धर्म परिवर्तन पर संसद में पहली बार बवाल
धर्म परिवर्तन पर पहली बार संसद में बवाल मचा है। यह पहला मौका है जब देश के नेताओं को धर्म परिवर्तन होने की जानकारी मिली है। इससे पहले तथा कथित अल्पसंख्यक (2करोड़ से ज्यादा आबादी वाले लोग) अलग-अलग माध्यम से धर्म परिवर्तन करा रहे थे तब क्यों बवाल नहीं मचा। वोट बैंक कि राजनीति कर बंग्लादेशी नागरिकों को भारत में अल्पसंख्यक किन लोगों ने बनाया। नागरिकों ने या वही संसद में बैठे राजनीतिक पार्टियों में बैठे लोगों ने। आज जो सुविधाएं भारत के लोगों को मिलनी चाहिेए थी पश्चिम बंगाल में, असम और तमिलनायडू में दूसरे देश के लोगों को मिल रही है। भारत के जवान रोज मारे जा रहे है शरहद पर उसपर कभी बवाल नहीं मचा। किसी भी दिन ऐसी मांग उनलोंगो ने नहीं किया कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार गोलीबारी हो रही है और बंग्लादेश से लगातार घुसपैठ हो रहा है उसके लिए कदम उठाया जाए। चीन के सैनिक लगातार सीमा क्षेत्र में घुस आते हैं इसपर कभी बवाल नहीं मचा। आज जब हिंदू धर्म पर संकट आ गई है उसे बचाने के लिए प्रयास हो रहे हैं तो इसे राजनीतिक लोग धर्म परिवर्तन के रंग में रंगने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों ने वहीं किया ना जो वे करते हैं छूप-छूपकर वह इन्होंने सार्वजनिक कर दिया वही किया तो इतना बवाल क्यों। यह हिंदूस्तान है। जिसे ज्यादा खुजली हो रही है 1947 में पाकिस्तान उसके बाद 1971 में बंग्लादेश बना दिया गया है। कांग्रेस को ज्यादा खुजली मच रही है तो इंदिरा गांधी के समय पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना को मिली जीत के बाद बंग्लादेश को अलग देश घोषित करने की क्या जरुरत थी यह बताए। टीएमसी को खुजली है तो यह बताए पश्चिम बंगाल में बंग्लादेशी लोगों को राजनीति के लिए क्यों शरण दे रहे हैं। सपा को खुजली है तो बताए अयोध्या में मंदिर क्यों नहीं है जबकि सर्वविदित है कि वहां राम मंदिर था। बसपा को खुजली मची है तो वे बताए अपने शासन काल में उत्तर प्रदेश में इतने हाथी क्यों बनावाए। अंबेडकर, काशीराम, मायावती और हाथी की प्रतिमा क्यों स्थापित किए। जब वे कर सकते हैं और वह सही होता है तो लोग करते हैं तो वो गलत कैसे हो सकता है जबकि उनके किए के दम पर ही वे संसद में बैठकर उछल रहे हैं। कई राज्यों कि सरकार दूसरे देशों के संरक्षण मिल रही है। आज कांग्रेस जो इतना बवाल मचा रही है उस समय क्यों बंग्लादेश को नहीं भारत में मिलाया। उसी समय मिला लिए होते भारत में उसे भी। देश के लोगों को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। संसद में बैठे लोग ढोंग रचकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। अगर वक्त रहते इन्हें नहीं रोका गया तो आने वाले समय में ऐ लोग नासूर बना देंगे। अब तो जनता को चाहिए की एक बार जिसे चुनाव में मौका दिया और वह सही साबित नहीं हुआ चाहे वह किसी भी पार्टी से धर्म से जाति से हो उसको एक सिरे से बहिष्कार करते हुए उसे वोट नहीं देना चाहिए। आज भारत के अधिकतर राज्य इसाई बहुल्य हो चुके हैं। यहां के लोग सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। और दूसरे देश के लोग सारी सुविधाओं को पा रहे हैं। अगर आजादी के समय और आज के समय में जातिगत और धर्म पर जनगणना कराई जाए और जनसंख्या को देखा जाए तो किस धर्म की कितनी जनसंख्या है यह साफ पता चल जाएगा। हालात यह है कि यहां हिंदू सिर्फ कहने को हैं। यहां तक कि इसाईयत कबूल करने वाले कई हिंदू अब दोहरा लाभ ले रहे हैं। एक तरफ वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति का हक मार कर ले ही रहे हैं दूसरे तरफ उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ भी मिल रहा है। राज्य और देश की सरकार इस ओर कभी ध्यान नहीं देती है। साथ ही संसद में बैठे राजनीतिक और धर्म के ठेकादारों को यह कभी दिखाई नहीं देता। राजनीतिक अस्थिरता फैलाकर देश में मजे करने की इनकी नियत देश को बहुत जल्द फिर से गुलाम बना देगी। अंग्रेजों से पहले यहां के शासक और राजाओं के जो हालात थे वहीं फिलहाल फिर से भारत में हो गया है। अगर इस बार भारत गुलाम हुआ तो आजादी मिलना तो दूर सब एकजूट तक नहीं हो पाएंगे। और इस बार तो सिर्फ तीन टूकडे हुए थे। अगली बार भारत का नाम नक्सा से खत्म हो जाएगा।
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