अंधविश्वास की भी हद होती है
आजादी के बाद से लोगों में लगातार शिक्षा और रहन सहन में बदलाव हुआ है। लगातार लोग जागरुक और जानकार होते गए। उच्च शिक्षा देश में मिलने लगी तो यहां के कई नामचीन संस्थाओं के दुनिया में नाम हो गए। भारत के लोगो का नाम दुनिया भर में फैल गया इसलिए की यहां के लोग संस्कार वान होते है। बहुत ही बुद्धिमान होते हैं। लेकिन जब सुनता हूं की तांत्रिक के विश्वास में आकर मां ने अपने बेटे को, पड़ोसी ने पड़ोसी के बच्चे को, सांप न काटे इसके लिए मंंत्र तंत्र के बाद प्रसाद खाने से, और टोनही होने के शक में किसी की हत्या कर दी जाती है कि इससे अच्छा तो गुलामी था। कम से कम लोगों में यह अंधविश्वास तो नहीं था। तंत्र मंत्र होना चाहिए पर इस तरह नहीं कि जो वैज्ञानिक मान्यता को और सांस्कृतिक मान्यता को शर्मशार कर दे। कुछ दिन पहले दो समाचारों ने मन को बहुत आघात पहुंचाया। दोनों ही मामला छत्तीसगढ़ राज्य का है। वैसे तो बहुत सारे समाज सेवी यहां काम कर रहे है। समाज सेवी संस्थाएं काम कर रही है पर यहां कुछ ज्यादा ही टोनही होने पर अपराध होने की घटनाए होती है। कुछ दिन पहले कि ही बात है यहां के छत्तीसगढ़ के बेलतरा की घटना दिल दहला देने वाली। एक महिला पर पहले टोनही होने का आरोप लगाया जाता है फिर उसकी सार्वजनीक पीटाई की जाती है इसके बाद उसके आंख मुंह और प्राइवेट पार्ट्स पर मिर्ची लगाया जाता है। हैवानियत का नंगा नाच होता है और यह समाज, गांव के लोग इस नंगे नाच को देखते हैं ऐसे समाज की जरुरत ही क्या है। जो लोग इस नंगे नाच को हैवानियत को अंजाम देते है उनपर क्या कार्रवाई होती है यह भी एक बड़ी बात है। देखने को तो यह भी मिला की दिल्ली में अगर यह घटना होती तो न जाने मीडिया के मां के साथ घटना घट जाती है जैसे राग अलापने लगते हैं पर बेलतरा जैसे छोटे जगह पर घटना होती है तो उनके नजर में कोई मायने नहीं रखता उनका यह टीजी (टार्गेट ग्रुप) नहीं होता। गुस्सा आता है कि एक ही देश में गांव, नगर और महानगर के लिए अलग-अलग कानून है। यहां समाज सेवी भी उसी दोहरे रवैये को अपनाते है। दोगली नीति से अच्छी है ऐसे समाज सेवी संस्था राज्य को छोड़कर चले जाए नहीं चाहिए विकास। यहां के लोग मारे जाएं और कुछ न हो। ऐसा कानून नहीं चाहिए कि दिल्ली के किसी नेता के पीछे पुलिस को लगा दे और कानून व्यवस्था को कलंकीत करने वाले, नंगा नाचकर हैवानियत फैलाने वाले को पकड़कर सजा न दिला पाए। हद तो बलौदा बाजार में हो गई शिक्षा का लेवल बढ़ा है पर इतना घटिया स्तर कहीं नहीं होता। एक तांत्रिक यहां आता है लोगों को कहता है कि सांप का मंत्र सिख लो सांप के काटने पर उसका असर नहीं होगा और जहर खिला कर सात लोगों को मार डालता है और हमारी पुलिस व्यवस्था ऐसे लोगों को पकड़ तक नहीं सकती। लाखों करोड़ो रुपए खर्च किए जा रहे हैं एनजीओ को दिए जा रहे हैं एनजीओ के संचालन करने वाले क्या घांस छिलते हैै कि उन्हे उनके क्षेत्र में ऐसे हरकत करने वाले नहीं दिखते। फिर इतने सारे लोग वहां कैसे क्या धार्मिक आयोजन कर रहे हैं किसी धर्मांध को नहीं दिखता वैसे तो यहां पंडितों की कोई कमी नहीं है। हर मौके पर अपनी शानो शौकत दिखाने में लगे रहते हैं। जिला बन गया है बलौदा बाजार वहां के बिलाई गढ़ में यह घटना हुई। जिला अस्पताल में क्या व्यवस्था थी। 150 लोगों ने तांत्रिक का जहरीला प्रसाद खाया 70 लोग गंभीर रुप से तो उतना ही आंशिक रुप से बीमार पड़े। शिक्षा का स्थर बड़ा है शक नहीं पर अंंधविश्वास उससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। लोग जितना शिक्षित होते जा रहे हैं उतना ही नीच और घटिया मानसिकता वाले होते जा रहे हैं। लोगों की सोच में ही घटियापन हो गया है। एक और समाचार अभी आया कि रेल कर्मी की पत्नी और बेटी को एक तांत्रिक आया और अपने साथ ले गया। उन्हें शिकायत मिलने पर पुलिस ने छुड़ाया इसी प्रकार की एक घटना पहले हुई जब छात्रावास अधिक्षिका जिसका पति भी नौकरी पेशा और बेटा और बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे है एक तांत्रिक के साथ बिलासपुर में अपने परिवार का साथ छोड़कर उसके साथ रहने लगी। जब पड़े लिखे लोग ऐसी हरकत कर रहे हैं जिनके कंधे पर समाज को सुधारने की जिम्मेदारी है वे ऐसी हरकत कर रहे हैं तो अनपढ़ और गांव में जहां न बिजली पानी तक सही तरिके से उपलब्ध नहीं हो पाता वे कैसे जागरुक होंगे। वे कैसे न ठगे जाए। भारत के शिक्षा में बदलाव की जरुरत हैं। यहां हर राज्य के लिए जो अलग-अलग शिक्षा पद्धति बनाई गई है उसमें सुधार की आवश्यकता है। एक शिक्षा प्रणाली हो ताकि देश के हित में नई पीढ़ी सोच सके राज्य और राज्य की शिव सेना नीति को नहीं, की महाराष्ट्र हमारे बाप का है तो मुंबई में मेरी मां ने पैदा किया है। या तमिल को वहां के लोगों की जागीर है जिसमें हिंदी भाषी या दुसरे भाषाओं को बोलने वाले नहीं जा सकते हैं। एक व्यवस्था हो एक विषय पढ़ाए जाए। एनसीईआरटी की पुस्तके हर जगह शिक्षा पद्धति में जोड़ा जाए और राज्यवार प्रणाली को समाप्त किया जाए। केंद्र में मजबुत सरकार बनी है उम्मीद है बेहतर कार्य करेगी। शुरु भी हुई है और कार्य अच्छा किया जा रहा है। शिक्षा कि प्रणाली में बदलाव होगा यह भी उम्मीद है।
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nhi hoti hai