उनके परिवारों को सरेआम अपमानित कर भारी जुर्माने के साथ गांव से बाहर निकाल दिया गया। मामला छोटे उदयपुर का है, जहा गांव के एक युवक को 11वीं कक्षा में पढऩे वाली एक लड़की से प्यार हो गया और दोनों गांव छोड़ कर भाग गए, लेकिन गांव के कुछ़ लोगों और रिश्तेदारों ने दोनों को खोज निकाला और दोनों को पकड़कर गांव में ले आएं। फिर गांव के सरपंच और पूरे गांव के लोग एक जगह इक्ठ्ठे हो गए और लड़की को घोड़ी बनाकर और उस पर लड़के को बैठाकर पूरे गांव में बारात निकाली गई। दोनों की शादी करवाई गई और तोहफे में उन्हे गोबर और कांटों का हार पहनाया गया। उसके साथ ही लड़के के माता-पिता पर 5 हजार और लड़की के माता-पिता पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया और गांव से बाहर निकाल दिया गया और गांव के सरपंच ने धमकी दी कि अगर दोनों एक साथ दिखे तो पांच लाख जुर्माना देना होगा। अब यह सरपंच कौन होता है जो किसी की आजादी को छीने। लोग स्वतंत्र है अपने मुताबिक जिने को वह कहीं रहे किसी के साथ रहे। देश की कानून व्यवस्था और सरकार की पंगु पना को देखकर कभी ऐसा लगता है कि अंग्रेजी हुकुमत आ गई है तो कभी लगता है कि सब के सब किसी काम के नहीं। सरकार को ऐसे मामले को गंभीर मानना चाहिए और कड़ी कार्रवाई करके देश के लिए एक मिशाल बनना चाहिए।

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