New Year: यह कैसा नया साल
लोग उत्साहित कैसे हो सकते हैं। अभी कुछ ही दिन पहले तो 150 से ज्यादा बच्चों का कत्लेआम हुआ है। अभी कल ही तो मलेशियाई विमान का पता चला है। इसमें 162 लोगों की मौत हुई है। दुनिया गम में डूबा है हम कैसे नए साल का जश्न मना सकते हैं। क्या इस दुनिया से हम अलग है। अगर हां तो किस तरह। भारत के वैसे तो हिंदूवादी लोग किसी भी चीज का विरोध करने लगते हैं। अब इस नए वर्ष पर कहां गए। लाखों करोड़ों के पटाखे फोड़ दिए गए। करोड़ों रुपए खर्च कर डीजे, पब और न जाने कहां कहां पार्टी तैयार की गई है। लोग पुरी रात आज शराब के नशे में नाचेंगे। इसमें शामिल ज्यादातर तथा कथित हिंदूवादी के बच्चे ही होते हैं। कहने को तो कुछ भी कह दें। दिखावे में जीने की आदत हो गई है हिंदूस्तानियों की। अगर ऐसा नहीं है तो नए वर्ष का विरोध कर दिखाएं। पीके का तो बहुत विरोध किया वेलेनटाइन डे का भी बहुत विरोध करते हो। अब कहां गए। अजी कहना बहुत आसान है करना कठीन। वेलेनटाइन डे का विरोध इसलिए कर लेते हो क्योंकि भारत की कुत्ती संस्कृति आपको सह देती है वरना जिस दिन आप इसका विरोध करो और उसी समय कोई बंदूक चला दे दो चार लोगों को कुत्ते की तरह सड़क पर मारकर छोड़ दे तो आपकी हिंदूवादी आपके पीछवड़े में घुस जाएगा। आप जो हिंदूवादी का ढो़ंग रच रहगे हैं किसे नहीं पता है क्या कर रहे हैं। आपकी घर वापसी की नौटंकी किसे समझ नहीं आती।
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