भारतीयों को हो क्या रहा है आंतक से जुड़़ने का ट्रेंड होते जा रहा
| मेहदी मसरुर |
भारत को शांति के लिए जाना जाता है। किसी को अहित न पहुंचाना ही यहां के
लोगों की पहली कोशिश होती है। भारतीय मदद करने से पीछे कभी नहीं हटते।
दुनिया में शांति का नोबल भी भारतीयों के नाम ज्यादा है। इससे यह तो पता
चलता है कि भारतीय शांति के प्रतिक होते हैं। हमारा राष्ट्र ध्वज भी यही
संदेश देता है। ध्वज में केसरिया रंग देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है।
बीच की पट्टी सफेद चक्र के साथ शांति और सच्चाई और निचली पट्टी हरी जो
उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता के साथ हरियाली को दर्शाता है। इसमें
सफेद पट्टी बने चक्र को धर्म चक्र कहते हैं। यह चक्र सभी धर्मों को समान
रूप से मानता है। इसके बाद भी भारत के लोगों का आंतक के रास्ते पर जाना देश
के लिए शर्मनाक है। आतंकी बनने उसकी ट्रेनिंग लेने और उससे जुड़ने की
सोचना भी कितनी बड़ी बात हो सकती है। कुछ सालों से देखने को मिल रहा है कि
भारत के लोग आतंकवादी संगठनों से जुड़ने में ज्यादा रूचि ले रहे हैं। इस
रास्ते पर भारत का आदमी जा रहा है जो पूरी दुनिया में शांति के लिए
प्रतिबद्ध है। यह कितनी शर्मनाक बात है। भारत के लोग मैं भारतीय हूं नहीं
कहते हम भारतीय हैं कहते हैं। संगठन को एक करने वाले देश के लोग आतंक
फैलाने वालों के साथ हो रहे हैं। यह देश और दुनिया के लिए बहुत ही गलत
संदेश है। दुनिया को जहां हम शांति के लिए प्रेरित कर रहे हैं वहीं हमारे
ही लोग उस रास्ते पर जा रहे हैं। यह तो बहुत ही चिंता की बात है। इसके लिए
क्या कारण हो सकते हैं इसके पीछे हमें जरूर जाना चाहिए। मेरे कुछ आंकड़े जो
समाने आए हैं उससे पता चलता है कि पढ़ा लिखा वर्ग इस ओर ज्यादा जा रहा है।
इसके लिए एक कारण असंतुष्टी है। लोग अपने कामों से असंतुष्ट हैं। उन्हें
लगता है कि जितनी योग्यता उनमें है उसके हिसाब से उन्हें काम नहीं मिल रहा।
उनको जो करना चाहिए उसके बजाय वे बेरोजगार हैं। यह बड़ा कारण है इससे
लोगों में भटकाव कहीं न कहीं हो रहा है। यही कारण है कि न सिर्फ आतंकवाद
में बल्कि देश के लिए सिरदर्द बन चुका नक्सलवाद में भी पढ़े लिखे लोग शामिल
होकर देश के ही लोगों का खून बहा रहे हैं। भारत में बहुत सारे शिक्षित
युवा बेरोजगार हैं। इससे उनके गलत रास्ते पर चलना लाजमी है। उन्हें काम में
बांधकर उनकी एनर्जी को गलत जगह पर लगने से बचाना होगा। इसके लिए शासन स्तर
पर और बड़े संगठनों, संस्थाओं को चाहिए की रिसर्च सेंटर की स्थापना करे
ताकि हर फिल्ड का युवा उसमें रिसर्च कर समाज को देश को सही रास्ते से आगे
लेकर जाए न की आतंकवाद और नक्सलवाद जैसे घिनौने और घटिया मार्ग पर। यह सच
है कि बेरोजगारी और खाली बैठे लोग ही आगे चलकर महंगाई के दौर में ज्यादा से
ज्यादा धन कमाने के लालच में इस गलत मार्ग पर चल रहे हैं। कुछ लोगों को
बहकाया भी जाता है। कुछ को सच्चा मुसलमान बनने तो कुछ को सच्चा हिंदू बनने,
गरीब और उसके हक जल जंगल जमीन के लिए गलत मार्ग पर लाया जाता है। इससे
उन्हें बचाना होगा। कुछ कहते हैं कि अल्लाह को कुर्बानी पसंद है तो कुछ को
हमेशा से हिंदुओं का शोषण हो रहा है यह कहते हैं। कुछ ऐसे है जिन्हें लगता
है कि उनके जल जमीन और जंगल को छीनकर प्रशासन शासन पूंजीपतियों को सौंप
रही है। वे अपने क्षेत्र में न तो सड़क बनाने दे रहे हैं न पुल पुलिया। ऐसे
में विकास नहीं होगा कभी यह भी सोचना होगा। वे हमेशा बेरोजगार रहेंगे। गलत
मार्ग पर चलने से अच्छा है युवा वर्ग देखे कि वे क्या गलत कर रहे हैं। कई
युवाओं को लगता है कि वे गलत कर रहे हैं पर परिवार का बोझ ज्यादा होने के
कारण कहीं न कहीं उनको गलत मार्ग पर चलने मजबूर कर रहा है। समाज जो हमेशा
गलत रहा है उसे भी अब सही सोच रखनी होगी। गलत अगर समाज का युवा वर्ग कर रहा
है तो उसे चाहिए की उसे इस मार्ग पर चलने से रोकने केके लिए समाज में
नौकरी पेशा की व्यवस्था करे। अन्यथा ऐसा समाज किस काम की जो सिर्फ अपनी
फरमान चलाए। ऐसा नहीं होना चाहिए। साथ ही अपनी जिम्मेदारियां भी हैं इसका
मतलब यह तो नहीं होता कि वे आतंकवादी बन जाए। आतंकवादियों के लिए ट्विट और
फेसबुक, ब्लॉगर चलाए। आंतकवादी बनने के लिए लोगों को प्रेरित करें।
बेरोजगार होने का मतलब यह नहीं हो सकता है कि वे दुनिया के सामने भारत को
घुटने पर खड़ा कर दें। जो लोग ऐसा सोचते हैँ उन्हें न सिर्फ देश द्रोही
माना जाए बल्कि उनके खिलाफ कसाब और अफजल गुरु जैसा अपराध चलाया जाए। कुछ
समय पहले आईएसआई में शामिल होने एक युवक इराक गया था। युवक मुंबई से लगे
कल्याण का रहने वाला था। इराक जाने वाले चार युवकों में से एक आरिफ माजिद
था। जिसे भारत लौटने पर भारतीय सुरक्षा एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो ने
गिरफ्तार कर लिया। वह इसी साल 23 मई को अपने तीन दोस्तों अमन, फहद और साहिम
के साथ आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मुंबई से फरार हो गया
था। उसके परिवार को 26 अगस्त को जानकारी मिली थी उनके बच्चे आतंकी संगठन
में शामिल हो गए हैं। परिवार वालों से मदद मांगा तो उसे वापस लाया जा सका।
ऐसे ही अब एक नया केस आया है। इसमें बेंगलूरु से आतंकी संगठन आईएसआईएस के
लिए ट्विटर हैंडल करने वाले युवक को गिरफ्तार किया गया है। यह 24 वर्षीय
युवक मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव है। इसका नाम मेहदी मसरूर है जिसे इंटेलिजेंस
ब्यूरो ने पकड़ा है। वह शामीविटनेस नाम से ट्विटर एकाउंट चलाकर देश के
खिलाफ जंग छेड़ने पर तुला था। खुद को सच्चा मुसलमान बताने वाला यह शख्स गला
रेतने को कुरान का अंग बताता है। “इस लेख में मुस्लिम या हिंदू वर्ग से
जुड़ी बातें नहीं की जा रही है।” ना ही किसी वर्ग को आहत करने की मेरी
कोशिश है।” मैं अपने उन करोड़ों लोगों जो देश की सेवा कर अपनी जान गवां
देते है कभी सरहद पर तो कभी सांप्रदायिक दंगों में के साथ हूं। साथ ही मैं
उन लोगों के खिलाफ हूं जो ऐसी गतिविधियों में शामिल हो मेरे भारत देश को
घुटने पर खड़ा करने की कोशिश करते हैं। इसके पकड़े जाने के बाद अब भारत की
दुनिया में क्या तस्वीर बन रही है यह किसी ने सोचा। पुरी दुनिया भारत को
आतंकियों को शरण देने का गढ़ मान रही है। हालांकि ऐसा है नहीं यहां जो भी
आतंक फैलकर आते हैं उनके साथ उसी तरह का ट्रीटमेंट किया जाता है जैसे
दुनिया के अन्य देशों में होता है फिर भी दुनिया के नजर में हमारी इमेज
गिरी है। ब्रिटेन के न्यूज चैनल 4 ने खुलासा किया जिसे दुनिया भर में देखा
जाता है। आतंकी संगठन से जुड़ने पर उन्हें क्या मिलता है इसकी जानकारी
सार्वजनिक होना चाहिए और उसके खिलाफ क्या कार्यवाही होती है इसे सार्वजनिक
करना चाहिए। वर्तमान में सूचना आ रही है कि शामीविटनेस नाम के ट्विटर जैसे
तीन और अकाउंट सक्रिय है।
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