जिहाद है यह कैसा जो मानवता को खत्म कर गई
पाकिस्तान के पेशावर आर्मी स्कूल पर तालिबानी आतंकियों ने हमला कर
दुनिया को जो दिखाया वह मानवता को खत्म करने वाला है। तालिबानी यह कैसी
जिहाद कर रहे हैं। क्या चाहते हैं ऐ जिहादी। बंदूक की नोक पर दुनिया पर
शासन किया जा सकता तो सिकंदर कभी मरता नहीं। तैमूर लंग तो दुनिया में आज भी
होता। आतंकियों से संबंधित अक्सर समाचारों में कुरान की बात करते पढ़ा हूं।
सच्चा मुसलमान और कुरान पाक की बात करने वाले आतंकी यह बता सकते हैं कि
हथियार उठाकर शुरुआत किसने की है। यह बता सकते हैं कि सबसे पहले किसे मारा
गया। कुरान में क्या लिखा है मासूमों की हत्या और महिलाओं को जींदा जलाना।
यही लिखा है कुराना में। अगर ऐसा होता तो आज जो लोग कह रहे हैं कि कुरान
में लिखा है कि महिलाओं को जींदा जलाना और मासूमों की बेरहमी से हत्या करना
लिखा है तो सोचिए वे क्या आज बचे होते। उनके पैदा होते ही कुरान के
नियमानुसार उन्हें मार दिया जाता। आंतक का कोई धर्म नहीं होता। मजहब नहीं
होती कुरान नहीं होता गीता नहीं होती बाइबल नहीं होता गुरुग्रंथ नहीं होता।
उनका सिर्फ और सिर्फ एके 47, एके 56, ग्रेनेड, बम, बंदूक होते हैं। आतंकी
कोई धर्म ग्रंथ नहीं पढ़ता वह सिर्फ और सिर्फ आतंक कैसे फैलाया जाए यह याद
रखता है। कैसे खुद को मारकर अपने साथ कइयों को मारने की बात सोचता है। किस
धर्म में लिखा है लोगों की हत्या करना, मासूमों की हत्या करना। कहीं नहीं
पशु वध तक पर कई धर्मों पर रोक है। यह आतंकी जो बता रहे है वे किस धर्म की
बात कर रहे हैं। क्या दुनिया में उनका धर्म अलग है। कौन सी धर्म की बात हो
रही है क्या वह धर्म लोगों को ज्यादा शांति देती है। क्या उस धर्म में
जुड़ने से लोग ज्यादा शकुन से जीते हैं। नहीं वह कट्टरता और सिर्फ गुनाह
करने के लिए झूठे धर्म की बात करते है। मुसलमान शब्द का सही अर्थ तक नहीं
पता। उन्हें जितना कहा जाता है वे कर देते हैं। अपनी सोच नहीं होती। ऐसे
जींदा रहने से और ऐसे मरने से क्या फायदा। खबरों के अनुसार कुछ आतंकी यह भी
कहते हैं कि मरने पर खुदा उन्हें जन्नत देगा। और खुदा की सारी सुविधाएं
उन्हें इस तरह के अत्याचार के लिए मिलेगा। अगर ऐसा होता तो सारे लोग हथियार
उठा लेते और पुरी दुनिया को खत्म कर खुदा के पास होते। यह खुदा क्या चीज
है उसे भी मारकर उससे ऊपर पहुंच जाते। मनुष्य का जन्म मिला है तो जीयो ना
जंगली जानवर तो थे ही बनकर रहोगे तो भी फर्क नहीं पड़ता मगर इस तरह की हराम हरकत करके जमात को कलंकित तो मत करो। वैसे आतंक मचाने वाले की कोई जमात नहीं होती पर मरने पर मुसलमान माना जाता है हिंदू माना जाता है इसाई माना जाता सिख माना जाता है के बाकी लोगों का जीना मुहाल तो मत करो। जो भी हो जिस भी धर्म से हो ऐसे लोगों के मारे जाने पर एक अलग कब्रिस्तान होना चाहिए वहां पर शौचालय और सुअर का निवास बनाना चाहिए ताकि मरने के बाद उन्हें ओ सारी सौगातें मिल सके जो उनके अनुसार मिलने वाली है। ताकि दुनिया को पता चल सके और जो इस रास्ते पर जाना चाहते हैं वे देख सके कि मरने के बाद उन्हें क्या मिलेगा। ऐसा करना अब जरूरी हो गया है। जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा लोगों को ऐ लोग मारते रहेंगे झूठे जिहाद के लिए।
भारत में भी भयावह स्थिति आए उससे से पहले सरकार को सचेत हो जाना चाहिए ताकि मासूमों की इस तरह मौत न हो। अभी भी सरकार के पास वक्त है नक्सलवाद को काबू करने का वरना तालिबान और नक्सलवाद में ज्यादा फर्क नहीं होगा आने वाले समय में। लगातार नक्सली सेना के जवानों और आम लोगों को मार रहे हैं। कहीं ऐसा न हो सेना सत्ता को अपने हाथ में लेकर पूरे देश को संकट में डाल दे।
जंगली जानवर तो थे ही बनकर रहोगे तो भी फर्क नहीं पड़ता मगर इस तरह की हराम हरकत करके जमात को कलंकित तो मत करो। वैसे आतंक मचाने वाले की कोई जमात नहीं होती पर मरने पर मुसलमान माना जाता है हिंदू माना जाता है इसाई माना जाता सिख माना जाता है के बाकी लोगों का जीना मुहाल तो मत करो। जो भी हो जिस भी धर्म से हो ऐसे लोगों के मारे जाने पर एक अलग कब्रिस्तान होना चाहिए वहां पर शौचालय और सुअर का निवास बनाना चाहिए ताकि मरने के बाद उन्हें ओ सारी सौगातें मिल सके जो उनके अनुसार मिलने वाली है। ताकि दुनिया को पता चल सके और जो इस रास्ते पर जाना चाहते हैं वे देख सके कि मरने के बाद उन्हें क्या मिलेगा। ऐसा करना अब जरूरी हो गया है। जब तक ऐसा नहीं किया जाएगा लोगों को ऐ लोग मारते रहेंगे झूठे जिहाद के लिए।
भारत में भी भयावह स्थिति आए उससे से पहले सरकार को सचेत हो जाना चाहिए ताकि मासूमों की इस तरह मौत न हो। अभी भी सरकार के पास वक्त है नक्सलवाद को काबू करने का वरना तालिबान और नक्सलवाद में ज्यादा फर्क नहीं होगा आने वाले समय में। लगातार नक्सली सेना के जवानों और आम लोगों को मार रहे हैं। कहीं ऐसा न हो सेना सत्ता को अपने हाथ में लेकर पूरे देश को संकट में डाल दे।
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