जन संभल जा जरा फिर सरकार चुनने चला है तू...

14 14 14.... 2014 ने जाते जाते ऐसा गम दिया है छत्तीसगढ़ को देश को कि देश और राज्य भूल नहीं पाएगा। इस 14 ने तेरी ऐसी तैसी करके रख दिया। पहले नसबंदी करने वाली 14 महिलाओं की मौत फिर 14 जवानों कि शहादत और अब 14 मासूम बच्चों की मौत। नसबंदी के समय सिर्फ 14 महिलाओं कि मौत बस नहीं हुई, बल्कि 7 से ज्यादा लोगों की सिप्रोसिन 500एमजी सहित दवा खाने से मौत हुई। जवानों की मौत एक 47 और एबुंस से हुई तो बच्चे कुपोषण और कमजोरी से।
नसबंदी कांड का खुलासा होने के बाद और परिसमन में गड़बड़ी होने पर हाई कोर्ट ने सरकार को राहत तो दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जो किया वह सरकार के लिए सामत बन गई। ऐसा तगड़ा झटका दिया कि सरकार औंधे मुंह गिर पड़ी। अब दिसंबर में नामांकन और जनवरी 2015 में चुनाव कराना है। चुनाव शहर और ग्राम सरकार की होने वाली है। यहीं से नींव तैयार होती है राजनीति की। इस बार इतना कुछ सहने के बाद लगता है कि जनता संभल कर चलेगी। पिछली गलतियां दोहराएगी नहीें। सरकार चयन में इस बार की गलती जितना महंगा पड़ा है ‌वह नहीं चाहेगी कि यह गलती दोहराई जाए। जन संभल जा जरा फिर सरकार चुनने चला है तू... थोड़ा सोचकर समझ कर चुनना उसे होगा जो आपका विकास करे अपना नहीं। पिछले पांच वर्षों से जिसे झेल रहे हो उसे फिर से झेलने से अच्छा है नए को स्थान दो और ओ भी समझाकर कि बेटा काम करना वरना तूम्हें भी आगे हम नहीं झेल पाएंगे। साथ ही अब तो मांग उठनी ही चाहिए जनता का अधिकार है राइट टू रिकॉल यह अधिकार मिलना चाहिए। मतदान करने का जनता का जैसे अधिकार है वैसे ही राइट टू रिकॉल का भी अधिकार होना चाहिए। संविधान में मिले स्वतंत्रता के अधिकार के तहत यह भी हमें मिलना चाहिए कि हमे राइट टू रिकॉल करने की आजादी हो। अब और मौत नहीं झेल सकती छत्तीसगढ़ की जनता। छत्तीसगढ़ की जमीन खून की प्यासी नहीं है। हमारा बस्तर हरे रंग से हमेसा रंगा रहे यह चाहत है प्रदेश के लोगों का उसे लाल रंग से न रंगा जाए। यही चाहत है बस्तर के लोगों की। इस बात को जनता माने सरकार को समझाए और बस्तर सहित राज्य की भूमि को लाल रंग से रंगने वाले यह जल जगंल जमीन की लड़ाई नहीं है सब जानते हैं।

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